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देपालपुर गोशाला में भूख एवं प्यास से चली गई 20 गायों की जान: महू से 20 दिन पहले पकड़ी थीं; पालक गोशाला पहुंचे तो मृत मिलीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 जनवरी 2026, 1:14 अपराह्न
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महू से करीब 20 दिन पूर्व पकड़कर देपालपुर की गोशाला पहुंचाई गई 20 गायों की मौत हो गई। जब पालक वहां पहुंचे तो गायों के शव देख आरोप लगाया कि गोशाला भले ही नगर निगम द्वारा संचालित है, लेकिन भूख-प्यास से इन गायों की मौत हुई है। उन्होंने मामले की जांच की मांग की है।

गोपालकों ने बताया महू केंटोनमेंट बोर्ड द्वारा करीब 20 दिन पूर्व चलाए गए अभियान के दौरान 20 गायों को पकड़ा गया था, जिन्हें बाद में देपालपुर रोड पर हातोद के रेशम केंद्र के नजदीक स्थित गोशाला में पहुंचा दिया गया। जब पालक यहां अपनी गायें वापस लेने पहुंचे तो उन्हें गोशाला के संचालक स्वामी अच्युतानंद ने कहा कि वे गायों का बेहतर ध्यान रख रहे हैं।

आप महापौर पुष्यमित्र भार्गव से परमिशन ले आओ तो गायों को छोड़ देंगे। इस पर महू के गोपालक महापौर के पास पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिया। कई दिन बाद जब वे निगम का आदेश लेकर पहुंचे तो पाया कि गायों की मौत हो गई है।

इनमें से एक गोपालक ने बताया कि उनकी गाय गर्भवती थी और उन्होंने उसे छोड़ देने का निवेदन किया था, लेकिन ये कहकर टरका दिया गया था कि गोशाला में उसे गुड़, गरम समोसे, जलेबी आदि खिलाई जा रही है।

आप चिंता न करें। उनका आरोप है कि गायों की मौत भूख-प्यास से हुई है। गोशाला में उनका कोई ध्यान नहीं रखा गया। मामले में गोशाला संचालक स्वामी अच्युतानंद से बात नहीं हो सकी।

सरकार की संवेदनहीनता: यादव

कांग्रेस नेता राकेशसिंह यादव ने कहा है कि गायों की मौत ठंड, भूख और इलाज के अभाव में हुई, जो सरकार और निगम की घोर लापरवाही का प्रमाण है। भाजपा गाय के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन सत्ता में आते ही गोशालाओं में गायों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

गोशाला में गायों की मौत सामान्य घटना नहीं है। नगर निगम, पशुपालन विभाग और गोशाला प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच कराने, गायों की पीएम रिपोर्ट सार्वजनिक करने और प्रदेशभर की गोशालाओं का आपात निरीक्षण कराने की मांग की है।

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