शराब ठेकेदार के परिजन पर 2 करोड़ रुपए के लिए ब्लैकमेल का आरोप
Khulasa First
संवाददाता

सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित ने भी खोला मोर्चा
देवास एसपी को लिखित शिकायत में की कार्रवाई की मांगखुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना की मौत से पहले बनाए कथित वीडियो में देवास की सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित को खुदकुशी के लिए जिम्मेदार ठहराने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मंदाकिनी ने मकवाना के परिजन पर 2 करोड़ रुपए के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए इसकी लिखित शिकायत देवास एसपी को की है।
उल्लेखनीय है 8 नवंबर को देवास के शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना निवासी कनाड़िया (इंदौर) ने आत्महत्या कर ली थी। हाल ही एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने देवास की सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी पर रिश्वत के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए उन्हें अपनी आत्महत्या का जिम्मेदार ठहराया है।
दिनेश की मां संतोष और पत्नी कविता ने कनाड़िया पुलिस को दर्ज कराए अपने बयानों में भी दिनेश की खुदकुशी के लिए मंदाकिनी को जिम्मेदार ठहराया था। मामला फिलहाल जांच में है, लेकिन इस बीच 29 नवंबर को उन्होंने कनाड़िया पुलिस, पुलिस कमिश्नर और आबकारी कमिश्नर (ग्वालियर) को भी शिकायत करते हुए मामले में जांच की मांग की।
वहीं जानकारी लगी है कि जिस आबकारी अधिकारी मंदाकिनी को शराब ठेकेदार मकवाना ने अपनी खुदकुशी के लिए जिम्मेदार ठहराया, उन्होंने भी 24 नवंबर को देवास एसपी को लिखित शिकायत की है। अंग्रेजी में की गई इस शिकायत में उन्होंने मकवाना की मां संतोष, उनके परिवार के सदस्य ब्रजेश मकवाना और लेखराज पटेल के साथ मिलकर उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया।
बताया कि ये लोग मेरे सबइंस्पेक्टर के पास पहुंचे थे। उन्हें धमकाया कि उनके पास दिनेश द्वारा मेरे खिलाफ कथित तौर पर बनाया एक वीडियो है, जिसे वे मीडिया पर प्रसारित कर देंगे। ऐसा नहीं करने के एवज में उन्होंने मुझे ब्लैकमेल करते हुए 2 करोड़ रुपए मांगे। उन्होंने ये भी कहा कि वह जानबूझकर बेटे की आत्महत्या के संबंध में पुलिस को बयान नहीं दे रही हैं। यदि उन्हें 2 करोड़ रुपए मिल जाते हैं तो वह अपने बयान में मेरा नाम नहीं लेंगी, लेकिन पैसे नहीं मिले तो मुझे उक्त मामले में फंसा देंगी। इसके बाद 17 नवंबर को भी दिनेश के परिजन ने मुझसे संपर्क कर अपनी अवैध मांग दोहराई थी।
मांग पूरी नहीं होने पर वीडियो वायरल कर मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने की धमकी दी। मैंने अपने अधीनस्त कर्मचारियों के जरिये दिनेश के परिजन को मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलने को कहा। इसके बाद मैं अपने पति शशांक शेखर राय (सुप्रीम कोर्ट और एमपी हाई कोर्ट में अधिवक्ता) के साथ फीनिक्स सिटाडेल मॉल में दिनेश के परिजन से मिली।
उन्हें कहा कि मेरा दिनेश की खुदकुशी से कोई लेना-देना नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने मुझसे ब्लैकमेल करने और जबरन वसूली जैसा आचरण किया। मेरे पास उक्त बातचीत की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग है। ये रिकॉर्डिंग भी उन्होंने अपनी शिकायत के साथ एसपी देवास को दी है। साथ ही दिनेश के परिजन पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।
ये रिकॉर्डिंग भी सौंपी एसपी को
संतोष : मेरा तो इंसान गया।
मंदाकिनी : माताजी, मैं ये कह रही हूं केवल, मैं किसी को भेजती हूं। ये आप मेरी एक रिक्वेस्ट समझो, बेटी समझो मुझे, जैसी भी रिक्वेस्ट आपको समझ में आए। ये आप जो 2 करोड़ रुपए बोल रहे हैं, इतनी बड़ी रकम मेरे पास नहीं है। मैं कैसे दे दूं। आप चाहते हैं आधे घंटे में दे दूं। ये तो मेरे लिए संभव ही नहीं है। आप खुद भी समझ रहे हो। मैं बात करने किसी को भेजती हूं। तब तक आप रुककर के थोड़ा-सा रास्ता तो निकालने दो। मुझे भी तो कुछ समझना है।
मंदाकिनी : चार दिन हो गए, लेकिन मैं बता रही हूं कि आप यादवजी से पूछो। एक दिन पूरा उज्जैन में मीटिंग में थी मैं। सीएम का आने का था, तो पूरे टाइम हमारी ड्यूटी उसी में थी। आप तो पॉलीटिकली भी जुड़ी हैं। आपको खुद ही पता है कि देवास में सीएम आए थे और जो चीज आप बोल रही हैं 2 करोड़, वह इतनी छोटी रकम भी नहीं है कि मेरे पास में रखा हो और मैं तुरंत आपको दे दूं कि ये चीज हो गई है। अब मुझे भी तो चीजें समझनी पड़ेंगी न। आप मुझे थोड़ा समय तो दो और फिर मैं भेजती हूं अभी।
संतोष : कब तक आएंगे?
मंदाकिनी : आज ही शाम को भेजती हूं।
संतोष : आपने इतनी बात बोली है मैडम, वीडियो चल रहा है। आपका कहीं से कहीं तक नाम नहीं आएगा। ऐसा भी मत समझना कि बाद में कुछ होगा। मेरी बहुत जिबान है।
मंदाकिनी : आप, देखो आप भी।
संतोष : सुनो, मेरी बात तो सुनो। मेरी बात सुन लो। मैंने आज तक जिंदगी में जिबान की कीमत कमाई है। ठीक है। आज मैं मजबूरी में फंसी हूं। आज सिंधियाजी का, इनका, सबका फोन आया है। आप उज्जैन गए, उसका भी मेरे पास फोन आ गया है। पर जब मैंने कहा कि मेरे बच्चे की मौत के तनाव से मैं नहीं निकली हूं। मैको ये नहीं मालूम है। किसी ने ये भी बोला कि उनके परिवार में मजिस्ट्रेट है। मैंने कहा, ठीक है मजिस्ट्रेट है। मैको उनसे भी कोई दिक्कत नहीं। सभी के लिए नियम तो एक जैसे रहेंगे।
मंदाकिनी : देखो, देखो मैं इन सबकी बात ही नहीं कर रही हूं।
संतोष : मेरी किसी से बात भी हुई है। यादवजी आए थे, पूछना। उसी दिन जीतू पटवारी ने भी भेजा था सबको और अभी वापस अनिल खंडेलवाल, आशीष गुप्ता ये सब आए थे कि क्या हुआ। चैनल वाले से, मैं किसी से कुछ बात नहीं करूंगी। जब तक कि मैं मेरे यहां बारहवां-तेरहवां नहीं होगा, तब तक नहीं करूंगी। जब होगा, तब करेंगे। बोले वीडियो कॉन्फ्रेंस करो। मैंने कहा, कर लूंगी। मैंने कहा, मेरा तो एक ही बेटा था, जो खो दिया है। कोई बेटा वापस लाकर तो देगा नहीं।
मंदाकिनी : सही बात है।
संतोष : टीआई का अभी मेरा बयान नहीं हुआ है। भैया ने मना कर दिया था, तुलसी भैया ने कि अभी बयान देने मत जाना। उसके बाद भी अभी दुकान पर जो माल है, बेच रहे थे तो अभी पटेल साहब ने ओपनिंग ले ली। वो निकलने नहीं दे रहे। यानी वो माल काउंटर से नहीं बेचने दे रहे हैं।
मंदाकिनी : नहीं, पटेल वाला मुझे पता चला है। मैंने पटेल से साफ बोला कि आपको किसने ऐसा करने को बोला। मैंने उनको डांटा भी है। मैंने अभी बोला भी है पटेल को। उनकी दुकानों पर आप जाकर देखो। उनको जो भी स्टॉक की जरूरत है, अगर वो अभी डिमांड कर रहे हैं, तो उनको स्टॉक भी दिलवाओ। मैंने ये बोला है पटेल को। आप चाहो तो यादवजी से पूछ भी लेना। और जिससे भी आपकी बात हो, आप उससे भी पूछ लेना। मैंने किसी तरीके से किसी को भी ये नहीं बोला कि उनकी दुकान पर...।
संतोष : मेरी जिंदगी का है ये भी, बेटा चला गया तो मैं इतना बोल रही हूं। नहीं तो मैंने पैसों में तो पानी फेर दिया। जीरो से खड़ी हुई थी। मेरे ससुराल में बहुत सारी जमीन थी, पर मेरे पति सक्षम थे। उन्होंने नहीं ली, तो मैंने कभी आशा नहीं करी तो आपसे क्या आशा करूं। मैं तो इन बच्चों का भविष्य देख रही हूं। आपकी जिंदगी हो, आपकी रेपुटेशन खराब नहीं हो। इस चीज को मैं पढ़ी-लिखी हूं और समझती हूं।
मंदाकिनी : एक महिला के नाते आप ये सब जानते हैं। ठीक है कि कितनी मेहनत करके इधर आई हूं। आप, वही चीज है कि अब मेरे पास अचानक से ऐसा विषय आया है। नहीं करूंगी तो वो वायरल कर देंगे। मेरे मन में भी 50 सवाल आ रहे हैं, कर दिया तो क्या होगा? नहीं किया तो क्या होगा?
संतोष : नहीं होगा। सुनो, आप चाहे भले से मेरे से लिखित ले लो या मेरा कुछ भी कर लो कि भई, मेरा इनसे कोई लेना-देना नहीं है। बिलकुल मैंने यादवजी को कहा कि भाई साहब, आप मेरे से लिखित में ले लो। मैं भाई साहब बोल रही हूं। छोटी बहन मानो, बड़ी बहन मानो। मेरी जिबान की कीमत है, मेरी कीमत नहीं है। दुनिया बोलेगी वीडियो, अगर आपका कोई नाम आ जाए तो मेरे को बता देना कि मेरे नाम से कोई देख रहा है। मैं वहीं गोली मार दूंगा, मेरे पास रिवॉल्वर है। मैं आज आपको वादा करती हूं।
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