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184 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी घोटाला: कंपनी पर मनी लॉड्रिंग का केस दर्ज

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 जनवरी 2026, 10:58 पूर्वाह्न
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184 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी घोटाला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
फर्जी बैंक गारंटी घोटाले मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज करने के बाद ईडी ने तीर्थ गोपीकॉन ग्रुप की संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है, ताकि धोखाधड़ी से अर्जित संपत्तियों को अटैच किया जा सके।

ईडी ने केस अपने हाथ में लिया
इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। उसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने केस अपने हाथ में लिया है।

950 करोड़ के ठेके में फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया है कि जल निगम से 950 करोड़ रुपये के ठेके हासिल करने के लिए तीर्थ गोपीकॉन कंपनी ने कई बैंक गारंटियां जमा की थीं, जो बाद में पूरी तरह फर्जी पाई गईं।

शुरुआती दौर में कंपनी ने दावा किया था कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है और ये गारंटियां किसी तीसरे पक्ष के जरिए बनवाई गई थीं। इसी आधार पर इंदौर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।

फर्जी बैंक गारंटी तैयार कराई
मामला जब हाईकोर्ट जबलपुर पहुंचा, तो वहां से सीबीआई जांच के आदेश दिए गए। सीबीआई ने जब गहराई से जांच की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ- इस पूरे फर्जीवाड़े में कंपनी खुद दोषी पाई गई और एक संगठित नेटवर्क के जरिए फर्जी बैंक गारंटी तैयार कराई जा रही थी।

गिरफ्तार हुए आरोपी
सीबीआई ने जांच के बाद कंपनी के एमडी महेशभाई कुंभानी सहित अन्य आरोपियों को सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। तभी से सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

454 करोड़ का हाई-प्रोफाइल सौदा भी रद्द
इसी दौरान तीर्थ गोपीकॉन कंपनी ने स्मार्ट सिटी इंदौर से कुक्कुट केंद्र की जमीन खरीदने का 454 करोड़ रुपये का बड़ा रियल एस्टेट सौदा किया था। यह इंदौर के सबसे महंगे सौदों में से एक माना गया, लेकिन कंपनी ने इसकी किश्तें जमा नहीं कीं।

सीबीआई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि स्मार्ट सिटी के ये प्रोजेक्ट भी फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर लिए गए थे। इंदौर में इस सौदे के लिए दी गई करीब 9 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी संदेह के घेरे में आ गई। इसके बाद स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में यह सौदा रद्द कर दिया गया।

ईडी और जल निगम, दोनों कर रहे संपत्तियों की तलाश
ईडी जहां मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ग्रुप की संपत्तियों का पता लगा रही है, वहीं जल निगम भी अपनी 184 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी राशि वसूलने के लिए सक्रिय हो गया है।

इसके लिए इंदौर जिला प्रशासन, पंजीयन विभाग और अन्य संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए हैं। हालांकि कंपनी मूल रूप से अहमदाबाद (गुजरात) की है और फिलहाल इंदौर में इसके नाम पर बड़ी अचल संपत्ति सामने नहीं आई है।

184 करोड़ की आठ फर्जी बैंक गारंटी जांच में
ईडी इस मामले में कुल आठ बैंक गारंटियों की जांच कर रही है।
छतरपुर (गारोली डैम): 39.20 करोड़
9.80 करोड़ (दो गारंटी)
19.60 करोड़ (एक गारंटी)
सागर (मडिया डैम): 32.40 करोड़
16.20 करोड़ (एक)
8.10 करोड़ (दो)

डिंडोरी प्रोजेक्ट: 111.61 करोड़
50 करोड़
61.61 करोड़, इन सभी गारंटियों को जांच में फर्जी पाया गया है।

इन पर दर्ज हैं गंभीर धाराएं
सीबीआई ने इस मामले में महेश कुंभानी, राहुल गुप्ता, फिरोज खान, गोविंद चंद्र हंसदा, गौरव धाकड़ और तीर्थ गोपीकॉन कंपनी को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज है। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।

बैंक मैनेजरों से मिलीभगत का खुलासा
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने कुछ बैंक मैनेजरों से सांठगांठ कर फर्जी बैंक गारंटी तैयार करवाई। इन्हीं गारंटियों के दम पर कंपनी सरकारी टेंडर हासिल करती रही और काम शुरू कर सरकार से भुगतान भी लेती रही।

भुगतान लेकर चलता रहा दोतरफा खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि जल निगम के 950 करोड़ के ठेके में कंपनी लगभग 84 करोड़ रुपये का भुगतान भी पहले ही ले चुकी थी। यही नहीं, इंदौर, उज्जैन और छतरपुर में कई सरकारी प्रोजेक्ट इसी तरीके से लिए गए।

नगर निगम, स्मार्ट सिटी, अमृत 2.0 जैसे बड़े प्रोजेक्टों में फर्जी बैंक गारंटी के सहारे काम और भुगतान-यही इस पूरे घोटाले का मूल मॉडल बताया जा रहा है।


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