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184 करोड़ का बैंक गारंटी फर्जीवाड़ा: तीर्थ गोपीकॉन के एमडी व अन्य को नहीं मिली जमानत; जेल में ही रहेंगे

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। जल निगम घोटाले को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। 184 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में फंसे तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड के एमडी महेश कुंभानी और फाउंडर राहुल गुप्ता की मुश्किलें

Khulasa First

संवाददाता

21 दिसंबर 2025, 8:14 पूर्वाह्न
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184 करोड़ का बैंक गारंटी फर्जीवाड़ा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जल निगम घोटाले को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। 184 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में फंसे तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड के एमडी महेश कुंभानी और फाउंडर राहुल गुप्ता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

जमानत याचिका को किया खारिज
सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मध्य प्रदेश जल निगम में लगभग 950 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए तीर्थ गोपीकॉन कंपनी ने टेंडर डाला था। 

जांच में पाया गया कि कंपनी ने बैंक अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर 184 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी पेश की थी। इस फर्जीवाड़े के जरिए कंपनी न केवल ठेका हासिल करने में सफल रही, बल्कि सरकार से 84 करोड़ रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया।

फेल हुई दलील
आरोपी महेश कुंभानी और राहुल गुप्ता ने कोर्ट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी को 90 दिन बीत चुके हैं और सीबीआई ने पूर्ण चालान पेश नहीं किया है।

हालांकि, सीबीआई के अधिवक्ता गुफरान अहमद ने ठोस सबूत पेश करते हुए बताया कि चालान 2 दिसंबर को ही (90 दिनों के भीतर) पेश किया जा चुका है। दस्तावेजों में गवाहों की सूची और पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं।

प्रकरण में अभी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी शेष है, ऐसे में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इन तर्कों के आधार पर जिला अदालत ने आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

सबसे महंगी डील
अहमदाबाद आधारित यह कंपनी केवल जल निगम तक सीमित नहीं थी। तीर्थ गोपीकॉन ने मार्च-अप्रैल 2024 में इंदौर स्मार्ट सिटी के साथ मध्य प्रदेश की सबसे महंगी रियल एस्टेट डील की थी।

जमीन का सौदा भी किया था
453 करोड़ रुपये में कुक्कुट केंद्र की जमीन खरीदने का सौदा हुआ था। शर्त के मुताबिक किश्तें जमा न करने के कारण स्मार्ट सिटी बोर्ड ने इस सौदे को रद्द कर दिया।

कंपनी का खेल बेहद शातिर था
सीबीआई जांच के अनुसार, कंपनी का खेल बेहद शातिर था। यह बैंक मैनेजरों से मिलीभगत कर फर्जी बैंक गारंटी तैयार करती थी। इसके बाद सरकारी टेंडर लेकर काम शुरू करने के नाम पर करोड़ों का एडवांस पेमेंट उठा लेती थी। 

कंपनी ने इंदौर, उज्जैन और छतरपुर जैसे शहरों में नाला टैपिंग, एसटीपी प्रोजेक्ट और अमृत 2.0 जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में काम किया है।

सीबीआई की रडार पर अन्य आरोपी
इस मामले में केवल कुंभानी और गुप्ता ही नहीं, बल्कि कई अन्य नाम भी शामिल हैं। जिसमे फिरोज खान, गोविंद चंद्र हंसदा, गौरव धाकड़ और तीर्थ गोपीकॉन कंपनी का नाम शामिल हैं। सीबीआई ने धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया है। 

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