सरकार को लगा रहा 1.32 करोड़ की चपत
बेटे के साथ मिल अवैध शराब माफिया अरोरा हर साल खुलासा फर्स्ट, नीमच । जिले में अवैध शराब का काला कारोबार जोरों से फल-फूल रहा है। जिला आबकारी अधिकारी बसंत भीते जैसे जिम्मेदार अफसर तनख्वाह के साथ दोहरी कम
Khulasa First
संवाददाता

बेटे के साथ मिल अवैध शराब माफिया अरोरा हर साल
खुलासा फर्स्ट, नीमच।
जिले में अवैध शराब का काला कारोबार जोरों से फल-फूल रहा है। जिला आबकारी अधिकारी बसंत भीते जैसे जिम्मेदार अफसर तनख्वाह के साथ दोहरी कमाई के चक्कर में ठेकेदार अशोक अरोरा उर्फ गंगा नगर वाले और उसके बेटे अरूल अरोरा के जी हुजूरिए बनकर कुर्सी पर जमे हैं।
जागरूक नागरिक धनराज चौधरी ने 2 जुलाई 2025 को पुलिस महानिरीक्षक उज्जैन रेंज को शिकायत की थी, जिसमें 58 अवैध शराब दुकानों का पूरा खुलासा किया, लेकिन चार महीने बाद भी कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हुई। इसे लेकर कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की टीम पर शराब माफिया से साठगांठ के आरोप लग रहे हैं। वहीं राज्य सरकार को सालाना 1.32 करोड़ के राजस्व की चपत लगाई जा रही है।
चौधरी ने आरोप लगाए कि ठेकेदार अशोक अरोरा और बेटे अरूल अरोरा जैसे माफिया खुलेआम अवैध धंधा चला रहे हैं, जबकि वैध दुकानें तो सिर्फ 53 ही हैं। अधिकारियों की निष्क्रियता इसकी मजबूत ढाल बनी हुई है। शिकायत के साथ चौधरी ने यूएसबी में 24 अवैध दुकानों की गूगल मैप लोकेशन दी, बाकी 34 के नाम-पते पत्र में विस्तार से लिखे हैं। हैरत की बात यह कि प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भादवामाता मंदिर के पास भी अवैध शराब दुकान फल-फूल रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बावजूद कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और उनकी पूरी टीम ने अवैध शराब माफिया अरोरा पर आंखें मूंद ली हैं। धनराज चौधरी ने अरोरा के अवैध शराब करोबार के विरुद्ध आवाज उठाई और खुलासा फर्स्ट को बताया कि यह प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि खुलेआम हो रहा भ्रष्टाचार है।
अब 20 नवंबर को कलेक्टर कार्यालय से सूचना-पत्र आया है, जिसमें चौधरी को 24 नवंबर को अपराह्न 3.30 बजे हाजिर होने का समन दिया गया। चार महीने बाद प्रशासन की ओर से सूचना-पत्र... साफ दिख रहा है कि यह महज खानापूर्ति है। पुलिस महानिरीक्षक उज्जैन रेंज ने शिकायत कलेक्टर को भेज दी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई के नाम पर शून्य।
चौधरी ने कहा मैं सबूतों के साथ जांच टीम का सामना करूंगा, लेकिन इतनी देरी क्यों? क्या अधिकारी माफिया अशोक अरोरा से मिले हुए हैं? नीमच सहित पूरे जिले में अवैध शराब माफिया अशोक अरोरा का जाल इतना जकड़ चुका है कि प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे धृतराष्ट्र की भूमिका निभा रहा है।
जिला आबकारी अधिकारी बसंत भीते पर सीधे-सीधे आरोप हैं कि उनकी निष्क्रियता या संभावित संलिप्तता इस लूट को हवा दे रही है। विभाग के आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं 53 वैध दुकानों से 1.32 करोड़ का राजस्व। लेकिन 58 अवैध दुकानें? सरल हिसाब से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। ये अधिकारी सिर्फ सैलरी के लिए हैं क्या? शिकायत पर छापे क्यों नहीं मारते?
अनियमितता पाई गई तो सख्त कार्रवाई करेंगे
नीमच जिले के अपर कलेक्टर बीएस कलेश ने धनराज चौधरी द्वारा दर्ज शिकायत के संबंध में कहा कि कलेक्टर के आदेशानुसार इस मामले की जांच चल रही है। हम आबकारी विभाग और पुलिस से विस्तृत प्रतिवेदन मांगे हैं। शिकायतकर्ता धनराज चौधरी को सूचना पत्र जारी कर उपस्थिति के लिए आमंत्रित किया गया है।
उनके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। जांच पूरी पारदर्शिता से हो रही है और किसी भी प्रकार का दिखावा या देरी नहीं बरती जा रही। यदि कोई अनियमितता पाई गई तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। जनता का विश्वास बनाए रखना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है।
मामला प्रशासन की पूरी कार्यशैली पर कीचड़ उछाल रहा है
चौधरी ने मांग की है कि गूगल मैप वाली लोकेशन पर तत्काल टीम भेजी जाए, जिला आबकारी अधिकारी बसंत भीते समेत सभी अधिकारियों की निष्पक्ष जांच हो। दोषी पाए जाने पर नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। कलेक्टर चंद्रा, आबकारी अधिकारी भीते, पुलिस महानिरीक्षक उज्जैन रेंज सभी के खिलाफ यह मामला प्रशासन की पूरी कार्यशैली पर कीचड़ उछाल रहा है।
माफिया न सिर्फ अर्थव्यवस्था को चूस रहा है, बल्कि समाज में भी जहर घोल रहा है। चौधरी ने चेतावनी दी कि प्रशासन की सुस्ती जारी रही, तो यह राज्य सरकार की साख पर काला धब्बा बनेगा। प्रशासन जागे, वरना जागरूक नागरिकों द्वारा माफिया खुलासा करने का सफर अनहोनी की ओर ले जा सकता है।
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