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टोकन मनी देकर उलझाई 27 करोड़ रु. की 11 बीघा जमीन: कृषि भूमि की डील में करोड़ों का फर्जीवाड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 जनवरी 2026, 10:23 पूर्वाह्न
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टोकन मनी देकर उलझाई 27 करोड़ रु. की 11 बीघा जमीन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवास जिले में कॉलोनी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। तीन किसानों की लगभग 11 बीघा जमीन 2 करोड़ 45 लाख रुपए प्रति बीघा खरीदने का सौदा किया गया, जिसकी कुल कीमत 27 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है, लेकिन किसानों को अब तक पूरा भुगतान नहीं किया गया।

आरोप है टोकन मनी देकर जमीन को जानबूझकर उलझा दिया गया। किसान सौदागरों से संपर्क तक नहीं कर पा रहे। पीड़ित किसानों के अनुसार पटेल, रामसिंह सोनगिरा (चाचा) और महेंद्रसिंह सोनगिरा (भतीजा) की कुल 11 बीघा जमीन का सौदा 2 करोड़ 45 लाख रुपए प्रति बीघा तय किया गया था।

इस हिसाब से जमीन की कुल कीमत 27 करोड़ रुपए से अधिक बैठती है।लेकिन वास्तविकता यह है किसान पटेल को केवल 21 लाख तथा रामसिंह सोनगिरा और महेंद्र सिंह सोनगिरा को 10-10 लाख रुपए का ही भुगतान किया गया।

2.45 करोड़ रु. प्रति बीघा का था सौदा, किसानों को मिले केवल 41 लाख
ओसवाल इंटरप्राइजेज और कॉलोनी विकास पर सवाल: किसानों का आरोप है पूरी धोखाधड़ी ओसवाल इंटरप्राइजेज के नाम से की गई है। ओसवाल द्वारा सुपर कॉरिडोर पर ‘जिलियन’नामक कॉलोनी काटी गई है, जिसमें कई अनियमितताओं की बात सामने आ रही है। जिले के बाकरगढ़ और शकरगढ़ क्षेत्रों में निजी भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकास को लेकर दो अलग-अलग भूमि विकास अनुबंध किए गए हैं।

दोनों में इंदौर निवासी डेवलपर सार्थक को कॉलोनी विकास का दायित्व सौंपा गया है। अनुबंधों के अनुसार भूस्वामियों और डेवलपर के बीच विकसित भूखण्डों का बंटवारा तय अनुपात में किया जाएगा, जबकि समस्त विकास की जिम्मेदारी डेवलपर की रहेगी।

बाकरगढ़ में 1.265 हेक्टेयर भूमि पर होगी कॉलोनी: ग्राम बाकरगढ़ तहसील एवं जिला देवास स्थित संयुक्त स्वामित्व की भूमि को लेकर कलाबाई, सुनील एवं महेंद्र (प्रथम पक्ष) तथा इंदौर निवासी सार्थक (द्वितीय पक्ष) के मध्य भूमि विकास अनुबंध हुआ है। इसके अंतर्गत कुल 1.720 हेक्टेयर में से 1.265 हेक्टेयर (लगभग पांच बीघा) भूमि कॉलोनी के लिए है।

डेवलपर द्वारा बिजली, पानी, ड्रेनेज, सीवरेज, सड़क, गार्डन, बाउंड्रीवॉल सहित समस्त आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। अनुबंध के अनुसार 37.5 प्रतिशत भूखंड डेवलपर तथा 62.5 प्रतिशत भूस्वामियों को प्राप्त होंगे।

₹2.50 करोड़ मूल्य आधार पर भुगतान एवं गारंटी की शर्त: बाकरगढ़ अनुबंध में भूमि का कुल मूल्य ₹2.50 करोड़ मानते हुए प्रथम पक्ष को उनके हिस्से की 62.5 प्रतिशत राशि दिए जाने का प्रावधान है। ₹11 लाख अग्रिम राशि आरटीजीएस से दी जा चुकी है।

सर्च व सार्वजनिक सूचना के बाद ₹40 लाख, विकास अनुमति प्राप्त होने पर ₹1.05 करोड़ का भुगतान 20 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। 24 माह में प्लॉट विक्रय नहीं हो पाते हैं, तो शेष भूमि के लिए ₹1 करोड़ की अतिरिक्त प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी रखा गया है।

शकरगढ़ में 0.506 हेक्टेयर का विकास अनुबंध: इसी तरह ग्राम शकरगढ़ में रामसिंह (प्रथम पक्ष) और सार्थक (द्वितीय पक्ष) के मध्य एक अन्य भूमि विकास अनुबंध हुआ है। इसमें कुल 0.947 हेक्टेयर में से 0.506 हेक्टेयर (लगभग दो बीघा) भूमि को विकास हेतु दिया गया है।

यहां भी कॉलोनी विकास का दायित्व डेवलपर को सौंपा गया है और 37.5 प्रतिशत विकसित प्लॉट डेवलपर को तथा 62.5 प्रतिशत प्लॉट भूमि स्वामी को मिलेंगे।

न्यूनतम मूल्य गारंटी और अग्रिम भुगतान का प्रावधान: शकरगढ़ अनुबंध में प्लॉट विक्रय नहीं होने की स्थिति में भूमि का न्यूनतम मूल्य ₹2.50 करोड़ मानते हुए भुगतान की शर्त तय की गई है। साथ ही 24 माह पश्चात शेष भूमि के लिए प्रति बीघा ₹3 करोड़ के मान से भुगतान का उल्लेख है। इस अनुबंध के तहत ₹5 लाख आरटीजीएस द्वारा, ₹15 लाख फील्ड बुक के समय, ₹37 लाख विकास अनुमति प्राप्त होने पर (20 फरवरी 2026 तक) अग्रिम भुगतान किया जाएगा।

विकास कार्य, बीमा और दायित्व पूरी तरह डेवलपर के जिम्मे: दोनों अनुबंधों में स्पष्ट है ठेकेदार, इंजीनियर और श्रमिकों की नियुक्ति, निर्माण सामग्री की खरीदी, श्रमिक बीमा, श्रम कर, किसी भी दुर्घटना या क्षति की जिम्मेदारी पूर्णतः द्वितीय पक्ष (डेवलपर) की होगी। अनुबंध को केवल कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर माना गया है, इसे किसी प्रकार की साझेदारी नहीं माना जाएगा।

विवाद समाधान और दलाली की शर्तें तय: विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों द्वारा नियुक्त मध्यस्थों के माध्यम से समाधान किए जाने का प्रावधान है। दोनों अनुबंधों में दलाली का भुगतान 62.5 प्रतिशत एवं 37.5 प्रतिशत के अनुपात में किए जाने की शर्त भी है।

सुधीर ओसवाल और सार्थक ओसवाल पर आरोप: किसानों का आरोप है सौदा सुधीर ओसवाल द्वारा किया गया, जिसका एग्रीमेंट बेटे सार्थक ओसवाल उर्फ चीनू के नाम से किया गया है। किसानों का कहना है सौदा चिट्ठी आज भी ओसवाल के पास है, जिसका गलत उपयोग कभी भी किया जा सकता है।

रेशो डील और आउटरेट सौदों में भी गड़बड़ी: पीड़ितों के मुताबिक देवास में जमीन का सौदा कराया गया, जो रेशो डील थी। इसमें सोनगिरा चाचा–भतीजे को ढाई करोड़ रुपए डिपॉजिट देने की बात थी, लेकिन दोनों को केवल 11 और 10 लाख रुपए देकर जमीन को विवाद में उलझा दिया गया। एक अन्य किसान पटेल का कहना है 12 करोड़ रुपए की आउटरेट डील में केवल 21 लाख रुपए देकर भुगतान रोक दिया गया।

ब्रोकर संजय परमार के जरिए कराए गए सौदे: सभी सौदे ब्रोकर संजय परमार ने कराए। संजय परमार का कहना है सुधीर ओसवाल चार-पांच महीने पहले एक परिचित के साथ मिले थे। व्यापार की इच्छा जताई थी। इस पर जमीन की डील की।

बाप-बेटे ने कथित रूप से धोखाधड़ी की। इस तरह के सौदों में अक्सर किसान से जमीन का भाव तय कर टोकन मनी दी जाती है फिर किसान तथा ब्रोकर दोनों को लंबे समय तक चक्कर कटवाए जाते हैं। फोन करने पर कॉल रिसीव नहीं की जाती।

एग्रीमेंट, फील्ड बुक, रास्ते और भुगतान को लेकर किसान-निवेशक आमने-सामने
सौदे को लेकर निवेशक सुधीर ओसवाल और किसानों के बीच विवाद गहरा रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर एग्रीमेंट की शर्तें पूरी नहीं करने और भुगतान में लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। निवेशक सुधीर ओसवाल ने बताया एग्रीमेंट में तय शर्तों के अनुसार ही काम कर रहे हैं।

01 नंबर में भुगतान किया है और उनकी सभी नियम व शर्तें लिखित रूप में मौजूद हैं। कुछ आवश्यक प्रक्रियाएं, जैसे फील्ड बुक बनवाना और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट लंबित हैं, जिन्हें पूरा होने के बाद आगे का भुगतान किया जाना था। सौदा तीन किसानों से हुआ, जिनमें दो किसानों की शर्तें पूरी नहीं हुई हैं।

उन्हीं किसानों ने सौदा कराया था। जब तक शर्तें पूरी नहीं होंगी, तब तक सौदा आगे नहीं बढ़ेगा। पीछे वाले किसान द्वारा 30 फीट का रास्ता देना भी शर्तों में शामिल है और फील्ड बुक भी अब तक नहीं बनी है। भुगतान में 10 से 15 लाख रुपए का अंतर धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं आता।

पूरा व्यापार ब्रोकर के माध्यम से हुआ है और शर्तों के अनुसार ही कार्य किया जा रहा है। वहीं किसान रामसिंह सोनगिरा ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा सुधीर ओसवाल काफी समय से फोन नहीं उठा रहे हैं। बीते महीने 10 तारीख को आखिरी बार बात हुई थी और दोबारा 10 तारीख आने वाली है, इस बीच कोई संपर्क नहीं हुआ।

ओसवाल ने कहा था हर खर्च वे उठाएंगे और 20 तारीख को पूरे भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन वह तारीख निकल चुकी है। एक अन्य किसान, जिनका आउटरेट सौदा हुआ था, भी भुगतान नहीं किया गया। कुल 12 करोड़ रुपए में सौदा तय हुआ था, जिसमें पहले 21 लाख रुपए दिए गए, इसके बाद 11 लाख रुपए रामसिंह और उनके भतीजे महेंद्र को तथा 10 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

इसके बाद ओसवाल ने फोन उठाना बंद कर दिया। दलालों से सौदा हुआ था, लेकिन दलाल भी फोन नहीं उठा रहे हैं। सुधीर ओसवाल ने तीन किसानों से जमीन का सौदा किया था, जिसमें इंदौर की छावनी में रहने वाले पटेल की 7 बीघा, उनके भतीजे महेंद्र की 5 बीघा और स्वयं उनकी 2 बीघा जमीन शामिल है।

इस प्रकार कुल 11 बीघा जमीन का एग्रीमेंट 2 करोड़ 45 लाख रुपए प्रति बीघा के आउटरेट (नकद भुगतान) पर हुआ था, लेकिन न पूरा भुगतान हुआ न बकाया दिया गया है। महेंद्रसिंह सोनगिरा ने बताया उनके अनुबंध के अनुसार जाहिर सूचना के बाद भुगतान होना था, लेकिन न जाहिर सूचना दी गई न भुगतान हुआ।

20 फरवरी को 12.30 प्रतिशत डिपॉजिट मनी देने की बात कही थी, लेकिन अब तक पुराना भुगतान भी नहीं मिल सका है। वर्तमान में न फोन उठाया जा रहा है और न ही कार्यालय में कोई मुलाकात हो पा रही है। प्रकरण में तीन किसानों की जमीन शामिल है, जिसमें रेशो डील और आउटरेट दोनों प्रकार के सौदे हैं।

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