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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चल रहा 10% कमीशन का खेल: मरीज को इंडेक्स अस्पताल भेजने वाले डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में आने वाले मरीजों को कमीशन के लालच में डॉक्टर व अन्य कर्मचारी निजी अस्पताल में भेज रहे हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर द्वारा एक

Khulasa First

संवाददाता

05 दिसंबर 2025, 9:03 पूर्वाह्न
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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चल रहा 10% कमीशन का खेल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में आने वाले मरीजों को कमीशन के लालच में डॉक्टर व अन्य कर्मचारी निजी अस्पताल में भेज रहे हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर द्वारा एक मरीज को इंडेक्स अस्पताल भेजने का मामला सामने आया, जिस पर उसकी 15 दिन की सैलरी काटने के निर्देश दिए गए। यह भी खुलासा हुआ कि निजी अस्पतालों में भेजने पर संबंधित डॉक्टर-कर्मचारी को 10 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है।

बताते हैं मरीज ने शिकायत की थी कि रातभर जमीन पर बिना इलाज के रखा और सुबह डॉक्टर ने इंडेक्स अस्पताल जाने के लिए कहा। मामले में डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटने की कार्रवाई की है। सूत्रों का कहना है एक मरीज को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजने पर डॉक्टर को 10 प्रतिशत कमीशन मिलता है।

यानी तीन लाख का इलाज यदि मरीज का निजी अस्पताल में हो रहा है तो डॉक्टर को 30 हजार रुपए मिलते हैं। यह खेल आयुष्मान योजना के नाम पर तेजी से चल रहा है। एमवाय अस्पताल में आने वाले मरीजों को कहा जाता है कि निजी अस्पताल में बेहतर सुविधा के साथ नि:शुल्क उपचार मिल जाएगा। सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन 10 से अधिक मरीज अधूरा इलाज करवाकर निजी अस्पताल में चले जाते हैं। इनमें से कुछ अपनी मर्जी से जाते हैं, जबकि बाकी को डॉक्टर कमीशन के चक्कर में भेज देते हैं।

मरीजों को ले जाने में एंबुलेंस गैंग भी सक्रिय
एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों के अलावा मरीजों को ले जाने में एंबुलेंस गैंग भी सक्रिय है। करीब एक वर्ष पहले मरीजों को एमवाय अस्पताल से निजी अस्पताल लेकर जाने पर एंबुलेंस गैंग का मुखिया दीपक वर्मा पकड़ाया था। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने उसकी पिटाई कर दी थी। इसके बाद दीपक और असलम आदि के परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था।

इसमें वार्डबॉय और अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। अभी एमवाय अस्पताल परिसर में राहुल, दीपक और रामगोपाल सक्रिय हैं, जो एम्बुलेंस के जरिये मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाते हैं, लेकिन इन पर प्रशासन की सख्ती नजर नहीं आ रही, जबकि पूर्व संभागायुक्त ने अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस वाहन पार्क करने पर प्रतिबंध लगाया था।

कई एजेंट घूमते हैं परिसर में
सूत्रों का कहना है आयुष्मान कार्डधारक मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाने वाले कई एजेंट एमवाय अस्पताल परिसर में घूमते रहते हैं। पूर्व में भी इस तरह के लोगों को पकड़ा गया था। इन्हें मरीजों के हिसाब से निजी अस्पताल में कमीशन मिलता है। इसके लिए यह मरीजों को एमएलटी, एक्स-रे सहित अन्य जांच होने के बाद निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए लेकर चले जाते हैं। सबसे अधिक मरीज हड्डी रोग विभाग, न्यूरोसर्जरी, कैंसर, मेडिसिन विभाग आदि के होते हैं।

लामा कराने वाले मरीजों को रिव्यू किया जाएगा...
अस्पतालों में लामा रोकने के प्रयास कर रहे हैं। एक डॉक्टर पर कार्रवाई भी की है। लामा रोकने के लिए एक कमेटी भी बनाई जा रही है, जो लामा कर जाने वाले सभी मरीजों का रिव्यू करेगी। डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

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