ये कौन लोग हैं? इन्हें रोकते क्यों नहीं? ‘हिंदुत्व' के नाम पर दुनिया में ये कैसी छवि पेश कर रहे हैं ‘हिंदू वीर'?
Khulasa First
संवाददाता

ईसाई समुदाय के एकमात्र पर्व पर सड़कों पर हुई अराजकता से शर्मसार हुआ भारत
चर्च के बाहर प्रदर्शन, मॉल में तोड़फोड़, साज-सज्जा को धूल-धूसरित करने वाले कौन थे? तलाशे न पुलिस?
प्रधानमंत्री चर्च, संघ प्रमुख मस्जिद जा रहे… फिर क्या दिक्कत?
क्रिसमस सेलिब्रेशन पर इंदौर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदुत्व के नाम पर हुई हरकत ने दुनिया में भारत की छवि को किया कलंकित
धर्मांतरण का विरोध करते-करते धर्म का ही विरोध क्यों और किसकी शह पर हुआ? कोई तो मांगे जवाब
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ये कौन लोग हैं? कहां से आए? किसके कहने से सड़क पर उतरे? इन्हें किसने इस तरह की हरकत करने की मंजूरी दी? क्या इन लोगों ने पूर्व की कोई इस तरह के विरोध की बात कही थी? कोई धमकी दी थी? कोई जाहिर विज्ञप्ति जारी की थी? ये किसी संगठन के बैनर तले जमा हुए थे? कौन थे ये लोग? आखिर कहां से आए थे? इन्हें रोका क्यों नहीं गया? ये फिर आएंगे क्या? अगले बरस, आगामी किसी सेलिब्रेशन पर, ऐसे ही, जैसे 24 दिसंबर को आए, 25 को आए? ऐसे ही अराजकता करेंगे? आखिर इन्हें रोकते क्यों नहीं?
इन्हें किसने कहा था कि उत्सव न मनाने दिया जाए? क्या ये कोई सहज प्रतिक्रिया थी या सुनियोजित कर्मकांड था? आखिर किसकी शह मिली थी कि साज-सज्जा न करने दी जाए और जहां हो गई है, उसे धूल-धूसरित कर दिया जाए? इतनी निर्ममता का व्यवहार करने की ट्रेनिंग कहां से ली थी कि मिन्नतों के बाद भी कलाकारों की मेहनत से बनी कलाकृतियों को बेरहमी से तोड़ दिया? ये तो ‘सहिष्णु' कहलाते हैं न? तो फिर ऐसी असहिष्णुता कैसे कर गुजरे? उन कलाकृतियों से तो आपके अपने लोग ही आनंद महसूस कर रहे थे न? सेल्फी ले रहे थे न बच्चे? उन पर भी दया नहीं आई?
क्या भारत में पहली बार क्रिसमस मन रहा था? ईसाई समुदाय का ये एकमेव पर्व क्या पहली बार जोश-खरोश से मनाया जा रहा था? क्या पहली बार चर्च में भीड़ जुटी थी, केंडल जले थे, रोशनी हुई थी? क्या पहली बार कैरोल गाये गए थे? सांता क्लॉज की झांकियां क्या पहली बार बनी थीं? पहली बार मॉल में क्या क्रिसमस-ट्री खड़े व सजे थे? ‘मैरी क्रिसमस' क्या पहली बार देश में बोला-सुना जा रहा था?
ये कोई आज से, बल्कि ये सब तो बरसों नहीं, सदियों से भारत में हो रहा है। सरकारी छुट्टियां तक घोषित हैं। आपके अपने बच्चे ‘विंटर वैकेशन' का लुत्फ आपके साथ दशकों से ले रहे हैं न? तो फिर इस बरस ही ऐसा क्या हुआ कि ये सारा सेलिब्रेशन नागवार लगने लगा?
जब देश का पंतप्रधान चर्च में उत्साह के साथ आता-जाता है। वह तो आपके लिए ‘हिंदुत्व का प्रतीक है न? फिर भी वह क्रिसमस की प्रार्थना में पूरे मनोयोग व दिल से शामिल होता है। वह दुनिया को ये संदेश देता है कि मेरा भारत क्यों महान है। प्रभु यीशु व माता मरियम की प्रतिमा के समक्ष आंखें मींचे, हाथ जोड़े खड़ा हो देश का प्रधानमंत्री दुनिया को बताता है कि भारत में सर्वधर्म समभाव सर्वोपरि है।
फिर आप क्यों सदियों की इस परिपाटी को मिट्टी में मिलाने सड़कों पर आ गए? कम से कम देश के मुखिया की तरफ ही देख लेते? उनकी व उनकी सरकार की ही चिंता कर लेते कि वे दुनिया में क्या जवाब देंगे? कैसे गर्व से कहेंगे कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है?
आप जो भी हो, अव्वल तो आपकी पहचान होना ही चाहिए और पुलिस प्रशासन को ये करना ही चाहिए। आखिर ये तो पता चले कि इस आक्रोश के पीछे कारण क्या था? अगर धर्मांतरण को लेकर कोई गुस्सा ईसाई मिशनरियों व समुदाय के प्रति था, तो उसका भी इकबालिया बयान होना चाहिए।
अगर धर्मांतरण को लेकर वेदना थी तो वह त्योहार मनाने वाले समुदाय पर क्यों प्रकट की गई? क्या वही एक दिन था आक्रोश के प्रकटीकरण का? आपने चर्च के बाहर प्रदर्शन किए। भक्ति भाव के पाठ किए। मॉल व सड़क किनारे तथा बाजारों में क्रिसमस के अवसर पर की गई सजावट में तोड़फोड़ की।
अचानक इस बरस ऐसा क्या हुआ कि आपको क्रिसमस का त्योहार भारत की धरा पर मनाया जाना शूल-सा लगा और आप तोड़फोड़ पर उतर आए? आपके इस ‘कुकृत्य' से क्या रुक जाना है? ये सब रोकने के लिए तो आपने देश-प्रदेश में अपने मिजाज का तंत्र चुना हुआ है न? फिर आप फैसला क्यों करने मैदान में आ गए? उलटा दुनिया में आपके इस कृत्य ने भारत व भारतवासियों को शर्मसार कर दिया।
यूरोपीयन देशों के मीडिया को भारत की असहिष्णु छवि को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का भरपूर मौका मिल गया, जबकि देश में ऐसा कुछ था ही नहीं, लेकिन आप मुट्ठीभर लोगों के कारण पूरे हिंदुस्तान की छवि पर दाग लग गया। इसकी आपको रत्तीभर भी चिंता है?
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिसमस पर दिल्ली के एक बड़े चर्च में जाते हैं और भक्तिभाव से ईसाई समुदाय के इस त्योहार में स्वयं को समरस करते हैं। एक तरफ दुनिया के सबसे बड़े संगठन आरएसएस के मुखिया मस्जिद में जाकर सर्वधर्म समभाव का जयघोष करते हैं।
एक तरफ एक डीएनए की बात कर देश के जन-जन को एक परिवार के रूप में एकजुट करने के पुरजोर प्रयास हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ वे कौन लोग हैं, जो बगैर किसी पहचान के ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो इन सब प्रयासों पर पानी फेर देती हैं? इंदौर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में क्रिसमस के अवसर पर हुई घटनाओं ने औसत हिंदुस्तानी के मस्तक को शर्मसार कर दिया।
ये किसने किया? क्यों किया? किसके कहने से हुआ? इसका उत्तर 3 दिन बाद भी सामने नहीं आया है। छत्तीसगढ़ में तो माना कि एक घटना के बाद बंद का आह्वान था तो आक्रोश उपजा, लेकिन इंदौर में क्या था, जो कुछ तत्व अपनी मर्जी से देश, धर्म व संस्कृति के झंडाबरदार बन अराजकता पर आमादा हो गए? पहचान तो होना ही चाहिए और जवाबदेही भी तय होना चाहिए, ताकि भारत का भाल यूं दुनिया के सामने अगले बरस शर्मसार न हो।
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