किस ट्रेन का कोच अटेंडेंड कर रहा था कछुए की तस्करी: अवैध शराब तलाश रही पुलिस क्या देखकर हैरान हुई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
पटना-इंदौर एक्सप्रेस (19322) में आरपीएफ की टीम ट्रेन में अवैध शराब को लेकर सर्चिंग कर रही थी। इस दौरान एक कछुआ तस्कर उसकी गिरफ्त में आ गया।
331 जीवित इंडियन टेंट टर्टल बरामद
जानकारी के अनुसार ट्रेन के एच-1 कोच का अटेंडेंट ही कछुआ तस्कर निकला। तलाशी के दौरान आरपीएफ ने उसके दो बैग से 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल बरामद किए हैं।
संदेह के आधार पर तलाशी
एएसआई हेमंत कुमार राजपूत और आर. जॉनी कुमार ने अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत की संदेह के आधार पर तलाशी ली। उसके पास दो बैग थे, जिनमें छोटे-छोटे जीवित कछुए पाए गए।
अजय मूल रूप से इंदौर का निवासी
आरपीएफ के अनुसार कोच अटेंडेंट अजय मूल रूप से इंदौर का है। वह चार साल से ट्रेन में बतौर अटेंडेंट काम कर रहा है। यह नौकरी उसे निजी एजेंसी के जरिए मिली थी, जिसके पास वेस्टर्न रेलवे के इस रेक के मेंटेनेंस और स्टाफ सप्लाई का ठेका है।
आरोपी से मिली ये जानकारी
आरोपी ने बताया कि उसे लखनऊ में एक व्यक्ति ने दो बैग सौंपे थे। एक बैग देवास और दूसरा इंदौर में सौंपना था। देवास में बैग देने पर एक हजार और इंदौर में दूसरे बैग के लिए पंद्रह सौ रुपए मिलने थे। आरोपी ने माना कि पैसों के लालच में आकर उसने यह काम किया।
ऐसे छिपा देता था
आरोपी फर्स्ट एसी कोच का अटेंडेंट था। कोच में उसके पास निजी केबिन और बेडरोल स्टोरेज की सुविधा थी। दोनों बैग उसी निजी सामान के बीच रखे गए थे।
आकार के साथ बढ़ती है कीमत
इक्वेरियम कारोबार से जुड़े लोगों से जानकारी मिली कि छोटे कछुओं की कीमत बाजार में करीब दो हजार से पांच हजार रुपए तक होती है। जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, कीमत भी बढ़ जाती है।
इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के कछुए
वन विभाग ने बरामद कछुओं को इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति का बताया है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पूरी तरह संरक्षित है। इनका पालन, परिवहन और बिक्री प्रतिबंधित है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है, इसमें तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
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