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हमीदिया अस्पताल में हंगामा: ‘मृत’ घोषित नवजात में हरकत का दावा; पिता ने बनाया VIDEO

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 मार्च 2026, 2:49 pm
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हमीदिया अस्पताल में हंगामा

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
हमीदिया अस्पताल में नवजात को मृत घोषित किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों का आरोप है कि बच्ची को मृत बताकर डेथ सर्टिफिकेट दे दिया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद उसमें सांस जैसी हरकत दिखाई दी। पिता ने इसका वीडियो भी बनाया है।

पिता का दावा-शव लेने पहुंचे तो दिखी हरकत
परिजनों के मुताबिक, रात करीब 12 बजे उन्हें बच्ची का मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया गया था, जिसमें मौत का समय शाम करीब साढ़े 8 बजे दर्ज था। पिता परवेज का कहना है कि जब वह एनआईसीयू में बच्ची को देखने पहुंचे, तो उसके पेट में हलचल दिखाई दी, जिससे सांस चलने का अंदेशा हुआ। इसके बाद उन्होंने वीडियो बनाकर डॉक्टरों से सवाल किए।

डॉक्टरों का पक्ष-अत्यंत प्रीमैच्योर केस
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, यह बेहद कम वजन (करीब 450 ग्राम) और समय से पहले जन्मा शिशु था। शुरुआती जांच में हार्टबीट नहीं मिली थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कभी-कभी शरीर में हलचल दिखाई दे सकती है, लेकिन जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है।

कई अस्पतालों से रेफर होकर पहुंची थी महिला
जानकारी के मुताबिक, रायसेन जिले के बरेली निवासी परवेज अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, फिर जिला अस्पताल और बाद में हमीदिया अस्पताल लाए थे। महिला की गर्भावस्था करीब 5–6 माह की थी, जिससे शिशु का जन्म प्रीमैच्योर स्थिति में हुआ।

परिजनों का आरोप-जवाब नहीं मिला
परिजनों ने आरोप लगाया कि सवाल पूछने पर डॉक्टरों ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। साथ ही वीडियो बनाने से रोकने और धक्का-मुक्की की बात भी सामने आई है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जांच के निर्देश
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है। डॉक्टरों ने यह भी माना कि नवजात को कुछ समय और ऑब्जर्वेशन में रखा जाना चाहिए था, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सकती थी।

‘Abortus’ केस बताया
वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, यह एक “Abortus” केस ( ऐसा भ्रूण या फीटस जो पूरी तरह विकसित होने से पहले ही गर्भ से बाहर आ जाए) था, यानी 20 सप्ताह से पहले या 500 ग्राम से कम वजन वाले भ्रूण का जन्म। ऐसे मामलों में शिशु का पूर्ण विकास नहीं होता और जीवित रहने की संभावना बेहद कम रहती है।

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