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सिटी बसों में पैसे देकर भी नहीं मिलता टिकट: एआईसीटीएसएल अफसर टिकट काउंटर और परिचालकों की मिलीभगत से हो रहा टिकट घोटाला

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 मार्च 2026, 2:12 pm
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सिटी बसों में पैसे देकर भी नहीं मिलता टिकट

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एआईसीटीएसएल कंपनी अफसरों की लापरवाही से घोटाले का गढ़ बन गई है। सिटी बसों में सफर करने वालों से टिकट काउंटरों पर मनमानी राशि वसूली जा रही है, जबकि बसों में परिचालक पैसे तो ले रहे है लेकिन टिकट नहीं देते।

यानी टिकट घोटाला जारी है। एआईसीटीएसएल अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से कंपनी घाटे में डूब रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार मूकदर्शक हैं।

बीआरटीएस टूटने के बाद एआईसीटीएसएल में मनमानी का आलम है। टिकट आउंटर पर तैनात कर्मचारियों सहित बसों के चालक व परिचालक खुलकर मनमानी कर रहे है। सिटी बसों के यात्री पैसे देने के बाद भी टिकट नहीं मिलने से तनाव में सफर करते है।

कई यात्रियों का कहना है जहां पांच या दस रुपए किराया लगता है वहां के टिकट काउंटर ही नहीं कंडेक्टर भी 20 से 30 रुपए तक वसूल रहे है। टिकट मांगने पर परिचालक कहता है अभी देते हैं और आगे बढ़ जाता है। कुछ देर बाद यात्री बिना टिकट ही गंतव्य पर उतर जाता है।

इस तरह सिटी बसों में टिकट घोटाला बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है। हालांकि, एआईसीटीएसएल के अफसर सिटी बसों पर नियंत्रण का दावा करते हैं लेकिन हकीकत में भर्राशाही रोक पाने में नाकाम।

कमाई कम खर्च ज्यादा
एआईसीटीएसएल अफसरों की लापरवाही व मिलीभगत से बसों से कमाई कम और खर्च ज्यादा हो रहा है। घाटा लगातार बढ़ रहा है। लोगों का तर्क है कि शहर में करीब 400 से अधिक सिटी बसें दौड़ रही हैं। इनमें रोज करीब 80 हजार यात्री सफर करते हैं। सामान्य तौर पर प्रति यात्री औसत किराया 20 रुपए मानें तो रोज लगभग 16 लाख रुपए से अधिक आय एआईसीटीएसएल को होना चाहिए लेकिन एआईसीटीएसएल का रिकॉर्ड इसकी पुष्टि नहीं करता।

वेतन कम, खर्च ज्यादा
बताया जाता है बीआरटीएस टूटने के बाद भी एआईसीटीएसएल ने एबी रोड पर सडक़ किनारे बुकिग काउंटर बनाए हैं। इन पर कर्मचारी मनमानी राशि वसूल रहे है। एआईसीटीएसएल द्वारा तय किराया बेमानी साबित हो रहा है। परिचालको के हाथ में बड़े और छोटे साइज के टिकट होते हैं। टिकिट का प्रारूप भी तय नहीं रह गया है। इसका फायदा उठाकर टिकट काउंटर पर तैनात कर्मचारी और परिचालक मनमानी कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं इन कर्मचारियों का वेतन केवल 10 से 15 हजार रुपए तक है। लेकिन यक कर्मचारी टिकिट घोटाला कर कमाई कर रहे है।

निगरानी के लिए तैनात
एआईसीटीएसएल द्वारा बसों में आकस्मिक चेकिंग के लिए कई कर्मचारी तैनात हैं। इनमें अमित चौधरी, कपिल चौधरी, अंकित वर्मा, जगजीत सिंह, अमित पोल, चेतन कर्णिक, अमन चौकसे शामिल हैं। लेकिन तमाम निगरानी और सतर्कता के बाद भी टिकट घोटाला रुकने की जगह बढ़ रहा है।

अफसरों से मिलीभगत
सूत्रों की मानें तो अफसरों से मिलीभगत कर टिकट काउंटर पर कर्मचारियों की तैनाती हो रही है। इसी तरह परिचालक भी अफसरों की मेहरबानी से ही नियुक्त किए जा रहे हैं। यानी मिलीभगत से टिकट घोटाला फलफूल रहा है वरना बसें ओवरलोड चलने के बाद भी एआईसीटीएसएल लगातार घाटे में कैसे जा रहा है।

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