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गुरुवार का वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व: घर की ऊर्जा संतुलित और सकारात्मक बनाएं

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 मार्च 2026, 11:17 am
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गुरुवार का वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गुरुवार का संबंध ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा से माना जाता है, और वास्तु शास्त्र में भी इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन बृहस्पति ग्रह से जुड़ा होता है, जो घर में सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता लाने वाला ग्रह माना जाता है। यदि इस दिन कुछ खास वास्तु उपाय अपनाए जाएं, तो घर की ऊर्जा संतुलित और सकारात्मक बन सकती है।

वास्तु के अनुसार गुरुवार को घर के उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह दिशा देवताओं का स्थान मानी जाती है। इस दिन इस कोने की साफ-सफाई करना, हल्का पीला या सफेद रंग रखना, और यहां पूजा स्थल को व्यवस्थित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में स्थिरता और समृद्धि बढ़ती है। पूजा स्थान पर पीले फूल चढ़ाना, हल्दी का तिलक लगाना और घी का दीपक जलाना सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। माना जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य और मानसिक शांति बनी रहती है।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन घर में अनावश्यक वस्तुएं, विशेषकर कबाड़ या टूटे सामान हटाना चाहिए। इससे रुकी हुई ऊर्जा का प्रवाह फिर से सक्रिय होता है। इसके अलावा रसोई में चने की दाल या पीले खाद्य पदार्थ बनाना भी शुभ संकेत देता है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि गुरुवार को घर के बड़े-बुजुर्गों और गुरु तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि वास्तु के अनुसार सकारात्मक कंपन बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका भी है।

गुरुवार केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी घर और जीवन में संतुलन, समृद्धि और शांति लाने का उत्तम अवसर प्रदान करता है।

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