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तीन ‘माननीय’ देंगे कांग्रेस को बड़ा झटका!

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मार्च 2026, 5:09 pm
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तीन ‘माननीय’ देंगे कांग्रेस को बड़ा झटका!

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मप्र कांग्रेस के तीन ‘माननीय’ इन दिनों सियासी गलियारों में खासे चर्चा में हैं। वजह परदे के पीछे चल रही उनकी राजनीतिक सक्रियता है। चर्चा है कि जिन ‘माननीयों’ के नाम ‘ए’, ‘एन’ और ‘एच’ अक्षरों से शुरू होते हैं, ने मन ही मन यह स्वीकार कर लिया है कि कांग्रेस में रहकर उनके राजनीतिक भविष्य की संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं।

ऐसे में वे अपने सियासी सफर को नई दिशा देने के लिए विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। भाजपा के साथ बढ़ती इनकी नजदीकियां अब किसी से छिपी नहीं हैं। भाजपा के बड़े नेताओं से कभी औपचारिक मुलाकात, तो कभी किसी कार्यक्रम के बहाने होने वाली इनकी बैठकों ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये तीनों ‘माननीय’ कब और किस अंदाज में अपना अगला कदम उठाते हैं।

‘घर वाली-बाहर वाली’ के फेर में ‘माननीय’
प्रदेश के एक माननीय के परिवार में इन दिनों उनके रागात्मक स्वभाव के कारण क्लेश की स्थिति बन गई है। दरअसल, माननीय इन दिनों ‘घर वाली-बाहर वाली’ के फेर में उलझे हुए बताए जा रहे हैं। बताते हैं कि इस उलझन का असर अब उनके कामकाज पर भी साफ नजर आने लगा है।

स्थिति यह है कि माननीय न तो अपने विधानसभा क्षेत्र को पर्याप्त समय दे पा रहे हैं और न ही विभाग के कामकाज में पहले जैसी दिलचस्पी ले रहे हैं। नतीजा यह है कि जनता से दूरी बढ़ती जा रही है और विभाग की फाइलें पेंडिंग होने लगी हैं।

बताया जाता है कि माननीय की रागात्मकता से पैदा हुए हालात की जानकारी प्रदेश के मुखिया तक भी पहुंच चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में क्या मोड़ आता है?

प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों पर लग रहे गंभीर आरोप!
मध्य प्रदेश भाजपा के दो पदाधिकारी भाईसाब इन दिनों अपनी उज्ज्वल कार्यशैली को लेकर नहीं, जमीन से जुड़े आरोपों को लेकर चर्चाओं में हैं। दोनों पर फर्जी तरीके से जमीनों पर कब्जा करने और उनकी खरीद-फरोख्त करने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि इनमें से एक पदाधिकारी भाईसाब पर एक किसान की खेती वाली जमीन को ही अपने नाम कराने का आरोप है।

पीड़ित किसान का कहना है कि अपनी जमीन बचाने के लिए पुलिस थाने से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक, जहां-जहां उसे न्याय मिलने की उम्मीद थी, वहां-वहां शिकायत की। इसके बावजूद उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। इन आरोपों के साथ यह भी चर्चाएं हैं कि जब से इन पदाधिकारी भाईसाब को सत्ता का सानिध्य मिला है, तब से उन्होंने भोपाल और इंदौर में विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त का धंधा शुरू कर दिया है। नारदजी कहते हैं कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह तो पदाधिकारी भाईसाब ही बता सकते हैं। फिलहाल तो इन आरोपों के चलते पार्टी की जरूर किरकिरी हो रही है।

पत्रकार ने ‘आईपीएस’ पर लगाया मानहानि का केस
अब तक आमतौर पर पत्रकारों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे दर्ज होने की खबरें ही सामने आती रही हैं, लेकिन यह मामला कुछ अलग है। संभवतः प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी पत्रकार ने ही एक आईपीएस अधिकारी को मानहानि के मामले में अदालत तक घसीट लिया हो।

दरअसल, पहले से विवादों में रहे 2014 बैच के एक आईपीएस अधिकारी, जो कि वर्तमान में भोपाल की एक बटालियन में कमांडेंट के रूप में पदस्थ हैं। बालाघाट के एक पत्रकार ने उनके खिलाफ अदालत में मानहानि का केस लगाया है। बताया जाता है कि बालाघाट एसपी रहते हुए इन ‘साहब’ ने पत्रकार पर प्राणघातक हमला करने के आरोप में गिरफ्तार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपियों को ‘श्री’ और ‘जी’ जैसे सम्मानसूचक शब्दों से, तो पीड़ित पत्रकार को ‘अड़ीबाज’ और ‘तथाकथित पत्रकार’ कहकर संबोधित किया था।

इस टिप्पणी से आहत होकर पत्रकार ने ‘साहब’ के खिलाफ मानहानि का केस लगाया है। अब ‘साहब’ को वर्दी के सम्मान की रक्षा के लिए अदालत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। साथ ही अपनी ‘सीआर’ खराब होने की आशंका भी सताने लगी है।

ईरान-अमेरिका युद्ध ने बढ़ाई ‘बड़े साहब’ की बेचैनी
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध से प्रदेश के एक सेवानिवृत्त ‘बड़े साहब’ खासे बेचैन बताए जा रहे हैं। बताया जाता है कि ‘बड़े साहब’ ने अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर दुबई में मोटा निवेश कर रखा है। जैसे ही ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच टकराव की खबरें तेज हुईं, उनकी रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो गया।

हालात यह हैं कि ‘बड़े साहब’ पल-पल युद्ध से जुड़ी खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। चर्चा तो यहां तक है कि अपनी ‘काली कमाई’ पर ईडी और सीबीआई की नजर न पड़ जाए, इस डर से ‘बड़े साहब’ पहले ही दुबई शिफ्ट होने की तैयारी कर चुके थे। लेकिन इसी बीच अंतरराष्ट्रीय तनाव ने युद्ध का रूप ले लिया और उनकी दुबई उड़ने की योजना पर मानो पानी फिर गया। अब स्थिति यह है कि युद्ध से जुड़ी हर नई खबर के साथ ‘बड़े साहब’ की धड़कनें और तेज हो जाती हैं।

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