महाकाल की संध्या और शयन आरतियों को बेचने से भारी रोष: कांग्रेस ने बताया अधर्म; सरकार का निर्लज्ज निर्णय
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को अधिकृत वेबसाइट पर ₹250 शुल्क देकर पहले से स्लॉट बुक करना होगा। दोपहर 12 बजे से संध्या आरती और शाम 4 बजे से शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होगी।
प्रवेश का समय भी तय कर दिया गया है ताकि भीड़ नियंत्रित रहे। इस निर्णय को लेकर श्रद्धालुओं में भारी रोष है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है मुख्यमंत्री अपने गृह नगर में स्थित अध्यात्म के सबसे बड़े शिखर को लेकर असंवेदनशील हैं और सरकार का यह निर्णय निर्लज्जता है। कुछ श्रद्धालु तो इतने ज्यादा नाराज हैं कि श्री महाकाल मंदिर प्रबंध समिति पर महाकाल की आरतियों को बेचने तक का आरोप लगा रहे हैं।
जीतू पटवारी ने तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया सरकार भक्ति और अध्यात्म को पैसे से तौल रही है। यह सरासर अधर्म है। सृष्टि नियंता भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुंओं को पैसे देना पड़े तो इससे अधिक निर्लज्जता कुछ नहीं हो सकती। श्रद्धालुओं का कहना है भस्मारती और शीघ्र दर्शन शुल्क तक तो ठीक था लेकिन संध्या और शयन आरती पर शुल्क लगाना देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति भारी अन्याय है।
सभी शुल्क नहीं चुका सकते। वे दूर-दूर से भारी खर्च कर आते हैं उस पर दर्शन के लिए भी शुल्क देना पड़े तो उनकी विवशता समझी जा सकती है। वैसे भी महाकाल के गर्भगृह तक पहुंच पाना सामान्य श्रद्धालुओं के लिए असंभव कर दिया गया है। अब दूर से दर्शन भी मुश्किल हो गए हैं।
सरकार ने झाड़ा पल्ला
प्रदेश के धर्मस्व राज्यमंत्री धर्मेंद्रसिंह लोधी ने नई व्यवस्था से अनभिज्ञता जताते हुए कहा मीडिया उनके संज्ञान में यह बात लाया है। वे इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करेंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार धर्म और आस्था पर चलती है। निर्णय श्री महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति का है।
वह स्वायत्त संस्था है। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मंत्री की यह सफाई गले से नहीं उतरती क्योंकि मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कलेक्टर हैं इसलिए इस निर्णय के पहले सरकार की सहमति नहीं ली गई होगी, इस पर विश्वास करना कठिन है।
दर्शन व आरती शुल्क में भारी भ्रष्टाचार
श्री महाकाल के दर्शन व आरती के शुल्क में भारी भ्रष्टाचार का समय-समय पर खुलासा होता रहा है। पिछले साल प्रोटोकॉल व्यवस्था में बहुत बड़ा घोटाला सामने आया था। आठ-नौ लोग आरोपी बनाए गए थे। पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। श्रद्धालुओं का कहना है संध्या और शयन आरती पर भी शुल्क लगाकर भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा दिया जा रहा है।
लगता है सरकार ने महाकाल मंदिर को व्यावसायिक संस्थान में बदलने का फैसला कर लिया है। दुर्भागय है यह ऐसी सरकार में हो रहा है जो भारत की संस्कृति व विरासत के संवर्धन का दावा करते नहीं अघाती।
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