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इंदौर की कुलदेवी बिजासन माता का मंदिर ही कब्जे की चपेट में: कल भंडारे से पूर्व मंदिर के सेवादार काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 मार्च 2026, 5:59 pm
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इंदौर की कुलदेवी बिजासन माता का मंदिर ही कब्जे की चपेट में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कुलदेवी बिजासन माता मंदिर ही कब्जे की चपेट में आ गया है। वे इंदौर की कुलदेवी मानी जाती हैं और यहां नौ देवियों का विश्व का एकमात्र स्वयंभू स्थान है, जहां नवरात्र के दिनों में रोजाना 3 लाख श्रद्धालु आते हैं। मंदिर का स्थान कम कर दिए जाने के कारण उन्हें न केवल असुविधा होगी, बल्कि व्यवस्थाएं जुटाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कल सुबह मंदिर के सेवादार भंडारे के पूर्व काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर मांग करेंगे कि मंदिर की जगह पर कोई कब्जा न हो।

बिजासन सांस्कृतिक चेतना सेवा समिति के भूपेंद्र पोतदार ने बताया शहर के सबसे प्राचीन और कुलदेवी बिजासन माता मंदिर की कुल 21 एकड़ जमीन थी, जिसमें से पिछले वर्षों में 19 एकड़ जमीन वन विभाग, एयरपोर्ट, मेट्रो ट्रेन, बीएसएफ आदि को दे दी गई। गत वर्ष तो मुख्य मार्ग ही बंद कर दिया गया था, जिसके बाद मंदिर से जुड़े सेवादारों के विरोध के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने रास्ता दिया था। अब ये मार्ग 60 फीट चौड़ा ही है। 19 मार्च से चैत्र नवरात्र का पर्व शुरू हो रहा है।

यहां प्रतिदिन 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए आएंगे। ऐसे में मार्ग छोटा होने से न केवल उन्हें आने-जाने में परेशानी होगी, बल्कि मंदिर में तमाम व्यवस्थाएं जुटाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विभिन्न विभागों को दिए जा रहे कब्जे के कारण माता का ये स्थान संकट में आ गया है।

स्थिति ये है कि मंदिर की जमीन पर शासन द्वारा विभिन्न विभागों को कराए जा रहे कब्जे (अधिग्रहण) के कारण इस वर्ष नवरात्र में अंतिम बार मेला लगेगा। उन्होंने मांग की कि महाकाल लोक की तर्ज पर यहां बिजासन लोक बनाया जाए, ताकि ये स्थान सुरक्षित रहने के साथ ही श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहे।

कल सुबह की आरती के बाद होगा विरोध प्रदर्शन... पोतदार ने बताया प्रत्येक रविवार को मंदिर में प्रात: 8 बजे से भंडारे का आयोजन होता है। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु माता की प्रसादी ग्रहण करते हैं। हमने तय किया है कि कल रविवार को प्रात: 7 बजे आरती के बाद और भंडारे के पूर्व काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे, ताकि जिम्मेदारों की नींद खुले और वे देवी के स्थान को बख्श दें। उन्होंने सवाल उठाया कि हमेशा जमीन लेने के लिए मंदिरों को ही लक्ष्य क्यों बनाया जाता है?

विरोध के चलते अटकी सुपर कॉरिडोर एक्सटेंशन योजना
यहां सुपर कॉरिडोर एक्सटेंशन की योजना भी बनी, जिसका भक्तों और मंदिर के सेवादारों ने ये कहकर विरोध किया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुपर कॉरिडोर से घूमकर आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए यहीं से रास्ता दिया जाए।

इससे ये मामला अटक गया। फिर तय हुआ कि सेंट्रल स्कूल के पास से एक सड़क बिजासन टेकरी तक जाने के लिए बनेगी, जिससे श्रद्धालु आ-जा सकेंगे। एयरपोर्ट ने इस जमीन पर कार पार्किंग, फूड जोन, शॉपिंग फैसिलिटी समेत कई योजनाएं बना लीं।

पोतदार का कहना है कि 60 फीट चौड़ी यह सड़क न केवल अपर्याप्त, बल्कि असुविधाजनक भी है। न तो श्रद्धालुओं को आने-जाने में सुविधा होगी और न मंदिर पर सुविधाएं जुटाई जा सकेंगी।

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