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एनजीएस खरीदी की जांच की जाएगी: समिति का गठन

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 मार्च 2026, 5:08 pm
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एनजीएस खरीदी की जांच की जाएगी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 5.88 करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन (एनजीएस) की खरीद का विवाद और बढ़ गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

अपर संचालक (वित्त) इसके अध्यक्ष होंगे। वरिष्ठ संयुक्त संचालक, उपसंचालक, प्रोफेसर और इंजीनियर सदस्य होंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। इस मामले में ईओडब्ल्यू और विभागीय स्तर पर पहले ही शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आदेश के मुताबिक, यह समिति न सिर्फ खरीद प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच करेगी, बल्कि तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन से जुड़े हर दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल भी करेगी। जांच के दौरान एमडीआरयू गाइडलाइंस, भंडार क्रय नियम और सरकारी निर्देशों के पालन की भी सख्ती से जांच होगी। वहीं मामले से जुड़े सभी दस्तावेज भी जब्त करने के लिए अधिकृत होगी।

पुरानी मशीन के लिए रिजेंट खरीदने का प्रस्ताव स्वशासी समिति की पिछले साल हुई बैठक में मंजूर किया गया था। इसके विपरीत एमजीएम के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दावा किया था कि मशीन अनुपयोगी हो चुकी है और उसके रिजेंट का उत्पादन बंद हो गया है।

हालांकि 9 मार्च 2026 की बैठक में एमजीएम प्रबंधन ने कमिश्नर हेल्थ की मौजूदगी में उसी पुरानी मशीन के लिए सामग्री खरीद प्रक्रिया को प्रचलन में बताया। इस विरोधाभास ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मशीन अनुपयोगी है तो उसके लिए सामग्री खरीद की प्रक्रिया जारी कैसे है और यदि प्रक्रिया चल रही है तो मशीन को बेकार बताने का आधार क्या है? इसे लेकर अब स्पष्ट जवाब की जरूरत है।

सर्टिफिकेट और मॉडल नंबर पर सवाल
कॉलेज को 4 साल पहले डब्ल्यूएचओ से दान में एनजीएस मशीन मिली थी। जिससे एक भी टेस्ट नहीं किया गया और 5.88 करोड़ में नई मशीन खरीद ली। ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि मशीन की खरीदी प्रक्रिया में जमकर गड़बड़ी की गई है, वहीं वैध सर्टिफिकेट भी नहीं है।

इसके साथ ही जो मॉडल कागजों में बताया गया था, उसकी जगह सप्लाई हुई मशीन पर दूसरा मॉडल नंबर लिखा है। टेंडर कमेटी अध्यक्ष रही डॉ. शिखा घनघोरिया ने सभी दस्तावेज वैध होने का दावा किया था।


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