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निगम आयुक्त को कानून की जानकारी नहीं...?

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । नगर निगम आयुक्त द्वारा नोटरी के आधार पर नामांतरण नहीं किए जाने संबंधी जारी आदेश पर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट...

Khulasa First

संवाददाता

22 दिसंबर 2025, 9:23 पूर्वाह्न
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निगम आयुक्त को कानून की जानकारी नहीं...?

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
नगर निगम आयुक्त द्वारा नोटरी के आधार पर नामांतरण नहीं किए जाने संबंधी जारी आदेश पर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने इस आदेश पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे कानून की समझ के अभाव में जारी किया गया निर्णय बताया है। उन्होंने नामांतरण की वैधानिक स्थिति, नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

नगर निगम आयुक्त ने एक आदेश जारी किया है कि नोटरी के आधार पर नामांतरण न किया जाए और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने सवाल उठाया है कि क्या इंदौर नगर निगम आयुक्त को कानून की सही जानकारी है।

द्विवेदी ने कहा कि क्या आयुक्त इंदौर नगर निगम या किसी भी निकाय, पंचायत द्वारा किए गए नामांतरण को संपत्ति के स्वत्व का विधिक अधिकार मानते हैं। यदि ऐसा है तो राज्य सरकार से गजट नोटिफिकेशन जारी करवाया जाए कि नामांतरण विधिक स्वत्व का प्रमाण है।

नोटरी के आधार पर नामांतरण रोकने के आदेश पर कांग्रेस का हमला
उन्होंने कहा कि नगर निगम के नामांतरण दाखिला तथा संपत्ति कर रसीद में स्वयं स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह स्वत्व का विधिक अधिकार नहीं है, बल्कि केवल कर संग्रहण और राजस्व संग्रहण के लिए होता है। यह बात विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों में भी उल्लेखित की जा चुकी है।

द्विवेदी ने आयुक्त को सुझाव दिया कि वे स्वयं नगर निगम कार्यालय का अवलोकन करें। उन्होंने आरोप लगाया कि महज 50 रुपए के शपथपत्र के आधार पर नगर निगम की लीज आवंटन पर दी गई दुकानों आदि के नामांतरण बाजार समिति द्वारा किए गए, जिससे सरकार के खजाने को लाखों रुपए की हानि हुई है।

क्या नामांतरण की शिकायतें लेकर कार्रवाई करेंगे?: उन्होंने कहा कि इंदौर के विभिन्न मार्केट, जिन्हें नगर निगम ने लीज आधार पर आवंटित किया है, वहां अनैतिक रूप से हस्तांतरण कर अन्य लोग संस्थान चला रहे हैं और अनैतिक लाभ कमा रहे हैं।

प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या आयुक्त ऐसे संपत्ति कर खातों के नामांतरण को शून्य करेंगे, जो बिना पंजीकृत वसीयत या वारिसा आधार पर खोले गए हैं। क्या आयुक्त स्वतः संज्ञान लेकर आम जनता से ऐसे नामांतरण की शिकायतें लेकर कार्रवाई करेंगे।

द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि नोटरी पब्लिक द्वारा दस्तावेज का केवल सत्यापन किया जाता है, न कि वह कोई विधिक हस्तांतरण का दस्तावेज होता है। यदि नगर निगम संपत्ति कर विभाग ऐसे दस्तावेजों के आधार पर खाते खोल रहा है तो उन्हें मप्र सरकार के पंजीयन विभाग को उन दस्तावेजों की छायाप्रति भेजनी चाहिए, ताकि स्टाम्प ड्यूटी वसूली जा सके।

अधिकारी मनमाने आदेश जारी कर रहे: उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और विभागीय अधिकारियों की कारगुजारी पर लगाम कसने के लिए विभागीय समीक्षा करने के बजाय अधिकारी मनमाने आदेश जारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के दौरान शासकीय अधिकारियों द्वारा लगातार सेवा सिविल आचरण अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है और राज्य सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।

अधिकारी जनप्रतिनिधियों की तरह स्वयं को महिमामंडित करने के लिए बयानबाजी और आदेश जारी कर रहे हैं, जिन्हें सीधे मीडिया को जारी किया जा रहा है, जबकि यह कार्य जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जाना चाहिए। द्विवेदी ने मांग की कि आयुक्त इंदौर नगर निगम सहित अन्य अधिकारियों को मध्यप्रदेश सरकार स्पष्ट निर्देश जारी करे कि वे सेवा सिविल आचरण अधिनियम का सख्ती से पालन करें।

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