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तीन इमली बस स्टैंड पर लापरवाही की आग: अवैध पार्किंग और प्रशासनिक अनदेखी से जली तीन बसें

KHULASA FIRST

संवाददाता

15 मार्च 2026, 1:24 pm
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परिवहन विभाग के संरक्षण और जिला प्रशासन की कमजोरी पर उठे सवाल

सैकड़ों बसों की अवैध पार्किंग, टिकट ऑफिस की आड़ में चल रहा माल ट्रांसपोर्ट

हाल ही में रिंग रोड पर भी स्लीपर बस में लगी थी आग, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के तीन इमली चौराहा बस स्टैंड के पास स्थित बस पार्किंग में कल रात अचानक लगी आग ने परिवहन विभाग की व्यवस्था का खुलासा कर दिया। पार्किंग में खड़ी तीन बसें आग की चपेट में आकर जलकर खाक हो गईं।

घटना के समय करीब 25 से 30 अलग-अलग ट्रेवल्स की बसें वहां खड़ी थीं, जिन्हें बाद में सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने एक बार फिर परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की लापरवाही व संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन इमली चौराहे के पास जिस स्थान पर बसें खड़ी की जाती हैं, वह लंबे समय से अनधिकृत रूप से संचालित हो रहा है। सवाल यह है कि इस बस पार्किंग को किस विभाग की अनुमति मिली है और आखिर किसके संरक्षण में यह संचालन हो रहा है।

क्षेत्र में सैकड़ों बसें रोजाना सड़क किनारे, पुल-पुलिया के नीचे और खाली मैदानों में अवैध रूप से खड़ी की जाती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

टिकट बुकिंग ऑफिस की आड़ में चल रहा अवैध कारोबार... तीन इमली क्षेत्र में ट्रेवल्स संचालकों द्वारा टिकट बुकिंग ऑफिस के नाम पर कई अवैध कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनकी आड़ में यात्री बसों से माल परिवहन भी किया जा रहा है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। बसों में यात्रियों के साथ-साथ पार्सल और माल की ढुलाई भी की जा रही है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

आग की घटनाओं के बावजूद नहीं चेता प्रशासन... हाल ही में रिंग रोड पर भी एक स्लीपर कोच बस में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी और करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था। इसके बावजूद परिवहन विभाग और प्रशासन ने शहर में अवैध बस संचालन और पार्किंग पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया।

सीएम हेल्पलाइन में पुरस्कार, लेकिन जमीनी हकीकत अलग... परिवहन विभाग को जिले में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण के लिए पुरस्कृत किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। शहर के बीचोबीच अनधिकृत बस संचालन जारी है और टिकट बुकिंग ऑफिस के नाम पर अवैध माल परिवहन खुलेआम हो रहा है। स्लीपर बसों पर सख्त निर्देशों के बावजूद केवल जुर्माने की कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।

आरटीओ कार्यालय के आसपास भी अवैध बस अड्डे... नायता मंूडला स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के आसपास और पहुंच मार्ग पर भी कई अवैध बुकिंग ऑफिस और पार्किंग यार्ड संचालित हो रहे हैं। यहां सैकड़ों बसें अवैध रूप से खड़ी रहती हैं और इनमें खुलेआम माल भरकर परमिट नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने पुराने वाहनों पर सख्ती को ठहराया वैध... हाई कोर्ट ने भी हाल ही में बस मालिकों को बड़ा झटका देते हुए 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को स्टेज कैरिज परमिट न देने के नियम को वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और राज्य सरकार को ऐसे नियम बनाने का पूरा अधिकार है।

आग की घटना में यातायात पुलिस ने संभाला मोर्चा... रात्रि लगभग 8.05 बजे तीन इमली चौराहे पर बस डिपो में खड़ी बसों में अचानक आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए, जिससे चौराहे पर भीड़ बढ़ने लगी।

इस दौरान यातायात प्रबंधन में तैनात प्रधान आरक्षक मुकेश लश्करी, आरक्षक प्रदीप कुमार शर्मा और आरक्षक अशोक कुमार ने तत्परता दिखाते हुए कंट्रोल रूम को सूचना दी और बस स्टैंड में खड़ी अन्य बसों को तत्काल बाहर निकलवाया। साथ ही चौराहे पर भीड़ को नियंत्रित कर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा, जिससे जाम जैसी स्थिति बनने से बच गई।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा खतरा... शहर में अवैध बस पार्किंग, टिकट बुकिंग के नाम पर चल रहे कारोबार और यात्री बसों से माल परिवहन की गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं।

बावजूद इसके परिवहन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होना इस बात का संकेत है कि सिस्टम की लापरवाही और संरक्षण के कारण ही यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है।

नरेंद्र सिलावट है संचालक... तीन इमली चौराहा बस स्टैंड के नजदीक चल रही इस अवैध पार्किंग का संचालन नरेंद्र सिलावट द्वारा किया जाता है। यहां खड़ी होने वाली बसों से जमकर रुपए भी वसूले जाते हैं।

बताया जा रहा है कि यहां 12 घंटे के लिए खड़ी होने वाली बसों से 300 से 500 रुपए वसूले जाते हैं। सिलावट की पार्किंग में प्रतिदिन 70 से 80 बसों का आना-जाना रहता है। अवैध पार्किंग में एक समय में 40 से अधिक बसों के खड़े रहने की जगह है, जो ज्यादातर समय भरी ही रहती हैं।

रघु परमार की है जमीन... अवैध पार्किंग की यह जमीन कांग्रेस नेता रघु परमार की है। सूत्रों के मुताबिक यहां अवैध पार्किंग के एवज में परमार को प्रतिमाह 70 से 75 हजार रुपए किराया मिलता है। किसी समय इस जगह पर कमल वर्मा परिवार का कब्जा हुआ करता था, बाद में आईडीए और वर्मा के बीच चले लंबे केस के बाद कोर्ट ने जमीन का फैसला आईडीए के पक्ष में सुनाया था। तत्कालीन दिग्विजय सरकार के समय रघु परमार आईडीए के उपाध्यक्ष हुआ करते थे, उसी समय परमार ने यह जमीन अपने रिश्तेदार के नाम पर बहुत कम लीज पर करवा ली थी।

हरियाली की जगह अवैध पार्किंग... सूत्रों की मानें तो आईडीए से यह जमीन हरियाली के लिए अलॉट करवाई गई थी। यहां पेड़-पौधे लगाने, वन संबंधित कार्य या नर्सरी संचालन किया जा सकता था, लेकिन जनहित के कार्य छोड़कर यहां अवैध पार्किंग से परमार हजारों रुपए और सिलावट लाखों रुपए महीने के कमा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह जमीन हरियाली के लिए अलॉट नहीं होती तो रघु परमार अब तक यहां बिल्डिंग बनाकर बेच चुके होते। जब वैसा नहीं हो सका तो यहां बसों की अवैध पार्किंग बनाकर शासन को जमकर चूना लगाया जा रहा है।

नहीं है सुरक्षा व्यवस्था... इस अवैध पार्किंग में दर्जनों बसें हमेशा खड़ी रहती हैं, जिनके ड्राइवर और क्लीनर भी इनमें ही सोते हैं। लंबी दूरी की कई बसें यहां पार्क की जाती है और उनमें लगेज भी यही से चढ़ाया जाता है, लेकिन इस पार्किंग में इनकी सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। आग पर काबू पाने का कोई उपकरण यहां मौजूद नहीं है। इसी वजह से दमकल आने से पहले बसें जलकर खाक हो गईं।

भंवरकुआं पुलिस का हिस्सा... सूत्रों की मानें तो यह अवैध पार्किंग भंवरकुआं पुलिस के रहमो करम पर चल रही है। हर महीने पुलिस को अपना हिस्सा मिल जाता है, लिहाजा वह भी आंखे मूंदें बैठी रहती हैं। इस पार्किंग में बसों में लगी आग को लेकर भंवरकुआं थाना प्रभारी राजकुमार यादव से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

सिर्फ मेरी नहीं और भी है अवैध पार्किंग... इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र सिलावट का कहना है कि इलाके में दर्जनभर अवैध पार्किंग संचालित हैं, जहां सैकड़ों बसें खड़ी रहती हैं। हमारी पार्किंग में 150 से 200 रुपए बस का 12 घंटे तक के लिए पार्किंग शुल्क लिया जाता है। जमीन रघु परमार की है, उन्हें किराया नहीं देता, दोस्ती-यारी में उन्होंने जमीन दी हुई है।

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