कर्ज में डूबा नगर निगम अब वसूलेगा एमओएस का भी टैक्स: सैकड़ों नोटिस जारी हर घर की होगी नपती
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम कर्ज में डूबा हुआ है। सालाना बजट में करीब 8 हजार करोड़ का लेखा-जोखा दर्शाने वाले निगम के खाते में विकास कार्यों का भुगतान करने के लिए भी पैसा नहीं है। इसके चलते अब शहरवासियों से मकान के ओपन स्पेस पर भी टैक्स वसूला जाएगा, जिसके लिए सैकड़ों लोगों को नोटिस भी जारी कर दिए हैं।
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष व निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने पत्रकारो से चर्चा में महापौर पर जजिया कर की तर्ज पर टैक्स वसूलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा निगम अपनी वर्तमान आय से खुद का खर्च उठा पाने की स्थिति में नहीं है। महापौर की प्लानिंग के अनुसार अब जनता से मकान के ओपन स्पेस एमओएस पर भी टैक्स वसूली की मंजूरी दे दी है। कांग्रेस ने इस टैक्स को वापस लेने की मांग की है।
जमीन बेचकर कमाई
चौकसे के मुताबिक निगम के तमाम खर्चों का बोझ कम करने के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव प्लानिंग के तहत नया टैक्स वसूलने और निगम की जमीन बेचकर कमाई करने पर जोर दे रहे हैं। इसके चलते लगभग 65 हजार वर्गफीट जमीन की ऑनलाइन बिक्री की तैयारी भी की गई, ताकि निगम की माली हालत सुधर सके, लेकिन मामले का खुलासा होने के बाद इसे टाल दिया गया। निगम परिषद ने स्विमिंग पूल की फीस और सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग शुल्क भी बढ़ा दिया।
...तो चलेगा हस्ताक्षर अभियान
चिंटू चौकसे ने महापौर सहित निगम परिषद को चेतावनी दी है कि जनता पर थोपे गए टैक्स को वापस लिया जाए। ऐसा नहीं होने पर पहले निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे, उसके बाद भी बात नहीं बनी तो कांग्रेस धरना-प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान सहित अन्य तरीके से विरोध प्रकट करेगी।
पहले ही संपत्ति कर में 63 फीसदी वृद्धि
चौकसे ने कहा मई 2024 में निगम ने शहर की 531 कॉलोनियों के संपत्ति कर के स्लैब की दर में प्रति वर्गफीट पर टैक्स 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। इससे शहर के अधिकतर आवासीय और व्यावसायिक भवन पर संपत्ति कर में 63 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई। अब करीब दो साल बाद टैक्स वसूली का नया विकल्प तलाशकर मकान के खाली स्थान, यानी एमओएस पर टैक्स लगाने का फरमान जारी कर दिया, जो उचित नहीं है।
शासन ने नहीं दिया बकाया डेढ़ हजार चुंगी कर: चौकसे ने कहा निगम को राज्य शासन से करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए की बकाया चुंगी कर राशि लेना है। निगम द्वारा हर महीने करीब 44 करोड़ रुपए की मांग के बावजूद 17 से 18 करोड़ रुपए ही मिल पा रहे हैं, जबकि निगम को ठेकेदारों को विकास कार्यों के करोड़ों रुपए देना हैं।
इसके भुगतान की व्यवस्था भी निगम के पास नहीं है। इसके अलावा शहर में करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं। इसके भुगतान के लिए भी आर्थिक संकट है, लेकिन महापौर शासन से निगम की बकाया राशि नहीं ले पा रहे।
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