निगम ने जनता पर जबरन थोपा टैक्स: पूर्व पार्षद दिलीप कौशल की याचिका संपत्ति कर वृद्धि पर शासन ने की सुनवाई
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । नगर निगम द्वारा शहर की 1200 कॉलोनियों के रहवासियों पर जबरन टैक्स थोपा गया है। यह आरोप लगाते हुए पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने संपत्तिकर वृद्धि के साथ की जा रही टैक्स वसूली पर रोक...
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम द्वारा शहर की 1200 कॉलोनियों के रहवासियों पर जबरन टैक्स थोपा गया है। यह आरोप लगाते हुए पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने संपत्तिकर वृद्धि के साथ की जा रही टैक्स वसूली पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने शासन को सुनवाई करने के निर्देश दिए। इसके चलते शासन द्वारा गत दिवस सुनवाई की गई। अदालत के आदेश पर नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद शुक्ला ने पूर्व पार्षद दिलीप कौशल का पक्ष सुना।
इस मौके पर पूर्व पार्षद अधिवक्ता जयेश गुरनानी के साथ मंत्रालय पहुंचे। शासन के समक्ष उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नगर निगम को तत्काल प्रभाव से संपत्ति कर वृद्धि के प्रस्ताव को निरस्त करना चाहिए। इससे शहर के करीब 7 लाख 35 हजार परिवारों को राहत मिलेगी।
शहर की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है...इस मामले में पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने बताया कि इंदौर के 7.35 लाख कर दाताओं द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों रुपए शासन और नगर निगम को कर के रूप में दिए जाते हैं। इसके बाद भी इंदौर शहर की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। सरकार के आदेश (राजपत्र) के विपरीत नगर निगम द्वारा की गई कर वृद्धि इंदौर की जनता से खुली लूट है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा सुनवाई के बाद अभी अपना फैसला नहीं सुनाया गया है।
कलेक्टर गाइडलाइन... अभिभाषक जयेश गुरनानी ने बताया कि वर्ष 2020 में प्रदेश सरकार ने राजपत्र जारी कर प्रत्येक जिले में संपत्ति कर लेने या बढ़ाने के लिए कलेक्टर द्वारा निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार संपत्ति कर निर्धारण के नियम बनाए थे, लेकिन निगम द्वारा इस नियम को दरकिनार करते हुए पूर्व की संपत्ति कर दरों में सीधे 10 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई।
इससे नगरीय क्षेत्र की 923 कॉलोनियां सीधे तौर पर प्रभावित हुईं। जबकि कलेक्टर की रिपोर्ट में 923 कॉलोनियों की गाइडलाइन में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ, लेकिन निगम ने मनमाने तरीके से टैक्स वृद्धि कर दी है, जिसे निरस्त किया जाए। निगम की इस टैक्स वृद्धि से शहर के कर दाताओं पर 25 से 50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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