खबर
Top News

कंट्रोल रूम प्रभारी ने एप पर की गई शिकायतों में किया हेरफेर: आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर शिकायतों की संख्या की कम, जांच में हो सकता है खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

18 मार्च 2026, 1:43 pm
99 views
शेयर करें:
कंट्रोल रूम प्रभारी ने एप पर की गई शिकायतों में किया हेरफेर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम में कचरा प्रबंधन और जीपीएस की मॉनिटरिंग का जिम्मा संभाल रहे प्रभारी द्वारा इंदौर एप 311 पर दर्ज होने वाली शिकायतों के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। इसके चलते आला अफसरों को उन शिकायतों का डाटा सौंपा गया है, जिनका निराकरण किया गया। उन शिकायतों को सूची से अलग कर दिया गया, जिन पर कभी कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह अपने पद का दुरुपयोग कर कंट्रोल रूम प्रभारी पर मनमानी करने के आरोप लग रहे हैं।

नगर निगम में अफसरों की मनमानी से कामकाज हो रहा है। इसका फायदा अफसरों के चहेतों को भी मिलने लगा है। अफसरों की मिलीभगत से उनके चहेते आंकड़ों में हेरफेर कर सबकुछ ठीक होने का दावा करते रहते हैं, जबकि हकीकत में कुछ भी ठीक नहीं है।

हालांकि ऐसे मामलों की जानकारी महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल तक नहीं पहुंचती है। इसका फायदा उठाकर ही पैंतरेबाजी कर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई जा रही है। ऐसे ही एक मामले का खुलासा जनहित में खुलासा फर्स्ट कर रहा है।

इस मामले में कचरा प्रबंधन व जीपीएस मॉनिटरिंग का जिम्मा संभाल रहे प्रभारी अधिकारी योगेंद्र दीक्षित पर मनमानी करते हुए इंदौर एप 311 पर दर्ज शिकायतों के आंकड़ों में हेरफेर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले के संबंध में जानकारी लेने के लिए कंट्रोल रूम प्रभारी योगेंद्र दीक्षित से संपर्क करना चाहा, लेकिन नहीं हो सका।

चहेतों की शिकायत का करते निराकरण... बताया जाता है कि शहरवासी अपनी समस्या को लेकर इंदौर एप 311 पर शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन कंट्रोल रूम प्रभारी के चहेते के क्षेत्र की शिकायत होने पर दबा देता है और जो शिकायत उसके चहेते के अलावा होती है उसके निराकरण के लिए जिम्मेदार पर लगातार दबाव बनाता है।

जिससे वह परेशान होकर उसके पास पहुंचे और प्रभारी उससे मनचाहा लाभ ले सकें। इस तरह सैकड़ों शिकायतों में हेरफेर कर बिना कार्रवाई के ही बंद कर दिया जाता है। जिनका निराकरण होता है उनकी सूची अपर आयुक्त तक पहुंचा दी जाती है। बताया जाता है कि प्रभारी द्वारा लंबे समय से शिकायतों को लेकर इस तरह का खेल रचा जा रहा है। जिससे कंट्रोल रूम प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है।

भागीरथपुरा की शिकायतें
नगर निगम के जीपीएस सिस्टम और इंदौर 311 एप के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया, जिसका प्रभारी योगेंद्र दीक्षित को बनाया गया। कंट्रोल रूम का रिकॉर्ड बताता है कि यहां भागीरथपुरा के रहवासियों ने सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उनका समुचित निराकरण नहीं हुआ।

इसके चलते ही भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी पीने से करीब 36 लोगों की मौत हुई। भागीरथपुरा में भयावह हादसे के बाद जब खुलासा फर्स्ट ने आमजन से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि निगम के इंदौर एप 311 पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

कई लोगों ने खुद ही खर्च कर समस्या का निराकरण किया। ऐसी शिकायतों के निराकरण की जानकारी मिलते ही प्रभारी ने उन्हें निराकृत सूची में शामिल कर दिया। जबकि अधिकतर वह शिकायतें जिनका निराकरण महीनों बाद भी नहीं हुआ उन्हें सूची से ही अलग कर दिया।

इस तरह निगम अफसरों को भागीरथपुरा से होने वाली शिकायतों की जो सूची मिली वह आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर तैयार की गई थी। जबकि हकीकत में भागीरथपुरा के रहवासियों की समस्याओं का निराकरण हुआ ही नहीं। यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो भागीरथपुरा में भयावह हादसा नहीं होता।

गंदे पानी की सैकड़ों शिकायतें
निगम के इंदौर एप 311 पर मौजूदा में गंदे पानी की समस्या को लेकर सैकड़ों शिकायतें दर्ज है। लेकिन कंट्रोल रूम प्रभारी योगेंद्र दीक्षित उन शिकायतों के निराकरण पर जोर देने की बजाय उनको दबाकर बैठा हेै। जब कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव व निगमायुक्त क्षिाितज सिंघल ने गंदे पानी की समस्या 48 घंटे मेे दूर करने के लिए कंट्रोल रुम भी बनवा दिया है।

इसके बाद भी शहरवासियों की शिकायतों का निराकरण समयसीमा में नही हो रहा है। इस मामले में नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री प्रताप सिंह बुंदेला भी मूक दर्शक बने हुए हैं। जब कि कंट्रोल रुम प्रभारी बार-बार होने वाली शिकायतो को सूची से ही अलग कर मामले को दबा रहा है।

इससे निगम के साफ पानी सप्लाय कराने के दावे खोखले साबित होने लगे हैं। जब कि अफसरों को पता ही नही है कि सबकुछ ठीक होने के बाद पेंच कहां फंसा हुआ है। दरअसल वह शिकायतंे अफसरों तक पहुंचती नहीं हैं, जिनका निराकरण नहीं होता है। मात्र वही शिकायतों की सूची अफसरों को दी जाती है जिनका निराकरण हो जाता है।

बार-बार फोन लगाकर परेशान करो
कंट्रोल रूम प्रभारी के बारे में सूत्रों ने बताया कि वह कहता है कि शिकायतकर्ता को बार-बार फोन लगाकर इतना परेशान करो कि वह खुद ही अपनी शिकायत कटवा ले। यदि वह फिर भी शिकायत नहीं कटवाता है तो उसकी शिकायत को अलग सूची में डाल दो, जिससे मुख्य सूची से उसकी शिकायत हट जाती है और अफसरों के देखने पर पता ही नहीं चलता है कि महीनों से शिकायत हो रही है, लेकिन उसका निराकरण नहीं किया जा रहा है।

यह सबकुछ कंट्रोल रूम प्रभारी की मंशा से होता है। इसके चलते किसी भी विभाग का कोई भी कर्मचारी प्रभारी से पंगा लेने से डरता है।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!