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निष्पक्ष जांच के लिए निलंबन जरूरी: भूमि सीमांकन में अनियमितता का आरोप, जनसुनवाई में उठा गंभीर मामला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रशासन पारदर्शिता व सुशासन की बात करता है लेकिन सांवेर तहसील से जुड़ा एक भूमि विवाद उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। 88 वर्षीय लक्ष्मीप्रसाद यादव वर्षों से अपनी जमीन...

Khulasa First

संवाददाता

24 दिसंबर 2025, 11:50 पूर्वाह्न
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निष्पक्ष जांच के लिए निलंबन जरूरी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
प्रशासन पारदर्शिता व सुशासन की बात करता है लेकिन सांवेर तहसील से जुड़ा एक भूमि विवाद उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। 88 वर्षीय लक्ष्मीप्रसाद यादव वर्षों से अपनी जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

जनसुनवाई में कलेक्टर को दिए आवेदन में उन्होंने पटवारी एवं राजस्व अमले पर मिलीभगत, गलत सीमांकन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा निष्पक्ष जांच के लिए भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों का निलंबन जरूरी है।

आवेदन में शिकायतकर्ता ने बताया 28 जून 2024 को मुख्यमंत्री ओर जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के संदर्भ में तहसीलदार सांवेर पूनम तोमर, प्रवचक अजय बाबू एवं गठित राजस्व दल ने एसडीएम को कथित रूप से गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया। प्रकरण क्र 2798/रीडर/2025, आदेश दिनांक 10 जून 2025 के अंतर्गत गठित दल ने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया।

इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर आरोप- आवेदन में तहसीलदार पूनम तोमर, प्रवचक अजय बाबू, पटवारी सुमित शर्मा, पटवारी ध्रुव गुप्ता, अरविंद परमार, पटवारी अभिनव सिंह, दो राजस्व निरीक्षक (अज्ञात) , विक्रम पिता पन्नालाल जाट, कृष्ण पिता विक्रम जाट को निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि—
पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए
खसरा नंबर 106 से तत्काल कब्जा हटाया जाए
गलत सीमांकन एवं पंचनामा को निरस्त किया जाए
दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए
उन्होंने प्रशासन को मामले की गंभीरता से अवगत कराते हुए शीघ्र न्याय की अपेक्षा जताई है।

क्या था तहसीलदार का आदेश
तहसीलदार सांवेर ने खसरा नंबर 106, रकबा 6.48 हेक्टेयर से विक्रम पिता पन्नालाल जाट का कब्जा हटाने का आदेश जारी किया था। पालन के लिए राजस्व दल गठित किया गया, जिसे एक सप्ताह में कार्रवाई पूर्ण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था।

गलत रिपोर्ट पेश करने का आरोप
आवेदन में कहा गया है कि रिपोर्ट में यह दर्शाया गया कि कब्जा हटा दिया गया है, जबकि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत थी। इससे पटवारी एवं कब्जाधारी के बीच कथित सांठगांठ की आशंका गहराती है।

पांच माह बाद भी न कार्रवाई, न सही सीमांकन
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आदेश के बावजूद न खसरा नंबर 106 से कब्जा हटाया गया न उसका विधिवत सीमांकन किया गया। इसके विपरीत पटवारी सुमित शर्मा ने कथित रूप से अतिक्रमणकर्ता से मिलीभगत कर उनकी भूमि खसरा नंबर 109/2, रकबा 0.609 हेक्टेयर का गलत सीमांकन कर दिया और उसका एक हिस्सा नाले में दिखा दिया।

पुराने वैध दस्तावेजों की अनदेखी
पंचनामा पर हस्ताक्षर से इंकार पर दबाव बनाए जाने का भी उल्लेख
वर्ष 2014 का सीमांकन
वर्ष 2017 में कब्जा हटाने का पंचनामा
फील्ड बुक एवं राजस्व अभिलेख

प्रस्तुत किए गए, लेकिन आरोप है कि इन्हें नजरअंदाज कर मनमाना पंचनामा तैयार किया गया। पंचनामा पर हस्ताक्षर करने से इंकार करने पर दबाव बनाए जाने का भी उल्लेख है।

सूचना के अधिकार में भी अधूरी जानकारी
शिकायतकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। तहसील कार्यालय द्वारा प्रस्तुत जवाब में केवल पंचनामा एवं सीमांकन का हवाला दिया गया, जबकि मूल विवाद का समाधान नहीं हुआ।

भुने चने में मिलाया जा रहा आरामाइन, चार नमूने लिए
इंदौर। भुने चने भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। इनमें आरामाइन नामक खतरनाक रसायन की मिलावट की जा रही है। सूचना पर कल खाद्य विभाग ने सियागंज की दो दुकानों से चार नमूने लिए और भोपाल लैब भेजे। शंका है कि ये चने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।
शहर में भुने चने की बिक्री बहुत होती है।

खासकर, डायबिटिज के मरीजों के लिए ये फायदेमंद होते हैं, लेकिन बिक्री बढ़ने के साथ ही इसमें भी मिलावट होने लगी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा कि भुने चने को आकर्षक रूप देने के लिए इसमें स्वास्थ्य की दृष्टि से आरामाइन नामक खतरनाक रसायन मिलाया जा रहा है, जिससे उसका रंग बदल जाता है।

प्राधिकरण ने इस संबंध में पत्र लिखा ,जिसके आधार पर इंदौर में कार्रवाई की गई।

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