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चौंकाने वाला खुलासा: लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे नाबालिग; कई लड़कियां हुईं गर्भवती

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनन मान्यता प्राप्त है, लेकिन यह सुविधा केवल व्यस्क के लिए है। इसके बावजूद शहर और आसपास के क्षेत्रों से ऐसे कई मामले सामने आए है, जिसने प्रशासन...

Khulasa First

संवाददाता

23 दिसंबर 2025, 3:41 अपराह्न
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चौंकाने वाला खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनन मान्यता प्राप्त है, लेकिन यह सुविधा केवल व्यस्क के लिए है। इसके बावजूद शहर और आसपास के क्षेत्रों से ऐसे कई मामले सामने आए है, जिसने प्रशासन से लेकर समाज तक को चौंका दिया है।

एक महीने में सामने आए 8 मामले
महिला एवं बाल विकास विभाग को इंदौर बाल विवाह रोधी उड़नदस्ता को मिली शिकायतों के बाद जब जांच शुरू की गई, तो स्थिति बेहद गंभीर निकली। महज एक महीने के भीतर 8 नाबालिग लिव-इन रिलेशनशिप के मामले सामने आए हैं।

इन मामलों में शामिल लड़के-लड़कियों की उम्र 13 से 17 साल के बीच बताई गई है।सभी नाबालिग पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे।

कई बच्चियां हुईं गर्भवती
जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिग जोड़े सामान्य रूप से नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यस्क दंपती की तरह जीवन जी रहे थे। इसी दौरान शारीरिक संबंध बने, जिसके कारण कुछ नाबालिग लड़कियां गर्भवती हो गईं।

एक मामला तब सामने आया, जब एक नाबालिग लड़की को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उड़नदस्ता विभाग को इसकी जानकारी मिली और मामला उजागर हुआ।

कौन हैं ये नाबालिग और कहां से आए?
बाल विवाह रोधी उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक के अनुसार, पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे आपस में प्रेम संबंध में थे। परिवार के विरोध के चलते घर से भागकर इंदौर आ गए।

किराए के कमरों में रहकर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। ये नाबालिग झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, राजगढ़, धार और पीथमपुर जैसे जिलों से आए थे।

लिव-इन को ही बना लिया विकल्प
काउंसलिंग के दौरान यह भी सामने आया कि सभी जोड़े शादी करना चाहते थे, लेकिन उम्र कम होने के कारण ऐसा संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने लिव-इन को ही विकल्प बना लिया।

भीख मांगकर चला रहे थे जीवन
इस दौरान कोई ऑटो गैरेज में काम कर रहा था। कोई मजदूरी कर रहा था। एक जोड़ा तो तीन इमली पुल के नीचे झोपड़ी बनाकर रहने लगा। जीवनयापन के लिए भीख मांगना भी शुरू कर दिया। गर्भवती बच्चियों को फिलहाल जीवन ज्योति आश्रम में सुरक्षित रखा गया है।

विभाग सख्त
इन गंभीर मामलों के सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष जागरूकता शिविर चलाने के निर्देश दिए हैं।

स्कूलों में शुरू किया जागरूकता कैंप
इंदौर जिले के हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां बच्चों को बताया जा रहा है कि पहले शिक्षा जरूरी है। सही उम्र में ही विवाह पर विचार करना चाहिए।

कम उम्र में शादी से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक विकास प्रभावित होता है। महेंद्र पाठक ने बताया कि “बाल विवाह में शामिल होना, आयोजन करना या यहां तक कि लिफाफा देना भी कानूनी अपराध है।”

2500 से ज्यादा छात्रों को दिलाई शपथ
अब तक इंदौर के 12 स्कूलों में कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें 2500 से अधिक बालक-बालिकाओं को न सिर्फ कानून की जानकारी दी गई, बल्कि बाल विवाह रोकने की शपथ भी दिलाई गई।

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