एसडीएम फेरबदल: सुधार या दबाव की राजनीति; इंदौर प्रशासन में हड़कंप, भ्रष्टाचार, साठगांठ और औपचारिकता के बीच जवाबदेही की बड़ी परीक्षा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं से साठगांठ के चर्चे अब दबे स्वर में नहीं, खुलेआम होने लगे हैं। आदतन गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कुछ अधिकारियों के खुलासों ने सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है। लोकायुक्त में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद महत्वपूर्ण पदस्थापनाएं सवालों के घेरे में हैं। विभागीय फेरबदल को ‘खाना पूर्ति’ बताया जा रहा है। बड़े कांडों के बाद भी अफसरों को नई जगह स्थापित कर देना प्रशासनिक संस्कृति पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव व तीन साल पूरे करने वाले अफसरों की पदस्थापना ने भी चर्चाओं को हवा दी है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता का दावा करते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने बड़ा फैसला लिया। संयुक्त कलेक्टर प्रदीप सोनी को जूनी इंदौर एसडीएम और कॉलोनी सेल के प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर देपालपुर का अनुविभागीय अधिकारी एवं दंडाधिकारी नियुक्त किया गया।
चर्चा है कि कॉलोनी सेल और जूनी इंदौर में पदस्थापना के दौरान उनके विरुद्ध कई गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच जारी है। पूर्व में भी शिकायतों के चलते उन्हें कॉलोनी सेल से हटाया गया था। दोबारा भरोसा जताने के बाद भी कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ—और शिकायतों का अंबार लग गया।
इसी फेरबदल में सांवेर में ग्रीन फील्ड कॉरिडोर और भू-अर्जन कार्य समयसीमा में पूरा करने वाले घनश्याम धनगर को पुनः जूनी इंदौर भेजा गया। संयुक्त कलेक्टर राकेश मोहन त्रिपाठी को सांवेर का नया एसडीएम बनाया गया। जिला प्रशासन ने संदेश दिया हैलापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन सवाल है क्या यह स्थायी सुधार की शुरुआत है या तात्कालिक दबाव का परिणाम?
दलाल स्ट्रीट में खलबली : कॉलोनी सेल बदला, रोशनी पाटीदार को जिम्मेदारी... कलेक्टर के प्रशासनिक कार्य विभाजन संशोधन आदेश से कॉलोनी सेल में बदलाव किया गया। नजूल जमीनों का रिकॉर्ड तैयार करने में सक्रिय रोशनी पाटीदार को प्रभार सौंपा गया। कलेक्टर कार्यालय में लाइजनिंग करने वालों की भीड़ पर अचानक ब्रेक लगा।
लंबे समय से कॉलोनी सेल में सक्रिय दलालों के नेटवर्क पर इस आदेश को ‘चाबुक’ माना जा रहा है। चर्चा यह भी रही कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यात्रा के दौरान ग्रीन रूम तैयारी में लापरवाही पर प्रदीप सोनी के खिलाफ नोटिस प्रस्तावित था, जिसे दबाव में रोका गया। अब उन्हें हटाकर प्रशासन ने स्वच्छ छवि की पहल का दावा किया है।
पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह ने नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 20(क) के तहत कुछ खसरों पर रोक लगाई थी। इनमें कनाड़िया स्थित हरियाणा हाउसिंग सोसायटी की जमीन भी शामिल थी। आरोप है कि भूमाफियाओं ने तहसीलदार को गलत जानकारी देकर उसी जमीन की नपती का आदेश निकलवा लिया।
आदेश के बाद आरआई और पटवारी मौके पर जाकर नपती कर आए। मामला सामने आते ही कलेक्टर शिवम वर्मा ने तहसीलदार प्रीति भिसे को हटाकर नजूल शाखा भेज दिया। राजस्व निरीक्षक मनीष चतुर्वेदी और पटवारी अक्षय शांडिल्य को भी अटैच किया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा—पूरे मामले की जांच होगी, दोषियों पर कार्रवाई होगी। भूमाफियाओं के खेल पर पानी फेरने की यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती का संकेत मानी जा रही है।
संभागायुक्त की ‘संतुष्टि’ पर उठे सवाल... इंदौर संभाग में रोस्टर निरीक्षण फिर सवालों में है। वर्तमान संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने राजस्व न्यायालयों का निरीक्षण किया, लेकिन खनिज, आबकारी और आदिम जाति कल्याण जैसे संवेदनशील विभाग अछूते रहे। नियम कहते हैं—एक माह पहले टीम गहन जांच करे, कमियों की सूची तैयार करे।
लेकिन इस बार निरीक्षण सीमित दायरे में सिमटा नजर आया। एडीएम रोशन राय और रिंकेश वैश्य के न्यायालय देखे गए, पर लंबित प्रकरणों और एसडीएम की अनुपलब्धता जैसे मुद्दों पर ठोस खुलासा नहीं हुआ। कलेक्टर कार्यालय का निरीक्षण हुआ, पर उसी परिसर के दो एसडीएम कार्यालयों की समीक्षा नहीं की गई।
क्या यह चूक थी या नजरअंदाजी? जिला पंचायत में संतोष व्यक्त किया गया और नगर निगम सीमा से लगी पंचायतों की सफाई व्यवस्था नगर निगम को सौंपने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। जबकि शहर के भीतर भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों ने स्वच्छता दावों की पोल पहले ही खोल दी थी।
सख्ती या सिर्फ संदेश?... इंदौर में प्रशासनिक हलचल तेज है। तबादले, नोटिस, अटैचमेंट—सब हो रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है-क्या यह स्थायी सुधार की शुरुआत है या सिर्फ संदेश देने की कवायद? जब तक विभागवार गहराई से जांच, व्यक्तिगत जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक निरीक्षण, आदेश और फेरबदल—सब कागजी सख्ती बनकर रह जाएंगे। इंदौर को औपचारिकता नहीं, वास्तविक प्रशासनिक सख्ती की जरूरत है।
राज्यपाल प्रवास में लापरवाही, रेसीडेंसी कोठी की रसोई में गंदगी, पांच अधिकारियों को नोटिस
महामहिम राज्यपाल के इंदौर प्रवास के दौरान रेसीडेंसी कोठी में रात्रि विश्राम के समय गंभीर लापरवाही सामने आई। बेडशीट बदलने के अनुरोध की अनदेखी और किचन में स्वच्छता की खराब स्थिति ने प्रशासन की किरकिरी कर दी। रात्रिकालीन ड्यूटी में संयुक्त कलेक्टर अजीत कुमार श्रीवास्तव, प्रभारी तहसीलदार चौखा लाल टांक, एमपीआरडीसी के प्रबंधक गगन भवर और श्रम निरीक्षक तृप्ति डावर मौजूद थे।
निरीक्षण में डस्टबीन खुली मिली और सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई। राज्यपाल के भोजन में काक्रोच मिलने की घटना नहीं हुई, लेकिन लापरवाही स्पष्ट थी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने व्यवस्था संभालने वाली रतन एम्पोरियम की सेवा तत्काल समाप्त करने और 20–30 प्रतिशत भुगतान काटने के निर्देश दिए।
साथ ही डिप्टी कलेक्टर सीमा कनेश मोर्य, तहसीलदार राजेश सोनी, श्रम निरीक्षक संजय पाटील, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अजय अस्थाना, सीएमएचओ और सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। राज्यपाल प्रोटोकॉल में चूक—क्या यह सिर्फ कर्मचारियों की गलती है या निगरानी तंत्र की विफलता?
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