सहारा सिटी, कुप्रबंधन का शिकार हो रहे सैकड़ों परिवार: पानी को तरसे रहवासी; सुरक्षा के नाम पर तेंदुआ और तानाशाह प्रबंधन की मनमानी से बेहाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बायपास स्थित सहारा सिटी इस समय बदहाली और कुप्रबंधन का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। यहां रहने वाले सैकड़ों परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि प्रबंधन अपनी तानाशाही से रहवासियों का शोषण कर रहा है।
कभी रखरखाव के लिए तैनात रहने वाली आठ लोगों की टीम अब सिमटकर केवल दो-तीन कर्मचारियों तक रह गई है, जिसका नेतृत्व मैनेजर अशोक कर रहे हैं। कर्मचारियों की कमी और प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर आम रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
सबसे विकराल स्थिति पानी की है। सहारा सिटी में पेयजल आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच प्रबंधन की मनमानी चरम पर है। स्थिति यह है कि रहवासी चाहकर भी निजी बोरिंग नहीं करवा सकते।
आरोप है कि मैनेजर द्वारा जानबूझकर पानी की लाइनों में ‘बुच’ लगाकर सप्लाई बाधित की जा रही है, ताकि लोग परेशान हों। हद तो तब हो जाती है, जब पानी की मोटर जलने पर उसे 10-15 दिन तक जानबूझकर ठीक नहीं कराया जाता। आर्थिक शोषण का आलम यह है कि रहवासियों के यहां आज तक व्यक्तिगत बिजली मीटर नहीं लगाए गए, बल्कि सब-मीटर के जरिये मनमाने बिल वसूलकर लोगों की जेब काटी जा रही है।
तेंदुए ने लगाई सुरक्षा में सेंध
सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहारा सिटी पूरी तरह फेल साबित हुई है। गार्डों की संख्या में भारी कटौती के चलते पूरा कैंपस असुरक्षित हो चुका है। हाल ही कैंपस के भीतर तेंदुए के प्रवेश कर जाने से यहां की सुरक्षा व्यवस्था का खुलासा हुआ था। इसके बाद से रहवासी दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, सुरक्षा में सेंध और प्रबंधन की हठधर्मी ने रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।
सहारा सिटी पर करोड़ों का टैक्स बकाया, जमीन होगी नीलाम
रसूख की आड़ में शहर के विकास का पैसा दबाए बैठे बड़े बकायादारों के खिलाफ नगर निगम ने अब ‘फाइनल वॉर’ छेड़ दिया है। अपनी खस्ताहाल माली हालत को पटरी पर लाने के लिए सबसे बड़ा शिकंजा बायपास स्थित सहारा सिटी पर कसा है। 26 करोड़ 44 लाख रुपए से अधिक का संपत्तिकर डकारकर बैठी इस कॉलोनी की 45 लाख 63 हजार वर्गफीट से ज्यादा बेशकीमती जमीन और पुरानी मल्टी को नीलाम करने का पूरा प्रकरण तैयार कर लिया गया है।
भोपाल से मिले सख्त निर्देशों के बाद निगम जोन-19 के अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई का मसौदा मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा है, जिससे अब सहारा प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। सहारा सिटी के कर्ताधर्ताओं ने निगम की आंखों में धूल झोंकने के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए, उससे अब प्रशासन का धैर्य जवाब दे गया है।
निगम अधिकारियों के मुताबिक बकाया राशि की वसूली के लिए प्रबंधन को करीब एक दर्जन बार अंतिम चेतावनी नोटिस दिए गए। हर बार नोटिस के जवाब में अधिकारियों को बड़ी राशि के चेक थमा दिए गए, लेकिन जब ये चेक बैंकों में पहुंचे तो पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गए। बार-बार चेक बाउंस होने और टालमटोल की इस नीति से तंग आकर अब निगम ने कागजी कार्रवाई के बजाय सीधे जमीन की कुर्की और नीलामी का रास्ता चुना है।इस मेगा नीलामी में सहारा सिटी की विशाल जमीन के साथ-साथ वहां स्थित एक पुरानी जर्जर इमारत भी शामिल है।
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