मिल रही चाबी: छाबड़ा घूम रहा छुट्टा; लायजनर और राजनीतिक फंडिंग बनी ढाल बॉबी की नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

महादेव मंदिर की इनामी जमीन बेचने का आरोप, अरबों की देवस्थान भूमि पर कब्जे के बावजूद प्रशासन बना मूक-बधिर
1948-49 के दस्तावेज में मंदिर के नाम दर्ज थी जमीन
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में भूमाफिया और प्रशासनिक निष्क्रियता का ऐसा मामले का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी जमीन, देवस्थान संपत्ति और राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुख्यात भूमाफिया बॉबी छाबड़ा उर्फ रणवीर सिंह छाबड़ा ने प्राचीन महादेव मंदिर की दान में मिली इनामी जमीन को कूट रचित दस्तावेजों के जरिए अपने कब्जे में लेकर उसे आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था के नाम पर बेच डाला।
इतना ही नहीं, आसपास की शेष जमीन पर भी कब्जा जमाकर कुछ हिस्से किराए पर दे दिए गए हैं, लेकिन प्रशासनिक अमले ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
खुलासा फर्स्ट द्वारा पहले भी इस मामले का खुलासा किया जा चुका है कि महू नाका चौराहे पर खुली पड़ी शासकीय जमीन पर कब्जा कर फर्नीचर दुकान संचालित की जा रही है। कब्जाई गई जमीन की सुरक्षा के लिए टीन शेड डालकर कमरा तक बना दिया गया है, लेकिन कलेक्टर से लेकर एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी तक किसी ने कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
सहकारिता विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सहकारिता विभाग के एक प्रभावशाली अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों पर जांच पर जांच की जा रही है, रिपोर्ट पर रिपोर्ट बनाई जा रही है, लेकिन किसी भी रिपोर्ट को अंतिम कार्रवाई के लिए आगे नहीं बढ़ाया जा रहा।
आरोप यह भी है कि दोषियों को बचाने के लिए लंबे समय से मोटी रिश्वत ली जाती रही है। इसी वजह से जांच की प्रक्रिया जानबूझकर लंबित रखी जा रही है। इस मामले में जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग, पुलिस और नगर निगम सहित कई विभागों के अधिकारी भी अब जांच के घेरे में आ चुके हैं, क्योंकि शिकायतकर्ता मुन्ना चौधरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर संबंधित सभी विभागों में सत्यापित दस्तावेजों के साथ कार्रवाई की मांग की है। दस्तावेजों के अनुसार यह भूमि शासकीय होकर कलेक्टर के नाम दर्ज बताई गई है।
सबूत होने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ताओं द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को इस भूमि के शासकीय होने के पुख्ता दस्तावेज तक सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद न तो बाबी छाबड़ा से जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज मांगे गए और न ही राजस्व रिकॉर्ड की गंभीर जांच की गई।
जब भी कलेक्टर शिवम वर्मा से महादेव मंदिर देवस्थान भूमि के मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा जाता है तो वे जांच और कार्रवाई का आश्वासन दे देते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जांच किस अधिकारी को सौंपी गई और उसकी स्थिति क्या है।
एडीएम स्तर पर भी यही स्थिति बनी हुई है। अधिकारी लगातार अनुविभागीय अधिकारी को जांच सौंपने की बात कहते रहे, जबकि एसडीएम विभागीय अभियानों में व्यस्त होने का हवाला देते रहे और बाद में स्वास्थ्य लाभ के लिए अवकाश पर चले गए। जबकि अनुभाग में गंभीर लापरवाही के चर्चे आम है।
फर्जी दस्तावेजों से हड़पी हजारों प्लॉट की जमीन
आरोप है कि बॉबी छाबड़ा ने करीब 14 से 20 हाउसिंग सोसायटियों-जैसे श्रीराम नगर, जागृति और नवभारत गृह निर्माण संस्था-के हजारों सदस्यों के प्लॉट फर्जी दस्तावेजों और हेरफेर के जरिए हड़प लिए। इंदौर नगर निगम ने उसके अवैध रूप से बने “घूंघट” और “रिदम” गार्डन जैसे निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की थी।
इसके अलावा शहर के खालसा कॉलेज और कई धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं में भी लंबे समय तक उसका प्रभाव बना रहा। हालांकि 2021 में सहकारिता विभाग द्वारा कुछ मामलों में उसे क्लीन चिट मिलने की खबरें सामने आई थीं, जिस पर प्रशासन ने नाराजगी भी जताई थी।
650 साल पुराने देवस्थान की जमीन पर कब्जे का आरोप
पुराने आरटीओ के पास प्राचीन महादेव मंदिर की शासकीय एवं देवस्थान भूमि को लेकर जो खुलासा हुआ है, उसने प्रशासनिक तंत्र और धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मंदिर के नाम दर्ज लगभग 35 एकड़ इनामी भूमि को निजी नामों पर चढ़ाकर कॉलोनाइजरों को बेच दिया गया।
महू नाका चौराहे पर त्रिकोणा जमीन का एक हिस्सा पुराने आरटीओ रोड से पेट्रोल पंप तक मुख्य सड़क से सटा हुआ है, जहां फर्नीचर की दुकान चल रही है। यहां चौकीदार के लिए टीन शेड बना दिया गया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन महादेव मंदिर के नाम दर्ज है, लेकिन दुकान संचालक का दावा है कि जमीन बॉबी छाबड़ा की है।
बताया जा रहा है कि यह देवस्थान लगभग 650 से 675 वर्ष पुराना है और पेशवा काल में भी भूमि मंदिर के नाम दर्ज थी। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह ऐतिहासिक और इनामी भूमि थी तो उसका बंटांकन, नामांतरण और निजी विक्रय किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया।
मौजा कस्बा इंदौर, रियासत इंदौर के सन 1356 फसली (1948-49) के नकल खसरा दस्तावेज सामने आए हैं, जो होलकर स्टेट दरबार के स्टांप पर सत्यापित बताए जाते हैं। इन दस्तावेजों में भूमि स्पष्ट रूप से ‘श्री महादेव मंदिर चन्द्रहास्य देवस्थल’ के नाम दर्ज है। बताया जाता है कि 1915 के पहले यह भूमि तालाब और घुड़दौड़ के उपयोग में थी, जिसे बाद में पूजा-पाठ के लिए दान कर दिया गया।
मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड के अनुसार मंदिर के नाम लगभग 35 एकड़ भूमि दर्ज थी, लेकिन आज वही देवस्थान महज 10×20 फुट के छोटे से हिस्से में सिमटकर रह गया है। बताए जा रहे खसरा नंबर 1458 से 1468 तक देवस्थान की इनामी भूमि थे। आरोप है कि नजूल विभाग और कॉलोनाइजर बॉबी छाबड़ा की मिलीभगत से इन खसरों में हेरफेर कर निजी नाम दर्ज कर दिए गए।
शिकायतकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
सुदामा नगर निवासी मुन्ना उर्फ लीलाधर चौधरी ने रणवीर उर्फ बॉबी छाबड़ा, तहसीलदार, पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने वर्ष 2019 से 2025 के बीच कई बार एसडीएम, कलेक्टर और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि करीब 35 एकड़ देवस्थान और शासकीय भूमि की वर्तमान बाजार कीमत 30 से 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट तक है, जिससे यह पूरा घोटाला अरबों रुपये का हो सकता है।
बॉबी छाबड़ा पर अनेक आरोप होने के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
50 लाख रिश्वत लेकर नामांतरण का आरोप
आरोप है कि जब आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था के नाम पर भूमि दर्ज की गई, तब लगभग 50 लाख रुपये की रिश्वत ली गई। 15 जुलाई 1987 के एक शपथपत्र के अनुसार चन्द्रहास पिता गुरु सच्चिदानंद अवस्थी द्वारा विभिन्न सर्वे नंबरों की भूमि 3 जून 1980 को संस्था को बेचने का अनुबंध किया गया था।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन मंदिर की थी तो कोई व्यक्ति उसे निजी तौर पर बेच कैसे सकता था। चन्द्रहास सच्चिदानंद की आयु और उस समय की ऐतिहासिक परिस्थितियों को लेकर भी गंभीर संदेह व्यक्त किए जा रहे हैं।
कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज
भंवरकुआं थाना पुलिस ने बॉबी छाबड़ा, सतबीर सिंह और संदीप रमानी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। छापेमारी में करीब 20 सहकारी हाउसिंग संस्थाओं के रिकॉर्ड जब्त किए गए थे। रावजी बाजार थाने में भी फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के मामले दर्ज हुए। इसके बावजूद भूमि पर अवैध कॉलोनियां और बहुमंजिला भवन खड़े हो चुके हैं।
अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास
कलेक्टर शिवम वर्मा ने जांच का आश्वासन दिया है। एडीएम रौशन राय का कहना है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं राऊ एसडीएम गोपाल वर्मा एसआईआर पूर्ण होने के बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं। अधिकारियों के अलग-अलग बयान यह संकेत देते हैं कि मामला साधारण नहीं है और कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही या दबाव की स्थिति बनी हुई है।
शिवराज सरकार में हो चुकी है कार्रवाई
बॉबी छाबड़ा शिवराज सरकार के समय भी जेल जा चुका है। वह चर्चित रियल एस्टेट डेवलपर है जिसे भूमाफिया के रूप में चिन्हित किया गया है। उसके खिलाफ खजराना, कनाड़िया, भंवरकुआं और रावजी बाजार जैसे कई थानों में धोखाधड़ी, जमीन हड़पने और जालसाजी के मामले दर्ज हैं। वर्ष 2020 में क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार किया था।
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