धार सहित चार मेडिकल कॉलेज एक ही अनुभवहीन फाउंडेशन को सौंपने पर उठे सवाल: प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
खुलासा फर्स्ट, भोपाल । प्रदेश सरकार द्वारा धार, बैतूल, कटनी और पन्ना जिलों में चार नए मेडिकल कॉलेजों को पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित करने के निर्णय पर राजनीतिक और सामाजिक...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
प्रदेश सरकार द्वारा धार, बैतूल, कटनी और पन्ना जिलों में चार नए मेडिकल कॉलेजों को पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित करने के निर्णय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
इन सभी मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी एक ही निजी संस्था- स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन को सौंपे जाने को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। कांग्रेस के पूर्व महासचिव राकेश सिंह यादव ने इसे जनस्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा के साथ खतरनाक प्रयोग बताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
राकेश सिंह यादव का कहना है कि मेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील और उच्च मानकों वाले क्षेत्र में एक नवगठित और अनुभवहीन फाउंडेशन को एक साथ चार मेडिकल कॉलेज सौंपना नीतिगत रूप से भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पीपीपी मॉडल की आड़ में ऐसे प्रयोग कर रही है, जिनका खामियाजा छात्रों और आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।
स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन का पंजीकरण 22 जुलाई 2025 को भोपाल के हुजूर क्षेत्र में हुआ है। सार्वजनिक रिकॉर्ड में प्रमाण नहीं है कि फाउंडेशन ने कभी स्कूल, कॉलेज या मेडिकल कॉलेज का संचालन किया हो। न ही इसके पास किसी एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) मान्यता प्राप्त संस्थान का अनुभव है, न कोई पास-आउट बैच और न ही टीचिंग हॉस्पिटल संचालन का पूर्व रिकॉर्ड। इसके बावजूद सरकार द्वारा चार जिलों- धार, बैतूल, कटनी और पन्न- में मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी इसी एक फाउंडेशन को दिए जाने की योजना कई प्रश्न खड़े करती है।
260 करोड़ रुपए नौसिखिया संस्था के भरोसे दांव पर लगा रहे
राकेश सिंह यादव ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार आखिर क्यों 25 एकड़ जमीन मात्र एक रुपये की लीज पर और लगभग 260 करोड़ रुपये की सार्वजनिक राशि एक नौसिखिया संस्था के भरोसे दांव पर लगा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं आदिवासी और पिछड़े जिलों को असफल प्रयोगों की प्रयोगशाला तो नहीं बनाया जा रहा।
उन्होंने देश के अन्य राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में PPP मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेजों के प्रयोग पहले ही विफल साबित हो चुके हैं, जहां अनुभवहीन निजी भागीदारों के कारण एनएमसी निरीक्षण में कॉलेज फेल हुए और छात्रों का भविष्य संकट में पड़ा। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की है कि चारों मेडिकल कॉलेजों से जुड़े पीपीपी अनुबंध सार्वजनिक किए जाएं व फाउंडेशन की वित्तीय क्षमता और संचालन योजना पर श्वेत पत्र जारी किया जाए।
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