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युवती के आत्महत्या मामले में पुलिस कमिश्नर तलब: हाई कोर्ट ने दिया 12 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । युवती की आत्महत्या के एक गंभीर मामले में हाई कोर्ट ने आजाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए...

Khulasa First

संवाददाता

25 दिसंबर 2025, 11:00 पूर्वाह्न
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युवती के आत्महत्या मामले में पुलिस कमिश्नर तलब

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
युवती की आत्महत्या के एक गंभीर मामले में हाई कोर्ट ने आजाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए पुलिस कमिश्नर को 12 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त आदेश पारित किया।

मामला आजाद नगर थाना क्षेत्र का है, जहां प्रेमी विकास द्वारा शादी से इनकार किए जाने पर एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई कि पुलिस द्वारा आरोपी का मोबाइल जब्त नहीं किया गया, जबकि चैट जांच का अहम आधार थी। साथ ही आरोपी के माता-पिता को प्रकरण में आरोपी नहीं बनाया, जबकि आरोप सीधे तौर पर उनसे जुड़े बताए गए।

50 लाख की मांग, माता-पिता के बयान
मृतका के माता-पिता ने बताया उनकी बेटी दो वर्षों से आरोपी के साथ रिश्ते में थी। शादी की बात लेकर वे आरोपी के घर पहुंचे तो 50 लाख रुपए की मांग रखी गई और यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि आरोपी के कई लड़कियों से संबंध हैं। इसी अपमान और मानसिक आघात के बाद युवती ने यह कदम उठाया।

मृतका पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव, संतोष यादव और करण बैरागी ने कोर्ट को बताया पुलिस ने आरोपी को बचाने के इरादे से जांच को कमजोर किया, मोबाइल जब्त नहीं किया और माता-पिता को बचाया। इन बातों को कोर्ट ने गंभीरता से लिया।

कोर्ट की फटकार, अंतरिम जमानत और अगली तारीख
कोर्ट ने जांच अधिकारी को पहले ही तलब किया था। जमानत पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया और बाद में आरोपी व मृतका के बीच चैट के आधार पर आरोपी को 12 जनवरी 2026 तक अंतरिम जमानत दी गई। साथ ही अगली सुनवाई 12 जनवरी तय करते हुए पुलिस कमिश्नर इंदौर की अनिवार्य उपस्थिति का आदेश दिया। इसमें हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आजाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवमानना के दायरे में आती है।

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