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अपने कर्मचारी के ही प्लॉट खा गया संस्थाध्यक्ष: मामला गोवर्धन पैलेस कॉलोनी का; पांच में से तीन बेच खाए और दो पर भी डाला अड़ंगा

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 मार्च 2026, 5:21 pm
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अपने कर्मचारी के ही प्लॉट खा गया संस्थाध्यक्ष

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाउसिंग सोसायटी केवल सदस्यों के साथ ही धोखाधड़ी नहीं करती, अपने कर्मचारी के प्लॉट भी खा जाती है। एक संस्था ने अपने कर्मचारी व उसके रिश्तेदारों को पांच प्लॉट आवंटित किए और बाद में कर्मचारी को झूठे मामले में जेल पहुंचाकर तीन प्लॉट फर्जी नोटरी करवाकर बेच खाए। बचे दो प्लॉट पर भी संस्थाध्यक्ष की टेढ़ी नजर है, जिन्हें वह हड़पने की कोशिश कर रहा है। कर्मचारी को अन्यत्र मकान और पानी का प्लांट डलवाने का झांसा दिया, लेकिन न प्लॉट दे रहा और न मकान दिलवा रहा।

मामला चंदन नगर रोड पर सिरपुर के सामने गोवर्धन पैलेस कॉलोनी का है, जो एरोड्रम रोड पर बीएसएफ की बाउंड्री के पीछे स्थित है। ये कॉलोनी युग चेतना गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमावत ने काटी थी, जबकि मनोज राठौर संस्था कार्यालय में ही कर्मचारी थे।

उन्होंने वर्ष 2006 में कुमावत से 5 प्लॉट (प्रत्येक की कीमत 32 हजार रुपए) लिए थे और एक ही दिन नकद राशि भुगतान की थी। इस राशि की रसीदें भी कुमावत ने दीं। उसने प्लॉट क्र. 99, 101, 102 और 103 आवंटित किए थे। प्लॉट क्र. 101 दो प्लॉटों का संयुक्तीकरण करके बना था, लेकिन उसने प्लॉटों पर कब्जा नहीं दिया था।

संस्था की स्थिति ऐसी थी कि कुमावत नाम का ही अध्यक्ष था, जबकि सारा कामकाज धीरज दुबे देखता था। दुबे ने अपनी संस्था के ही कर्मचारी मनोज राठौर को प्लॉट न देने की साजिश रची और उन्हे 2012 मेंं गांजा तस्करी के झूठे आरोप में जेल पहुंचा दिया।

वे 20 माह जेल में रहे। जेल जाने के पूर्व कुमावत ने किसी अनहोनी की आशंका में उन्हें संस्था का रजिस्टर दे दिया था, ताकि वो संभालकर रख सकें। गिरफ्तारी के वक्त उनके पास पांचों प्लॉट के कागजात थे, जो थाने में जमा हो गए।

जब वह जेल से छूटकर आए तो पता चला कि सुनील कुमावत ने रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी लगा ली और अब संस्था का अध्यक्ष धीरज दुबे हो गया है। ये भी पता चला कि दुबे ने राठौर द्वारा लिए गए पांच में से तीन प्लॉट, जो उनकी सास, साले, बड़सास और अन्य रिश्तेदारों के नाम थे, फर्जी नोटरी के आधार पर बेच खाए।

इसमें उसकी पत्नी गायत्री दुबे ने फर्जी साइन किए। विरोध करने पर दुबे ने उन्हें बुलाया और तीन प्लॉटों के पैसे लौटा दिए। इसके अलावा दुबे ने ये भरोसा भी दिया कि वो राठौर को कहीं और मकान दिला देगा और पानी का संयंत्र भी लगवाएगा, लेकिन उसने ये दोनों वादे पूरे नहीं किए।

जब उससे बात की तो धमकाना शुरू कर दिया। फिर उसने बचे दो प्लॉटों के कागजात भी मांगने शुरू कर दिए। इसकी शिकायत अन्नपूर्णा थाने में की, जहां उसने फर्जी नोटरी पेश की, जिस पर मनोज राठौर की पत्नी संतोष के फर्जी हस्ताक्षर थे।

पीड़ित राठौर ने सीएम हेल्पलाइन, कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, चंदन नगर थाना समेत विभिन्न स्थानों पर इसकी शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान दुबे ने अन्नपूर्णा थाने में जो फर्जी नोटरी पेश की थी, उसकी कॉपी राठौर को देते हुए ये सलाह देकर रवाना कर दिया गया कि आप कोर्ट जाओ। राठौर का आरोप है कि दुबे के इशारे पर संस्था सदस्य कमल संदवाने ने जान से मारने की धमकी दी।

फर्जी सदस्यों को दे दिए प्लॉट
दुबे ने एक और जादूगरी की। उसने 16 ऐसे लोगों को संस्था की गोवर्धन पैलेस कॉलोनी के प्लॉट अलॉट कर दिए, जो संस्था के सदस्य ही नहीं हैं। इसके अलावा 500-500 रुपए जमा करने वाले 130 लोग ऐसे हैं, जिन्हें प्लॉट दे दिए गए, जबकि वे भी संस्था के सदस्य नहीं हैं। दुबे यहीं नहीं रुका, उसने 17 ऐसे लोगों को फ्लैट अलॉट कर दिए, जो संस्था के सदस्य नहीं, जबकि कॉलोनी में कोई मल्टी ही नहीं है। सवाल ये है कि जब कोई मल्टी नहीं तो फ्लैट कहां से आए?

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