करोड़ों के स्टांप घोटाले में नया मोड़: हाईकोर्ट ने हटाई ट्रांसफर पर रोक; एफआईआर पर राहत जारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के चर्चित 13.32 करोड़ रुपए के स्टांप शुल्क घोटाले में हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने तत्कालीन वरिष्ठ पंजीयक डॉ. अमरीश नायडू के ट्रांसफर पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। हालांकि, एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर मिली राहत अभी भी बरकरार है। इस फैसले के बाद नायडू का रतलाम तबादला अब प्रभावी हो गया है, जबकि मामले की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।
क्या है पूरा घोटाला
यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि इंदौर में डीएलएफ गार्डन सिटी कॉलोनी के प्लॉट की रजिस्ट्री में हेरफेर कर कॉलोनी का नाम हटाकर उसे मांगलिया गांव रोड दिखाया गया। इस गड़बड़ी से शासन को करीब 13 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपए के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इस मामले में डॉ. अमरीश नायडू, सब रजिस्ट्रार संजय सिंह सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
ट्रांसफर को लेकर क्यों पहुंचे कोर्ट
घोटाले के सामने आने के बाद शासन ने डॉ. नायडू का तबादला इंदौर से रतलाम कर दिया था। नायडू ने इस ट्रांसफर और एफआईआर दोनों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पहले चरण में कोर्ट ने उनके ट्रांसफर पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे वे राहत में थे।
सुनवाई में क्या हुआ
17 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिका का मुख्य उद्देश्य एफआईआर को चुनौती देना था, लेकिन उसमें ट्रांसफर को भी जोड़ दिया गया, जबकि संबंधित विभाग को पक्षकार नहीं बनाया गया। ऐसे में ट्रांसफर पर रोक देना उचित नहीं था। वहीं, नायडू की ओर से दलील दी गई कि अदालत ने शुरुआती स्तर पर परिस्थितियों को देखते हुए ही राहत दी थी और बाद में जरूरी संशोधन के लिए आवेदन भी किए गए।
हाईकोर्ट का साफ रुख
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि याचिका का मुख्य मुद्दा एफआईआर है। ट्रांसफर आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी गई। संबंधित विभाग को पक्षकार नहीं बनाया गया और ट्रांसफर पर रोक के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने पहले दिए गए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रांसफर पर रोक लगाई गई थी।
क्या राहत अभी भी बाकी
हाईकोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर को लेकर दी गई अंतरिम राहत फिलहाल जारी रहेगी। यानी इस हिस्से में डॉ. नायडू को अभी भी राहत मिली हुई है और जांच/कार्रवाई पर अंतिम फैसला बाकी है।
अन्य आवेदनों पर भी असर
कोर्ट ने इस दौरान संशोधन से जुड़े सभी आवेदन भी खारिज कर दिए, जिससे याचिका का दायरा सीमित हो गया है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। तब तक ट्रांसफर आदेश लागू रहेगा और एफआईआर से जुड़ी अंतरिम राहत जारी रहेगी।
क्यों अहम है यह फैसला
इस हाई-प्रोफाइल स्टांप घोटाले में कोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक कार्रवाई को मजबूती देता है, वहीं एफआईआर की वैधता पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। ऐसे में आने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
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