नव गति-नव लय ताल-छंद-नव: सु-स्वागतम, हिंदू नववर्ष, वंदन-अभिनंदन
KHULASA FIRST
संवाददाता

सबके लिए सुख-शांति, समृद्धि लेकर आया नूतन संवत्सर 2083
घर-आंगन द्वार-दहलीज पर पुराए मंगल चोक, गुड़ी संग लहराई भगवा पताकाएं
कुमकुम भरे कदमों के संग देवी भगवती की भी अगवानी, चैत्र नवरात्र का शुभारंभ
भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य के साथ हुआ इंदौर में नए साल का शुभारंभ
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
कंठ, नव जलद-मन्द्ररव।
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !!
महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की इन पंक्तियों की तरह ही हमें अपने जीवन में नई सोच, नई उमंग और नए उत्साह के साथ नवसंवत में आगे बढ़ना है। इन्हीं मंगलकामनाओं के संग हे, नूतन संवत्सर 2083... आपका सुस्वागतम, वंदन-अभिनंदन। आपका आगमन समूची सृष्टि के लिए मंगलमय हो। समूची वसुंधरा धन-धान्य से परिपूर्ण हो।
प्रकृति हरी-भरी हो, हर घर-आंगन में खुशियां बरसें, जन-मन स्वस्थ रहें, आदि व्याधि से मुक्त हों, राष्ट्र वैभवशाली हो, मातृभूमि बलशाली हो, नेतृत्व निर्भीक हो और नागरिक कर्तव्यनिष्ठ, सभी जाति-पंथ-धर्म के बीच परस्पर प्रेम प्रगाढ़ हो, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ ही नूतन संवत्सर आपका वंदन, अभिनंदन।
सुबह से ही शहर के हर प्रमुख चौराहों पर नूतन वर्ष का स्वागत किया गया। मुख्य कार्यक्रम राजवाड़ा पर हुआ। देवी अहिल्या के आंगन की आज की भोर अनुपम व अद्भुत हुई। इसके बाद बड़ा गणपति चौराहे पर नए वर्ष का बड़ा उत्सव मना।
महू नाका, चाणक्यपुरी, छावनी, मालवा मिल आदि जगहों पर भी सूर्य भगवान की अर्घ्य देकर नए साल का अभिनंदन किया गया। जगह-जगह गुड़ धनिये का ही नहीं, श्रीखंड का प्रसाद भी वितरित हुआ। घर-घर पूरनपोली की मिठास भी महकी। नीम की कोमल पत्तियों ने भी प्रसाद में स्थान पाया।
चेटीचंड आज, छत्रीबाग से निकलेगी शोभायात्रा
आज ही सिंधी समाज का भी सबसे बड़ा दिन व पर्व है। चेटीचंड त्योहार की खुशियां समाजजन के बीच समा गई हैं। आज शाम भगवान झूलेलाल का पूजन व अभिषेक होगा। शाम को अखंड ज्योत मंदिर, छत्रीबाग से भव्य शोभायात्रा निकलेगी। ये यात्रा नगर भ्रमण करेगी। सैकड़ों मंचों से स्वागत होगा।
चैत्र नवरात्र का हुआ शुभारंभ
नूतन संवत्सर के संग भगवती जगदंबा का आगमन भी हो गया है। चैत्र के नवरात्र आ गए हैं। कुमकुम भरे कदमों के संग देवी का घर-घर आगमन हो गया है। देवी मां ने आते ही हर घर आंगन में सौभाग्य का वरदान दिया है। घर-घर घट स्थापित हो गए हैं। जवारे सिंचित कर दिए गए हैं।
देवी मंदिरों के शिखरों पर नूतन ध्वजा लहरा गई है। सप्तशती के स्वर वातावरण में गूंजने लगे हैं। देवी मंदिर जगमग हो उठे हैं। देवी भक्त, धूप की परवाह किए बगैर, नंगे कदम आपकी भक्ति में लीन हो चले हैं। बिजासन व अन्नपूर्णा माता मंदिर में अलसुबह से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
सबके लिए अनुपम सौगात लेकर आया नवसंवत्सर
हे, नूतन संवत्सर। आप अपने साथ कितनी अनुपम सौगातें लेकर आते हैं। आप आते हैं तो इस सनातन राष्ट्र का विक्रम संवत् भी पुनः प्रतिष्ठित हो जाता है। गुड़ी पड़वा का पर्व साथ आता है और आती है चैत्र की नवरात्रि। बन-ठन गणगौर भी आपके संग-संग आती हैं। ब्रह्मा ने इस सकल सृष्टि का निर्माण भी आज किया था और सतयुग का आगाज भी आज के ही दिन से हुआ।
वर्ष प्रतिपदा के साथ अनेकानेक शुभ मंगल कारज का भी शंखनाद हो जाता है। इस बार राजा व मंत्री दोनों ही भगवान सूर्यनारायण हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। पिछली बार ये जोड़ी मंगल व शनि देवता की थी। नवसंवत, आप सबका शुभ मंगल करना। ये ही आपसे करबद्ध प्रार्थना।
नव शृंगारित प्रकृति ने किया नूतन संवत्सर का स्वागत
नूतन संवत्सर आया तो समूची प्रकृति ने नवशृंगार कर स्वागत किया। राह में नूतन पुष्प-पल्लव बिछ गए हैं। खेत-खलिहानों में गेहूं सोने सी आभा के संग दमक रहे हैं। नीम की कोमल कपोलों की गंध-सुगंध महक रही है। सुवासित-सुगंधित बयार बह रही है। घर-आंगन, द्वार-दहलीज पर चौक बन गए हैं।
गेरू-खड़िया के सुंदर मांडने उकेरे गए हैं। दहलीज हल्दी कुमकुम से लीपी गई है, अक्षत बिखेर दिए गए हैं। मुंडेर, अटारी और छज्जन पर गुड़ी बंध गई है। भगवा पताकाएं लहरा गई हैं। चहुंओर मंगल गान गूंज रहे हैं। सुहागिनों का भाग-सुहाग सज संवर गया है और पूजन अर्चन हो रहा है। बाल गोपालों ने भी नूतन परिधान धारण किए हैं। चौराहे-चौराहे पर गुड़-धनिया-धानी संग मुंह मीठे हो रहे हैं। नीम की कोमल पत्ती और मिश्री मुंह में वर्षभर की स्वस्थता की मिठास घोल रही है।
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