नर्मदा लाइन के पाइप जले जिम्मेदारी से भागे अफसर: दो स्कूलों के पास लगी आग, जहरीले धुएं से हड़कंप; 100 से ज्यादा पाइप खाक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । महू नाका चौराहा पर मूकबधिर विद्यालय व सराफा विद्या निकेतन के पास खुले मैदान में रखे नर्मदा लाइन के प्लास्टिक पाइपों में मंगलवार को भीषण आग लग गई, जिसने विकराल रूप ले लिया।...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महू नाका चौराहा पर मूकबधिर विद्यालय व सराफा विद्या निकेतन के पास खुले मैदान में रखे नर्मदा लाइन के प्लास्टिक पाइपों में मंगलवार को भीषण आग लग गई, जिसने विकराल रूप ले लिया। नर्मदा परियोजना के नाम पर वर्षों से लावारिस हालत में पड़े पाइपों ने एक बार फिर सरकारी लापरवाही का खुलासा कर दिया।
जहरीले धुएं से आसपास रहने वाले रहवासी, व्यापारी और स्कूल स्टाफ दहशत में आ गए, जबकि करोड़ों की सामग्री जलने के बाद भी न नगर निगम, न नर्मदा विभाग और न ही ठेकेदार जिम्मेदारी लेने मौके पर पहुंचा।
फायर ब्रिगेड के मुताबिक, मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे नर्मदा पाइपलाइन के लिए रखे गए बड़े प्लास्टिक पाइपों के ढेर में अचानक आग भड़क उठी। आग इतनी भयावह थी कि करीब एक किलोमीटर दूर तक काले धुएं का गुबार दिखाई देता रहा। जहरीले धुएं के कारण आसपास के घरों और दुकानों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने खिड़की-दरवाजे बंद कर घरों में कैद हो गए।
गनीमत रही कि घटना के वक्त दोनों स्कूलों में छुट्टी का समय था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फायर ब्रिगेड के सब इंस्पेक्टर संतोष दुबे ने बताया कि मैदान में नर्मदा लाइन बिछाने के लिए रखे पाइपों में आग लगी थी।
आशंका है कि किसी नशेड़ी द्वारा कचरे में आग लगाने या पास में जल रही आग की चपेट में आने से पाइपों ने आग पकड़ ली। इस घटना में 100 से अधिक प्लास्टिक पाइप पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
ठेकेदार ने छोड़ा काम, अफसर बने अनजान
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस इलाके में नर्मदा पाइपलाइन डालने का काम चल रहा था, लेकिन लंबे समय से ठेकेदार ने पाइप मैदान में यूं ही पटक रखे थे। न सुरक्षा इंतजाम, न ही निगरानी। ख़ास बात यह कि घटना के बाद भी नगर निगम, नर्मदा विभाग या संबंधित ठेकेदार का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
फायर ब्रिगेड ने जब पाइपों की जानकारी के लिए सराफा विद्या निकेतन स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की, तो उन्होंने मालिकाना हक को लेकर इंकार कर दिया। जिम्मेदारों के सामने न आने पर फायर ब्रिगेड को अज्ञात के नाम पंचनामा बनाकर रिपोर्ट तैयार करनी पड़ी।
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