इंदौर का ‘सतपुड़ा परिसर’ बना सरकारी छलावा
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल; हितग्राहियों की जेबें खाली, बैंक की किस्तें जारी, पर आशियाने का सपना अधूरा, 2022 से अटका निर्माण, गरीबों के साथ क्रूर मजाक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बड़ा बांगड़दा स्थित सतपुड़ा परिसर सरकारी तंत्र की नाकामी और प्रशासनिक अनदेखी का प्रतीक बन चुका है। सबको आवास का नारा यहां पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बुक करने वाले हितग्राही आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। साल 2022 में सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर जिन परिवारों से उनकी गाढ़ी कमाई और बैंक लोन की राशि ऐंठ ली गई, आज वे दाने-दाने को मोहताज होकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रियंका वर्मा, भावेश बुंदेले, सुभाष, अर्जुन, अशोक, राजेश जैसे दर्जनों पीड़ितों की जिंदगी अब बैंक की किस्तों और किराए के दोहरे बोझ तले दबकर रह गई है।
यहां फ्लैट्स के नाम पर केवल अधूरे स्ट्रक्चर खड़े हैं, जिनमें रहने लायक कोई बुनियादी सुविधा विकसित नहीं की गई। हितग्राहियों का गंभीर आरोप है कि बैंक से लोन की राशि तो जारी कर दी गई और उनकी जेब से हर महीने ब्याज समेत किस्तें भी काटी जा रही हैं, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य बरसों से ठप है। जब भी पीड़ित परिवार अपने हक की बात करने जिम्मेदार अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें केवल कागजी आश्वासन थमाकर चलता कर दिया जाता है।
यह सीधा-सीधा गरीब जनता की भावनाओं और उनकी मेहनत की कमाई के साथ किया गया व्यवस्थागत प्रहार है। एक तरफ शासन-प्रशासन आवास योजनाओं की सफलता का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर सतपुड़ा परिसर के पीड़ित भारी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं।
जिला कलेक्टर कार्यालय में सौंपी गई अपनी शिकायत में हितग्राहियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब इस व्यवस्था की सुस्ती को और बर्दाश्त नहीं करेंगे। सवाल यह उठता है कि आखिर इस धोखाधड़ी का असली जिम्मेदार कौन है और प्रशासन कब तक मौन रहकर इस बदहाली को देखता रहेगा?
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