किस ज्योतिर्लिंग में वीआईपी दर्शन पर रोक से देश की सबसे बड़ी अदालत का इंकार: किसने कहा- ऐसे लोग असली श्रद्धालु नहीं होते, बल्कि उनका उद्देश्य कुछ और
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भेदभाव का आरोप लगाने वाली उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने और सभी के लिए बराबर अवसर की मांग की गई थी।
बेंच की यह टिप्पणी
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिका दायर करने वाले असली श्रद्धालु नहीं होते हैं, बल्कि उनका उद्देश्य कुछ और होता है।
ऐसे विषयों में हस्तक्षेप नहीं
देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि ऐसे विषयों पर गाइडलाइंस या नीति बनाना उसका काम नहीं है।
ऐसे लोग असली श्रद्धालु
दर्पन अवस्थी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिका लगाने वाले असली श्रद्धालु नहीं होते।
इन लोगों का उद्देश्य कुछ और
सीजेआई ने हम आगे इस पर बोलना नहीं चाहते हैं। इन लोगों का उद्देश्य कुछ और होता है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह फैसला करने का काम कोर्ट का नहीं है।
दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज
सीजेआई ने कहा कि हम न्यायिक प्रक्रिया के लिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और याची को सरकार और प्रशासन के सामने आवदेन लगाने की अनुमति दी।
इंदौर हाईकोर्ट का फैसला लागू रहेगा
इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट का फैसला महाकाल मंदिर समिति पर लागू रहेगा। इसमें उज्जैन कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे तय करें कि कौन वीआईपी है और कौन नहीं।
बंद है अभी गर्भगृह
दरअसल, 4 जुलाई 2023 को सावन माह के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 11 सितंबर 2023 तक बंद कर दिया गया था।मंदिर समिति ने कहा था कि सावन माह के बाद गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद भी अभी महाकाल गर्भगृह खुला नहीं है।
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