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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर अब इतने हफ्ते का मातृत्व अवकाश; पितृत्व अवकाश पर कही ये बात

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 मार्च 2026, 3:56 pm
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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने की शर्त उचित नहीं है और इसे असंवैधानिक माना गया है।

जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस महादेवन की बेंच सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने धारा 60(4) के उस प्रावधान को रद्द कर दिया, जिसमें गोद लेने पर मातृत्व अवकाश के लिए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम होना आवश्यक था।

यह याचिका हमसानंदिनी नंदूरी ने दायर की थी। उनका कहना था कि उम्र के आधार पर छुट्टी देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है और यह भेदभावपूर्ण है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि पितृत्व अवकाश (पिता के लिए छुट्टी) को भी कानून में शामिल किया जाए। अदालत ने सुझाव दिया कि इसकी अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरतों के अनुसार तय की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे के शुरुआती विकास में माता और पिता दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोद लेने वाली मां को केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे तक सीमित रखना गलत है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 2017 में याचिकाकर्ता ने दो बच्चों को गोद लिया था, लेकिन उस समय उन्हें केवल 6-6 हफ्ते का अवकाश मिला था, क्योंकि बच्चे 3 महीने से अधिक उम्र के थे। इसके बाद 2021 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने 17 मार्च 2026 को 3 महीने की आयु सीमा वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया।

भारत में अभी पितृत्व अवकाश को कानूनन अनिवार्य मान्यता नहीं मिली है। महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश के तहत पहले दो बच्चों तक 26 हफ्ते का वेतन सहित अवकाश मिलता है, जबकि दो से अधिक बच्चों की स्थिति में 12 हफ्ते का अवकाश प्रावधान है। इनमें से कुछ अवधि डिलीवरी से पहले ली जा सकती है।

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