फर्जी दस्तावेजों से काट दी गई अवैध कॉलोनियां: देवस्थान और शासकीय भूमि का निजी तौर पर नामांतरण
महादेव मंदिर की सैकड़ों एकड़ जमीन पर भूमाफिया व अफसरों की साठगांठ का खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शिवभक्त देवी अहिल्याबाई की नगरी इंदौर स्थित महादेव मंदिर की दान में दी गई भूमि पर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ...
Khulasa First
संवाददाता

महादेव मंदिर की सैकड़ों एकड़ जमीन पर भूमाफिया व अफसरों की साठगांठ का
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शिवभक्त देवी अहिल्याबाई की नगरी इंदौर स्थित महादेव मंदिर की दान में दी गई भूमि पर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि मंदिर की भूमि को पुजारी परिवार और भूमाफियाओं ने मिलकर बेच दिया, जबकि यह देवस्थान और शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज थी। ऐसे में ये सवाल प्रमुखता से उठ रहे हैं कि आखिर भूमि का बटांकन कैसे हुआ, निजी नामों पर नामांतरण कैसे किया गया और किसी भी राजस्व अधिकारी को पुराने रिकॉर्ड में देवस्थल भूमि क्यों दिखाई नहीं दी?
कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग, नगर निगम, टीएनसीपी सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भूमाफियाओं का साथ देते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके चलते हजारों परिवारों से अरबों रुपए का लेन-देन किया गया और सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंचाई गई। इस पूरे मामले में कई नामचीन भूमाफियाओं की संलिप्तता बताई जा रही है।
महादेव मंदिर की भूमि पर भूमाफियाओं और अधिकारियों की साठगांठ से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध कॉलोनियां काटे जाने का खुलासा पहले भी हो चुका है। अब एक और ऐतिहासिक दस्तावेज में हेरफेर कर नियम विरुद्ध कॉलोनी बसाने का खुलासा खुलासा फर्स्ट द्वारा किया गया है।
यह दस्तावेज इंदौर दरबार द्वारा छह आने के स्टाम्प पर सत्यापित है। यह रिकॉर्ड खसरा मौजा कस्बा सुहाल, जिला इंदौर से संबंधित है, जो सन् 1906-07, ई. संवत् 1963-64 और सन् 1316 फसली का है। इसके कॉलम क्रमांक 1 में खेत नंबर व नाम दर्ज हैं, जो वर्तमान में खसरा नंबर 776/3 और 776/5 हैं, जिनका रकबा क्रमशः 1-56 और 3-08 एकड़ है।
18 नवंबर 1915 के रिकॉर्ड के पूर्व यह भूमि सरकारी तालाब और घुड़दौड़ के उपयोग में थी, जिसे बाद में पूजा-पाठ के उद्देश्य से सच्चिदानंद चंद्रहास अवस्थी को दान में दिया गया था। इस दस्तावेज पर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स, इंदौर की सील और हस्ताक्षर हैं। इसकी नकल 18 नवंबर 1950 को सुरेनप्रसाद मिश्र द्वारा तैयार की गई थी, जिस पर वर्तमान में कई अवैधानिक कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।
शिकायत और न्यायिक हस्तक्षेप
इस पूरे मामले को लेकर मुन्ना उर्फ लीलाधर चौधरी निवासी सुदामा नगर, इंदौर द्वारा लगातार शिकायतें की गईं। निराकरण नहीं होने पर उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, नई दिल्ली, प्रशासनिक जज हाई कोर्ट इंदौर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली और इंदौर को आवेदन दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के आदेश पर कलेक्टर और एसपी ने थाना अन्नपूर्णा को जांच सौंपी।
अन्नपूर्णा पुलिस ने धारा 91 दंप्रसं के तहत जांच कर 28-09-2022 को प्रकरण पंजीबद्ध किया। जांच में सच्चिदानंद कॉलोनी, रेवेन्यू नगर, इंदिरा गांधी नगर, मॉडर्न टाउन, श्रीराम नगर, 11 बंगले, राजा साहब की कार का गैरेज, मून पैलेस, क्रांति कृपलानी नगर, अन्नपूर्णा थाने के पीछे 16 मंजिला भवन, उद्योगपति हेमंत नीमा का 8 बीघा भूमि पर बना भवन सहित कई अवैध निर्माण पाए गए।
कलेक्टर कार्यालय में जांच दबाने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की जांच कलेक्टर कार्यालय में दबा दी गई। भूमि का पंचनामा और नपती अब तक नहीं कराई गई, जबकि यह आवश्यक है। उन्होंने मांग की है कि कलेक्टर द्वारा एसडीएम को तत्काल आदेश देकर प्रकरण में कार्रवाई की जाए।
इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप
वर्ष 1337 में महादेव मंदिर के पुजारी को यह भूमि देखरेख और पूजा के लिए दी थी। उस समय इंदौर कस्बा पेशवा शासन के अधीन था और रावण का मैदान महू नाका से अन्नपूर्णा मंदिर तक फैला हुआ था। यह भूमि प्राचीनकाल से देवस्थान की रही है, जिसे बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिये बेच दिया गया। आरोप है कि भू-माफियाओं ने राजस्व और कलेक्टर कार्यालय के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और अवैध कॉलोनियां काट दीं।
इन पर है फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
डीआर ऑफिस और कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों की साठगांठ से भूमि अवैध रूप से बेची गई। जांच को कलेक्टर स्तर पर दबाए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता 14 वर्ष से लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है। शिकायत में डैनी जैन, उसका भाई राजीव जैन, पप्पू राजपाल, मंजीत उर्फ लंगड़ा, सौदागर प्रॉपर्टी ब्रोकर और अमर बजाज सहित कई लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
महू नाका क्षेत्र में नईदुनिया प्रेस के पास चरणजीत सिंह सैनी और परमेश्वर पर भी वर्ष 1960 के आसपास डेढ़ एकड़ भूमि खरीदने का झूठा दावा करने का आरोप है, जबकि यह भूमि रामपुर कोठी भीमाशंकर महादेव मंदिर की देवस्थान भूमि बताई गई है।
420 और 409 के मामले में भी अफसरों की साठगांठ
डीआर कार्यालय के अधिकारी संतोष जोशी सहित अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 27 दिसंबर 2019 को दर्ज धोखाधड़ी (धारा 420) और अमानत में खयानत (धारा 409) के मामले में आरोपियों के पक्ष में गवाही दी। 30 सितंबर 2022 को इस प्रकरण का निर्णय हुआ, जिसमें सभी अधिकारी कथित रूप से भू-माफिया के पक्ष में खड़े नजर आए।
35 एकड़ मंदिर की भूमि, शेष सरकारी
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मंदिर के नाम पर करीब 35 एकड़, जबकि शेष भूमि शासकीय है। उन्होंने सभी दस्तावेजों की प्रतिलिपि संलग्न करते हुए मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर अवैध कब्जे हटाए जाएं।
खसरा नंबर और रिकॉर्ड में देवस्थान भूमि दर्ज
शिकायत के अनुसार खसरा नंबर 1459, 1460, 1461, 1462, 1463, 1464, 1465 और 1468 देवस्थान की शासकीय भूमि है, जो आज भी रिकॉर्ड में इसी नाम से दर्ज है। इसके बावजूद डीआर कार्यालय के अधिकारी इसे आवासीय भूमि बताकर अवैध बिक्री को वैध ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।
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