कैसे बच गए बुजुर्ग दंपत्ति 55 लाख की ठगी से: डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने से किसने बचाया; अब क्या कर रही पुलिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
जबलपुर में साइबर ठगों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर बुजुर्ग दंपत्ति से 55 लाख रुपए ठगने की कोशिश को बैंक कर्मचारियों और पुलिस की सतर्कता ने नाकाम कर दिया। यह घटना 17 मार्च की है, जब दंपत्ति आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करने बैंक पहुंचे थे।
खुद को ईडी अधिकारी बताकर रखा दबाव में
पुलिस के मुताबिक, हाथीताल कॉलोनी निवासी 71 वर्षीय सुब्रत सेन और उनकी पत्नी मीना सेन को ठगों ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर चार दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। उन्हें फर्जी कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे ऐंठने की साजिश रची गई।
96 घंटे तक घर में ‘डिजिटल कैद’
13 मार्च को आए एक कॉल के बाद ठगों ने दंपत्ति को बताया कि उनके खाते से करोड़ों का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके बाद उन्हें घर के दरवाजे बंद रखने और किसी से संपर्क न करने के निर्देश दिए गए। डर के चलते दोनों करीब 96 घंटे तक घर में ही बंद रहे।
60 लाख की मांग, 55 लाख पर सौदा
ठगों ने पहले 60 लाख रुपए की मांग की, लेकिन दंपत्ति ने 55 लाख होने की बात कही। इस पर आरोपी राजी हो गए और रकम ट्रांसफर के लिए क्यूआर कोड व बैंक खाता विवरण भेज दिया।
बैंक में शक, तुरंत पुलिस को सूचना
17 मार्च को दंपत्ति मेडिकल स्थित एसबीआई बैंक पहुंचे और आरटीजीएस फॉर्म भरने लगे। इस दौरान कैशियर को संदेह हुआ, जिसने तुरंत मैनेजर को सूचना दी। मामले की गंभीरता समझते हुए गढ़ा थाना पुलिस को बुलाया गया। टीआई प्रसन्न शर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन ठगों के डर में आए दंपत्ति पुलिस की बात मानने को तैयार नहीं थे और लगातार पैसे ट्रांसफर करने पर अड़े रहे।
थाने में समझाइश के बाद टूटा भ्रम
पुलिस दंपत्ति को गढ़ा थाने ले गई, जहां करीब दो घंटे की समझाइश के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो रहे थे। इसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली।
केस दर्ज, आरोपियों की तलाश
पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर संबंधित मोबाइल नंबरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
पुलिस की अपील
एसपी संपत उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर पैसे मांगे, तो तुरंत कॉल काटें और 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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