संस्कारों की डोर थामें, मौत का सामान नहीं, खुशियां मनाएं, लहू का इंतजाम नहीं
Khulasa First
संवाददाता

अक्षय भंडारी स्वतंत्र पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मकर संक्रांति का सूरज अभी क्षितिज पर उभरा भी नहीं है कि शहरों के आसमान में पतंगों की धमाचौकड़ी के साथ ‘खौफ का मंजर’ शुरू हो चुका है। जिसे हम चाइनीज मांझा कहकर कोसते हैं और विदेशी बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं, उसका कड़वा सच तो यह है कि वह जहरीला मांझा हमारे अपने ही देश की सीमाओं के भीतर तैयार हो रहा है।
यह महज एक धागा नहीं, बल्कि हवा में तैरता वह ‘अदृश्य फंदा’ है, जिससे आज हर राहगीर, हर दोपहिया वाहन चालक और आसमान में उड़ता हर परिंदा खौफजदा है। यह उत्सव की आड़ में फैलाया गया एक ऐसा जाल है, जिसने आम आदमी का सड़क पर चलना मुहाल कर दिया है।
“सियासत और व्यापार के फेर में, इंसानियत का गला कट रहा है,
खेल तुम्हारा उत्सव है, पर सड़कों पर खौफ बंट रहा है।
वो धागा जिसे तुम जीत कहते हो, वो कत्ल का एक हथियार है,
सोचो! क्या यही तुम्हारी संस्कृति और यही तुम्हारा त्योहार है?
बाजारों में सरेआम बिकने वाला यह सिंथेटिक मांझा वास्तव में नायलॉन और प्लास्टिक का वह घातक मिश्रण है, जिस पर कांच के पाउडर और जानलेवा रसायनों की परत चढ़ाई गई है। विडंबना देखिए, शास्त्रों में जिस पतंग को ‘जीवात्मा’ और ‘परमात्मा’ के मिलन का प्रतीक माना गया, उसे हमने आज सर्जिकल ब्लैड से भी तेज जानलेवा हथियार बना दिया है। श्रीकृष्ण चरित मानस जैसे ग्रंथों में उल्लेख है कि पतंग की डोर हमारे कर्मों का प्रतीक है, जिसे संयम और मर्यादा में रहना चाहिए, लेकिन आज हमारी डोर दिशाहीन हो चुकी है। आज लक्ष्य मर्यादा नहीं, बल्कि ‘काटना’ और ‘गिराना’ बन गया है, चाहे उसकी कीमत किसी की जान ही क्यों न हो।
“उड़ानी है पतंग तो हौसलों को उड़ान दो,
इंसानी जान की कीमत को भी थोड़ा मान दो!
डोर सूती हो मगर इरादे नेक होने चाहिए,
त्योहार खुशियों का हो, न कि मातम का सामान हो!»
हर साल पतंगबाजी की इस अंधी होड़ में दर्जनों लोग अपनी जान गंवाते हैं और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल होकर अपंग हो जाते हैं। यह हमारी संवेदनाओं के मर जाने का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब समय केवल चिंता जताने का नहीं, बल्कि एक निर्णायक प्रहार करने का है। कांच और धातु मिश्रित इस जानलेवा डोर के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर देशभर में ‘शून्य सहनशीलता’ के साथ पूर्ण प्रतिबंध लगना अनिवार्य है। हमें उस प्राचीन गौरवशाली परंपरा की ओर लौटना होगा जहां केवल सूती धागे का उपयोग होता था, वह धागा जो स्वयं टूट जाए, लेकिन किसी के शरीर को न चीरे।
“संस्कारों की चरखी थामें, प्रेम का पेंच लड़ाते हैं,
इस संक्रांति चलो, राहगीरों की जान बचाते हैं।
धागा वही जो टूट जाए, पर किसी को न तोड़े,
आओ अपनी संस्कृति को, फिर से सुरक्षा से जोड़ें।‘
सच्ची संस्कृति जीवन बचाने में है, जीवन लेने में नहीं। जब तक व्यस्त फ्लायओवरों और सड़कों पर उड़ती इन पतंगों पर समाज स्वयं अंकुश नहीं लगाएगा, तब तक कानून की बंदिशें नाकाफी होंगी। आइए, इस मकर संक्रांति पर यह संकल्प लें कि हमारा मनोरंजन किसी के लिए काल न बने।
यदि हम अपनी इस दिशाहीन डोर को पुनः संस्कारों से नहीं जोड़ते, तो यह पावन पर्व केवल एक ‘खूनी खेल’ बनकर रह जाएगा। उत्सव का आनंद तभी है जब आसमान में उड़ती पतंग खुशहाली का पैगाम दे, किसी हादसे का सबब नहीं।
सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय भंडारी की प्रधानमंत्री से निर्णायक अपील: इस भयावह स्थिति और आम जनता की परेशानी को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय भंडारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एक राष्ट्रव्यापी समाधान का आह्वान किया है।
भंडारी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि हमारी संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिनः (सभी सुखी हों) और अहिंसा परमो धर्मः (अहिंसा ही परम धर्म है) के महान सिद्धांतों पर टिकी है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज की अनियंत्रित पतंगबाजी इन मानवीय मूल्यों का गला घोंट रही है।
उन्होंने मांग की है कि इस जानलेवा मांझे के निर्माण और बिक्री पर पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि मकर संक्रांति पर केवल सूती धागे (सूती मांझा) को ही अनिवार्य किया जाए और पतंगबाजी के लिए फ्लायओवरों व व्यस्त सड़कों के बजाय सुरक्षित मैदानों के निर्धारण हेतु एक राष्ट्रीय गाइडलाइन जारी की जाए। अक्षय भंडारी का मानना है कि किसी की जान की कीमत पर मनोरंजन कतई स्वीकार्य नहीं है।
संबंधित समाचार

सारांश जैन का टीम इंडिया में डेब्यू:कुलदीप यादव की जगह मिला प्लेइंग-11 में मौका; श्रीलंका के खिलाफ अंतिम एकादश का बने हिस्सा

पिकनिक बनी मातम:बच्चों को बचाने पानी में कूदे दो शिक्षक डूबे; छात्र सहित तीन की मौत

दो दिन से लापता मासूम भाइयों के शव कुएं में मिले:स्कूल से लौटते समय परिचित युवक ले गया था साथ; इलाके में फैली सनसनी

देखिये वीडियो, ट्रैफिक पुलिस के साथ सड़क पर उतरा गोरिल्ला:रॉन्ग साइड से आने वालों को रोका; लोगों को पढ़ाया नियमों का पाठ

सीएम की फोटो वाले कथित फर्जी लेटर पैड से तबादले की साजिश:CMHO को पत्र भेजने वाला आरोपी गिरफ्तार; मोबाइल-टैबलेट जब्त

श्रेष्ठा जोशी बनीं भाजपा महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष:माधुरी जायसवाल महामंत्री; दोनों एक ही वार्ड की निवासी, विधायक गोलू शुक्ला ने दिखाई ताकत

साधु बनकर युवक से ठगी:लिफ्ट लेने के बहाने जाल में फंसाया; भभूति लगाने का नाटक कर सोने की चेन उड़ाई

गौरव रणदिवे दिखे मुख्यमंत्री के साथ:शहर भाजपा में हलचल

रातभर सड़कों पर चला पुलिस का नाइट डोमिनेशन:1218 बदमाश चेक; 524 पर कार्रवाई, 275 वारंट किए तामील

गश्त के कुछ देर बाद सड़क पर चाकू लहराने लगा बदमाश:महिलाओं से छेड़छाड़; वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने दबोचा

ऑनलाइन बैटिंग केस, धम्मू:शिंदे और निंबोला का रिमांड पूरा; आज कोर्ट में करेंगे पेश, निखिल के बाद मनीष पमनानी को भी जमानत

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों की ठगी:17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश;12 गिरफ्तार, इतने रुपए लाख बरामद

लेनदेन का मामला निपटा रही पुलिस:बुजुर्ग पिता-पुत्र को दो दिन से कनाड़िया थाने में बैठा रखा

iPhone नहीं था पहाड़ से कूदने की वजह:कुणाल केस में नया खुलासा; पुलिस जांच में सामने आई चौंकाने वाली बात

सावन के आखिरी सोमवार पर शिवमय होगा सीहोर:3 क्विंटल फूलों से सजेगा कुबेरेश्वरधाम; 42 घंटे रहेगा नो-व्हीकल जोन

55 लाख की शराब तस्करी में दो और गिरफ्तार:कमीशन पर ग्वालियर-चंबल से आलीराजपुर भेजते थे बीयर

तेज रफ्तार का कहर:2 वाहनों की टक्कर में 3 की मौत; 12 साल की बच्ची गंभीर

अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई:चक्रतीर्थ से हटाए अवैध निर्माण; भारी पुलिस बल रहा तैनात,आपत्ति के बीच कार्रवाई जारी रही

जय श्री महाकाल का उद्घोष कर भक्तों ने ग्रहण की महाप्रसादी

कांतिलाल भूरिया बोले-आदिवासी इलाकों से भेदभाव:झाबुआ में किसानों के धरने का चौथा दिन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!