तेज रफ्तार स्कॉर्पियो हादसा: आरोपी की जमानत याचिका खारिज; टक्कर से हुई थी दो लोगों की मौत
खुलासा फर्स्ट, इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से हुए दर्दनाक सड़क हादसे को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने हादसे में आरोपी रहे दीपांशु की जमानत याचिका को खारिज कर...
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से हुए दर्दनाक सड़क हादसे को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने हादसे में आरोपी रहे दीपांशु की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी भले ही वाहन नहीं चला रहा था, लेकिन वह चालक के साथ आगे की सीट पर बैठा था और उसे तेज व लापरवाह ड्राइविंग से रोक सकता था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर भी चुप रहता है, तो उसे निर्दोष नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि आरोपी के पास हस्तक्षेप करने का अवसर था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, जो उसे नैतिक और कानूनी रूप से जिम्मेदार बनाता है।
रफ्तार बनी मौत की वजह
यह दिल दहला देने वाला हादसा 8 नवंबर की रात करीब 2 बजे, इंदौर के लाइफ केयर अस्पताल के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और केस डायरी के अनुसार, स्कॉर्पियो 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से शहर के व्यस्त इलाके में दौड़ रही थी।
इसी दौरान बाइक पर सवार तीन युवक आयुष राठौर, कृष्णपाल सिंह तंवर, श्रेयांश राठौर डिवाइडर के कट से सड़क पार कर रहे थे, तभी स्कॉर्पियो ने उन्हें जबरदस्त टक्कर मार दी।
दो की मौके पर मौत, एक की हालत नाजुक
हादसे में आयुष राठौर और कृष्णपाल सिंह तंवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि श्रेयांश राठौर गंभीर रूप से घायल हो गया। वह अब भी अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया।
नशे में थे आरोपी
लसूडिया थाना पुलिस ने इस मामले में देवराज, दीपांशु उर्फ अनुराग और शिवम के खिलाफ बीएनएस 2023 की धारा 105, 110 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 134 के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी नशे की हालत में थे। हादसे के बाद घायल युवकों को अस्पताल ले जाने के बजाय मौके से फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी दीपांशु की ओर से दलील दी गई कि वह वाहन नहीं चला रहा था, छात्र है और केवल आगे की सीट पर बैठा था। इसी आधार पर जमानत की मांग की गई।
पीड़ित पक्ष का कड़ा विरोध
मृतकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी चालक को रोक सकता था। सभी नशे में थे। हादसे के बाद मानवीय जिम्मेदारी नहीं निभाई।
कोई दस्तावेज पेश नहीं किए
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी ने खुद को छात्र बताने के कोई दस्तावेज पेश नहीं किए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय उसकी मौजूदगी और चुप्पी अपराध से अलग नहीं की जा सकती। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने 19 दिसंबर को आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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