शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट; निवेशकों के डूबे 13 लाख करोड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
गुरुवार को शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों को बड़ा झटका दे दिया। BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों ही भारी दबाव में रहे, जिससे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बाजार में बड़ी गिरावट
19 मार्च को सेंसेक्स 2,496 अंक यानी 3.26% टूटकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह करीब 2700 अंक तक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी भी 775 अंक गिरकर 23,002 के स्तर पर बंद हुआ।
निवेशकों को भारी नुकसान
इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 12 से 13 लाख करोड़ रुपए की बड़ी कमी आ गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 427 लाख करोड़ रुपए रह गया।
सभी सेक्टर लाल निशान में
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। HDFC Bank और Eternal में 5% से ज्यादा गिरावट रही। इसके अलावा बजाज फाइनेंस,महिंद्रा एंड महिंद्रा और लार्सन एंड टुब्रो में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा दबाव में रहे-निफ्टी ऑटो 4% से ज्यादा और निफ्टी रियल्टी करीब 4% नीचे बंद हुआ।
क्यों टूटा बाजार?
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी। मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई बाधित होने से बाजार पर दबाव बना।
2. सख्त रुख में फेडरल रिजर्व
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत कम दिए, जिससे निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा। महंगाई पर नियंत्रण न होने की चिंता भी बनी हुई है।
3. वैश्विक बाजारों में कमजोरी
अमेरिकी बाजारों-S&P 500, Nasdaq और Dow Jones-में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। एशिया और यूरोप के बाजार भी दबाव में रहे।
4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
एफआईआई लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी घटी और गिरावट तेज हो गई।
5. रुपए पर दबाव और मुनाफावसूली
कच्चे तेल की महंगाई से रुपए पर दबाव बढ़ा है। साथ ही हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार और नीचे आ गया।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ग्लोबल संकेत, तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने का है, क्योंकि वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।
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