फर्जी अंकसूची से नौकरी पा ली: कोर्ट ने सुनाई इतने साल की सजा; ऐसे बन गया था लैब असिस्टेंट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, रतलाम।
जिला अस्पताल में फर्जी अंकसूची के आधार पर लैब असिस्टेंट की नौकरी हासिल करने वाले आरोपी सलमान (38) पिता अनवर खान निवासी नागझिरी, उज्जैन को कोर्ट ने 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
2 हजार रुपए का अर्थदंड भी
साथ ही 2 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड नहीं चुकाने पर अतिरिक्त एक-एक माह की सजा भुगतनी होगी। यह फैसला सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सुनाया।
अनुकंपा नियुक्ति से मिला था पद
अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपलौदा में पदस्थ एनएमए अनवर खान का 8 नवंबर 2014 को निधन हो गया था। इसके बाद उनके बेटे सलमान ने 13 फरवरी 2015 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
अंकसूचियां समेत अन्य दस्तावेज जमा किए
आवेदन के साथ उसने कक्षा 10वीं और हायर सेकेंडरी (बायोलॉजी) की अंकसूचियां समेत अन्य दस्तावेज जमा किए। इसके आधार पर 10 जून 2016 को उसे जिला अस्पताल रतलाम में लैब असिस्टेंट (तृतीय श्रेणी) के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली, जहां उसने 13 जून 2016 को ज्वाइन किया।
सत्यापन में सामने आई सच्चाई
जिला अस्पताल द्वारा 27 फरवरी 2017 को मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल, भोपाल से अंकसूची का सत्यापन कराया गया। जांच में पाया गया कि प्रस्तुत अंकसूची रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। इसके बाद सिविल सर्जन ने 12 अप्रैल 2017 को स्पष्ट किया कि सलमान द्वारा प्रस्तुत अंकसूची फर्जी और कूटरचित है।
बिना परीक्षा दिए हासिल की योग्यता
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने हायर सेकेंडरी परीक्षा का फॉर्म तक नहीं भरा था। संबंधित स्कूल और बोर्ड से पुष्टि हुई कि अंकसूची उनके द्वारा जारी ही नहीं की गई थी। अंकसूची पर लगी सील और रोल नंबर भी फर्जी पाए गए।
वेतन के रूप में ली शासकीय राशि
आरोपी ने नौकरी के दौरान 97 हजार 348 रुपए वेतन के रूप में प्राप्त किए। विभाग को गुमराह कर नौकरी हासिल करने पर उसके खिलाफ थाना स्टेशन रोड में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए 7 साल की सजा सुनाई।
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