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मेट्रो ट्रेन की जमीन पर 20 प्लॉट बेच खाए गांधी नगर संस्था ने: जमीनों की हेराफेरी के लिए कुख्यात है हाउसिंग सोसायटी

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 मार्च 2026, 5:10 pm
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मेट्रो ट्रेन की जमीन पर 20 प्लॉट बेच खाए गांधी नगर संस्था ने

राजेंद्र खंडेलवाल 98931-90781 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वर्षों से विवादास्पद और जमीनों की हेराफेरी के लिए कुख्यात गांधी नगर हाउसिंग सोसायटी के पदाधिकारियों ने मेट्रो के लिए आरक्षित जमीन में से 20 प्लॉट काटकर बेच दिए। जांच सहकारिता विभाग ने की और संस्था को दोषी पाया। पदाधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा भी की जो नहीं हुई।

सहायक आयुक्त (अंकेक्षण) सहकारिता एपीएस बिलौदिया और अंकेक्षण अधिकारी केके जमरे ने 2 सितंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था मेट्रो डिपो के लिए आवंटित 2.68 हेक्टेयर भूमि में से मेट्रो ट्रेन कारपोरेशन ने 2.10 हेक्टेयर पर ही कब्जा लिया था। शेष पर संस्था ने 20 प्लॉट काटकर बेच दिए।

संस्था ने मामले में जो जवाब पेश किया है उसमें कहा- शासन ने 25 अप्रैल 1949 को उक्त 441.61 एकड़ भूमि पट्टे के आधार पर आवंटित की थी। जिन 20 प्लॉट का विवाद है वो खसरा क्र. 307/5 की भूमि हैं। प्रशासन के आदेश पर संस्था के प्रशासक प्रवीण जैन ने 21 सितंबर 2021 को मेट्रो ट्रेन परियोजना के लिए 2 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन, अपने सदस्यों के लिए आरक्षित 20 प्लॉट छोडक़र आवंटित की थी। 7 मार्च 2025 को प्लॉट होल्डरों को कब्जा भी दे दिया गया। होल्डरों ने टीन शेड लगाकर अपने प्लॉट सुरक्षित भी किए थे। तब आरआई व पटवारी भी मौजूद थे।

2004 में लगी थी रजिस्ट्री पर रोक
ये भी तथ्य सामने आया वर्ष 2004 में प्रशासन ने संस्था को आवंटित जमीन पर काटे गए प्लॉट की रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी थी इसके बावजूद संस्था के पदाधिकारियों ने बिना वरीयता सूची बनाए प्लॉट आवंटित किए। जांच रिपोर्ट में कहा गया है संस्था की वार्षिक साधारण सभा 30 सितंबर 2023 को हुई, जिसमें प्रस्ताव क्र. 8 में 2.618 हेक्टेयर के स्थान पर मेट्रो ट्रेन कारपोरेशन को 2.100 हेक्टेयर भूमि ही देने का जिक्र है।

लेकिन संस्था ने जो नक्शा पेश किया है उसमें स्पष्ट नहीं है पूर्व में 27 प्लॉट कब, किनको, कहां आवंटित किए। मेट्रो के लिए आरक्षित कुल भूमि में 20 प्लॉट कैसे काट दिए? संस्था ने जांच के दौरान टीएनसीपी के स्वीकृत नक्शे के बदले ग्राम पंचायत बड़ा बांगड़दा के सरपंच द्वारा अनुमोदित नक्शा पेश किया है। इसमें प्लॉटों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

एक ही सदस्यता क्रमांक पर प्लॉट आवंटित
जांच में पाया गया संस्था ने नियम विरुद्ध समान सदस्यता क्रमांक प्रदान किए हैं। 26 अगस्त 2019 को संचालक मंडल की बैठक में 20 प्लॉट का आवंटन करना बताया गया जबकि सदस्यों के सदस्यता क्रमांक एक ही हैं। यानी एक ही क्रमांक वाले 20 को प्लॉट दे दिए गए। जिन सदस्यों को प्लॉट देना बताया गया है उनके नाम संस्था की सदस्यता सूची में नहीं है।

इन प्लॉटधारकों में से 14 का कहना है उन्होंने सदस्यता ग्रहण की है और पैसा जमा करवाया जिसके एवज में प्लॉट मिला है लेकिन इसकी कोई दस्तावेजी जानकारी संस्था ने नहीं दी है न सदस्यता पंजी-कार्रवाई पंजी पेश की। ये भी स्पष्ट हुआ है कि नक्शे में भिन्नता है और उसमें छेड़छाड़ हुई है जिसके लिए संचालक मंडल व प्रबंधक दोषी हैं।

नोटिस दिया है, जल्द कार्रवाई करेंगे
जांच रिपोर्ट के बाद सभी संबंधितों को नोटिस दिया है। जल्द ठोस कार्रवाई की जाएगी। पूरा मामला अधिकारियों के संज्ञान में है। - मनोज जायसवाल, उपपंजीयक, सहकारिता

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