अयोध्या संस्था में हुआ फर्जीवाड़ा: पदाधिकारियों ने किए फर्जी साइन; प्लॉट देने के बजाय बनाए फ्लैट, पुलिस ने कोर्ट में कहा- एकपक्षीय कार्रवाई हो
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
छोटा बांगड़दा में 1.48 एकड़ जमीन पर 989 में खरीदी गई जमीन पर अयोध्या हाउसिंग सोसायटी के कर्ताधर्ताओं ने फर्जीवाड़ा कर न केवल कई सदस्यों के फर्जी साइन कर प्लॉटों की अफरातफरी की, बल्कि बहुमंजिला बनाकर फ्लैट बेच दिए।
सहकारिता विभाग ने जांच में पदाधिकारियों को दोषी पाया और एरोड्रम थाने में रिपोर्ट लिखाई, लेकिन पुलिस के ढूलमूल रवैये के बाद अब पीड़ित कोर्ट पहुंचे। कोर्ट में पुलिस ने असहयोगात्मक रवैये पर एकपक्षीय कार्रवाई करने का आग्रह किया।
अधिवक्ता मुकेश देवल ने बताया संस्था का कार्यालय 69, जानकी नगर एक्सटेंशन में है। वर्ष 1989 में तत्कालीन अध्यक्ष रामावतार शर्मा ने छोटा बांगड़दा में 1.48 एकड़ जमीन प्राप्त की थी, जिसके लिए उन्होंने 10 हजार व शांता झंवर ने 4500 रुपये की राशि दी थी। उनके अलावा 18 अन्य प्राथमिक सदस्यों से 31, 080 रुपये एकत्रित किए गए थे। इस जमीन का नामांकन, सीमांकन आदि की तमाम कार्रवाइयां भी संपन्न की गई थीं।
कृषि भूमि होने से कॉलोनी नहीं काटी, लेकिन 2007 में मास्टर प्लॉन में भूमि आवासीय की गई, जिसके बाद कॉलोनी काटकर सभी 20 सदस्यों को प्लॉट देना तय किया गया। देवल ने बताया कि 30 दिसंबर 2017 को हुए चुनाव में संस्था के अध्यक्ष मांगीलाल झंवर, उपाध्यक्ष कैलाश जाखेटिया और संचालक मंडल में नंदलाल झंवर व अन्य चुने गए।
इन पदाधिकारियों ने कॉलोनी की जमीन पर खेल करना शुरू कर दिया। शेष सदस्यों की जानकारी के बिना इन्होंने बहुमंजिला भवन का लेआउट स्वीकृत करवा लिया व 8 अप्रैल 2019 को डायवर्शन, 20 सितंबर 2019 को भवन निर्माण व अन्य कार्यवाहियां कर प्लॉट आवंटन बंद कर बहुमंजिला भवन निर्माण कर विक्रय करना शुरू कर दिया। संस्था की बैठकों में सदस्य चंद्रप्रकाश डोडिया समेत कई सदस्यों को सूचना न देकर उनकी फर्जी साइन तीनों पदाधिकारियों ने कर लिए।
संस्था अध्यक्ष मांगीलाल झंवर ने परिवार की जेएनजे कंपनी बना ली, जिसने संस्था की जमीन पर बहुमंजिला भवनों का निर्माण शुरू कर दिया। देवल के अनुसार, कंपनी की संचालक नूपुर झंवर उनकी पोता बहू है। दूसरा संचालक कार्तिक जाखेटिया भी संस्था उपाध्यक्ष कैलाश जाखेटिया का पुत्र है।
इस तरह पदाधिकारियों ने सहकारिता नियमों को ताक में रखकर परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाया। 30 जून 2023 को संस्था के चुनाव में दोनों परिवारों के ही 11 सदस्यों को निर्वाचित करवा लिया गया, जबकि घर के लोगों को पदाधिकारी नहीं बनाया जा सकता। इन्हों ने 145 फ्लैट और 9 दुकानें निकाली और उन्हें बेचकर करोड़ों रुपए कमाए।
जब डोडिया ने अध्यक्ष से जानकारी मांगी तो टालमटोल करने लगे। 28 मई 2024 को आखिरकार उन्होंने सहकारिता विभाग में शिकायत की, जिसके बाद उपअंकेक्षक आशीष सेतिया ने पूरे मामले की जांच की। जांच में उन्होंने पाया कि संचालक मंडल ने गड़बडिय़ां की हैं। फर्जी साइन किए गए हैं, जिसका खुलासा एक्सपर्ट ने भी किया।
प्लॉट और फ्लैट आवंटन में अनियमितता भी साफ हुई। इसके बाद पीड़ित सदस्य एरोड्रम थाने पहुंचे, जहां धारा 318(4), 316 (2), 316 (5),336 (1), 338 (1), 336 (3), 340 (2), 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया, लेकिन पुलिस ने ढुलमुल रवैया अपनाया।
पीड़ितों ने अधिवक्ता देवल के माध्यम से हाईकोर्ट में केस लगाया। इस पर हाईकोर्ट ने एरोड्रम पुलिस को नोटिस दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने कहा कि पदाधिकारी सहयोग नहीं कर रहे और न दस्तावेज दे रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि एकपक्षीय कार्रवाई की जाए।
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