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करोड़ों रुपए की ठगी: सरकारी जमीन पर फर्जी रजिस्ट्री कराई; व्हाइट कॉलर भूमाफिया पर गंभीर आरोप, 25 वर्षों से संगठित धोखाधड़ी का दावा

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 जनवरी 2026, 2:04 अपराह्न
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करोड़ों रुपए की ठगी

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।

विदुर नगर व श्री झूलेलाल नगर संस्थाओं के संचालक कटघरे में राशि लेने के बावजूद प्लॉट नहीं देने का मामला, पीड़ित ने रकम और वैध प्लॉट वापसी की मांग की सरकारी जमीन पर फर्जी रजिस्ट्री कर आम नागरिकों को लूटने वाले तथाकथित व्हाइट कॉलर भूमाफिया का एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

विदुर नगर और श्री झूलेलाल नगर संस्था के संचालकों पर एक वरिष्ठ नागरिक से 1 करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित ने वर्षों से प्रशासन, पुलिस और सहकारिता विभाग के चक्कर काटने के बावजूद आज तक न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाया है।

17 लाख नकद और 2100 वर्गफीट का प्लॉट हड़पा
पीड़ित वरिष्ठ नागरिक चंद्रकुमार भवानी का आरोप है कि संस्था के मुख्य संचालक राजकुमार (बाबू) खतूरिया, मोहनलाल रामरखियानी और मनोज राजवानी ने विश्वास में लेकर उनसे 17 लाख रुपए नकद और शांतिनाथपुरी स्थित 2100 वर्गफीट का प्लॉट (अनुमानित कीमत 1.30 करोड़ रुपए) अमानत के नाम पर ले लिया, लेकिन बदले में एक भी वैध प्लॉट नहीं दिया।

सरकारी जमीन पर फर्जी शपथ-पत्र व रजिस्ट्रियां
कलेक्टर कार्यालय और सहकारिता विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपित संचालकों ने सरकारी भूमि को निजी बताकर फर्जी शपथ-पत्रों के आधार पर रजिस्ट्रियां करवाईं। यही नहीं, एक ही जमीन कई लोगों को बेचने की शिकायतों का भी खुलासा हुआ है। पीड़ित का दावा है कि यह खेल सन् 2000 से लगातार चल रहा है, जिसमें कई लोग अपनी जीवनभर की कमाई गंवा चुके हैं।

एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी के बावजूद पैसा वापस नहीं
मामले में थाना रावजी बाजार में अपराध क्रमांक 42/05 और 43/05 दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद पीड़ित को आज तक उसकी जमा राशि और प्लॉट वापस नहीं मिला। सवाल यह है कि क्या एफआईआर केवल कागजों तक सीमित रह गई?

बुजुर्ग की कमजोरी का फायदा, पढ़े बिना कराए शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर
पीड़ित ने शपथ-पत्र देकर बताया कि उम्र अधिक होने और चश्मा न होने का फायदा उठाकर उनसे एक शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए गए, जिसकी सामग्री उनके कथन से बिलकुल अलग थी। बाद में उन्होंने उसे औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया।

विशेष जनसुनवाई से फिर जागी उम्मीद
पीड़ित ने पुनः 1 अक्टूबर 2024 को वरिष्ठ नागरिक विशेष जनसुनवाई में आवेदन देकर मांग की है कि 17 लाख नकद राशि लौटाई जाए, शांतिनाथपुरी का प्लॉट क्रमांक 5-ए वापस दिलाया जाए और भूमाफिया नेटवर्क की गहन जांच हो।

बड़ा सवाल…क्या इंदौर में भूमाफिया को राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? और क्या एक वरिष्ठ नागरिक को अपनी ही जमापूंजी वापस पाने के लिए जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी संघर्ष करना पड़ेगा? यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि सिस्टम की चुप्पी पर भी बड़ा सवाल है।

नगर निगम और सहकारिता विभाग भी घेरे में
नगर निगम के कॉलोनी सेल और सहकारिता विभाग को वर्षों से शिकायतें मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी है कि जब जमीन सरकारी थी, तो रजिस्ट्रियां कैसे हुईं? जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

अखबारों और शासकीय रिकॉर्ड से खुलासा
पीड़ित वरिष्ठ नागरिक चंद्रकुमार भवानी ने बताया विदुर नगर संस्था द्वारा बताई जमीन पर विश्वास कर उन्होंने लगभग 3 करोड़ रुपए दिए थे। यह रकम माणिकबाग रोड स्थित मिडटाउन प्लाजा के कार्यालय में दी गई, जिसकी शिकायत उन्होंने थाना जूनी इंदौर और कलेक्टर कार्यालय में की है।

उन्होंने कहा संस्था द्वारा किए फर्जीवाड़े का खुलासा बाद में समाचार-पत्रों और शासकीय रिकॉर्ड से हुआ। भवानी के अनुसार नारायणदास राजवानी और मोहनलाल रामरखियानी की गिरफ्तारी थाना रावजी बाजार द्वारा पहले की जा चुकी है, क्योंकि शिकायत स्वयं कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज कराई गई थी। रिकॉर्ड खंगालने पर यह भी सामने आया कि उनके अलावा अन्य को फर्जी प्लॉटों का विक्रय किया।

पीड़ित ने 2021 में वरिष्ठ नागरिक प्रकरण के तहत कलेक्टर से लिखित शिकायत कर जमा राशि और अमानत में दिया प्लॉट वापस दिलाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया प्लॉट पहले से ही विवादित था और पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।

उनके अनुसार कई अन्य लोगों की भी बड़ी रकम इस फर्जीवाड़े में डूबी है। पीड़ित ने यह भी कहा कि बड़ी-बड़ी संस्थाओं और फर्मों के नाम देखकर उन्होंने विश्वास किया था, लेकिन बाद में पता चला कि झूलेलाल नगर का पूरा प्लॉट एक ही दिन में फर्जी तरीके से बेच दिया गया, जबकि आरोपियों के पास स्वयं कोई वैध जमीन ही नहीं थी।

यह जानकारी उन्हें सहकारिता विभाग और कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों से मिली। वर्ष 2021 में कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और थाना जूनी इंदौर में शिकायत की थी। शांतिनाथपुरी स्थित प्लॉट 5-ए, जो सुरेश कुमार के नाम दर्ज है, से जुड़े दस्तावेज जांच में सामने आए हैं।

कलेक्टर ने यह मामला निगम आयुक्त को सौंपे जाने के बाद आयुक्त ने प्रकरण उपायुक्त सहकारिता विभाग को अग्रेषित किया। वर्तमान में सभी जांचें विचाराधीन हैं।

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