इंदौर को नई दिशा देने वाले पांच पूर्व कलेक्टर दिल्ली में एक साथ: इलैया राजा और मनीष सिंह का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अपने कार्यकाल के दौरान इंदौर को नई दिशा देने वाले और पूरी संवेदनशीलता के साथ अपने फर्ज को अंजाम देने वाले इंदौर के पांच पूर्व कलेक्टर कल दिल्ली में एकसाथ दिखे। इनमें दो कलेक्टरों मनीष सिंह और डा. इलैया राजा टी. का कार्यकाल बेहद कश्मकशभरा रहा था। सिंह अभी प्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त हैं लेकिन उन्हें इंदौर को सफाई में नंबर वन बनाने और कोरोना लॉकडाउन के दौरान तमाम व्यवस्थाएं करने का श्रेय है।
जो कलेक्टर कल एकसाथ थे उनमें पी. नरहरि का कार्यकाल अप्रैल 2015 से जून 2017 तक का रहा जिन्होंने शहर को एक नया आयाम दिया। उनके कार्यकाल का प्रमुख उपलब्धियों में चिडिय़ाघर की सुव्यवस्थित कर न केवल पशुओं को बल्कि पशुप्रेमियों को सुविधाएं देना रहा। इसकी चर्चा आज भी प्रशासनिक गलियारों में होती है।
जनवरी 19 से मार्च 20 तक कलेक्टर रहे लोकेश जाटव के कार्यकाल के अंतिम दिनों में कोरोना की दस्तक मिल चुकी थी और उन्होंने तत्परता दिखाते हुए अनेक बड़े फैसले लिए। जैसे ऑडइनवन व्यवस्था लागू करना जिसमें सड़क पर वाहनों का निकलना तय किया गया।
जैसा कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने किया था। इसके अलावा, उन्होंने दूध की सप्लाई नियमित रखने के लिए तमाम कदम उठाए जिसका परिणाम ये निकला कि लोगों को दूध जैसी अतिआवश्यक वस्तुओं के लिए परेशानी नहीं उठाना पड़ी।
निशांत वरबडे जून 2017 से दिसम्बर 2018 तक रहे और उनका कार्यकाल भी अनेक उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। इंदौर में कलेक्टर के रूप में इलैया राजा टी और मनीषसिंह का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा। कई संकट आए जिनका सामना दोनों अधिकारियों ने पूरी दृढ़ता और सूझबूझ के साथ किया।
इलैया राजा नवम्बर 2022 से जनवरी 2024 तक कलेक्टर रहे और इस दौरान उन्होंने न केवल प्रवासी भारतीय सम्मेलन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया बल्कि स्नेहनगर में बावड़ी में लोगों के गिरने से हुई मौतों के मामले में उन्होंने गजब की संवेदनशीलता दिखाई थी।
वे खुद भूखे-प्यासे रहकर मोर्चे पर डटे रहे और न केवल शवों को बाहर निकलवाया बल्कि यहां तमाम व्यवस्थाएं भी जुटाई। मनीषसिंह का इंदौर से गहरा नाता रहा है। मार्च 20 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री बने शिवराजसिंह चौहान ने उन्हें उज्जैन कलेक्टर से इंदौर भेजा। ये वक्त कोरोना काल का था जिसे मनीषसिंह ने जितनी कुशलता और सक्रियताभरी सूझबूझ के साथ हैंडल किया, वो आज भी याद किया जाता है।
व्यवस्थाएं जुटाना और लोगों के मन में डर निकालने के लिए इलाज की समुचित व्यवस्थाएं करना भी सिंह के इंदौर कार्यकाल में चार चांद लगाता है। रेमिडीसियर इंजेक्शन की उपलब्धता उनके प्रयासों से हुई जो बेमिसाल है। इसके अलावा, मनीषसिंह जब इंदौर में ही नगर निगम आयुक्त थे, तब इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने में उनकी भूमिका जबर्दस्त रही।
इंदौर आज भी नंबर वन है तो उसमें मनीषसिंह का योगदान अविस्मरणीय है। वे नवम्बर 22 तक इंदौर में रहे और उनकी धाक प्रशासन पर खूब रही। अभी वे प्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त हैं और उन पर सरकार की छबि निखारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जिसे वे बखूबी निभा रहे हैं।
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