पिता नौ साल से परेशान: अब बेटा भी घर से बेदखल; मकान को बेचने में धोखाधड़ी, बेंगलुरु की मकान मालकिन ने सामान भी गायब किया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वृद्ध पिता नौ साल से अपने मकान को बेचने के मामले में हुई धोखाधड़ी से परेशान होकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, अब बेटे को भी बैंगलुरु में रहने वाली मकान मालकिन ने न केवल घर से बेदखल कर दिया बल्कि उसका सामान भी गायब कर दिया। हद है पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर रही।
ये वरिष्ठ नागरिक हैं करतार बहरानी। उनका आरोप है पत्नी के कैंसर का इलाज का कर्ज उतारने के लिए अपने किला मैदान के सामने शेषाद्रि कॉलोनी स्थित मकान नंबर 41 का सौदा भरत बाहेती, पुनीता कमल लालवानी, रानू काबरा, दलाल कुणाल पंवार, शैलेंद्र पोरवाल आदि से 1.40 करोड़ रुपए में किया था।
मात्र 40 लाख ही मिले और वो भी पंवार ने उमरीखेड़ा खंडवा रोड की जमीन में लगवा दिए। यानी उन्हें कुछ नहीं मिला और मकान पर बाहेती समेत अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया। बेचकर पैसा खुद रख लिया। 2017 में कार्रवाई के लिए आवेदन तेजाजी नगर थाने पर दिया लेकिन पुलिस ने जांच कर एफआईआर दर्ज करने के वादे को पूरा नहीं किया।
दो साल भटकने के बाद तेजाजी नगर थाने में जनवरी 2019 में एफआईआर दर्ज की गई। 9 साल बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। थाने जाने पर गुमराह करते हैं। कोर्ट में चार साल बाद चालान डायरी पेश की गई लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब तारीख पर तारीख दी जा रही है।
सदर बाजार पुलिस ने एक आरोपी दलाल कुणाल पंवार को गिरफ्तार किया लेकिन नियम के विरुद्ध इसके बाद मामले का खात्मा पेश कर दिया जो 25 फरवरी 2025 को कोर्ट द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उन्होंने बताया नौ से ज्यादा बार पुलिस जनसुनवाई में जा चुके हैं। अब बेटे विकास के साथ भी मकान मालकिन ने अत्याचार कर दिया। वो 304, शिवम रेसीडेंसी, शिव वाटिका एमआर 11 में तीन साल से रह रहे थे और नियमित किराया आदि चुका रहे थे।
9 जून 2025 को मकान मालकिन बैंगलुरू निवासी अर्चना रामचंद्र ठाकुर के कहने पर कुछ लोगों ने फ्लैट खाली करने के लिए दबाव डाला। विकास ने दूसरा फ्लैट मिलने पर खाली करने की बात कही। एक दिन शाम को फ्लैट पर पहुंचे तो पाया सारा सामान गायब है।
पता चला उनकी अनुपस्थिति में अर्चना के लोग ताला तोड़कर घुसे थे। गायब सामान में घरेलू उपयोग की चीजों के अलावा गहने (करीब 6 लाख) शामिल हैं। वे दौड़े-दौड़े लसूडिय़ा थाने पहुंचे लेकिन टरका दिया गया। पांच माह भटकने के बाद वे वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचे जिनके निर्देश पर 30 नवम्बर को लसूडिय़ा थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
कार्रवाई फिर भी नहीं हुई। विकास ने बताया जो सामान गायब हुआ उनमें उनके कई असली दस्तावेज भी थे। मकान मालकिन अर्चना को गिरफ्तार नहीं किया गया। फिलहाल विकास बहरानी महालक्ष्मी नगर की नरीमन पाइंट बिल्डिंग में बहुत परेशानी में रह रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन से भी हेल्प नहीं
बहरानी ने बताया खुद व बेटे विकास के साथ हुए अत्याचार व धोखाधड़ी की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी झूठी जानकारी देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कहते हैं निराकरण हो गया है। हकीकत है एक भी शिकायत का निराकरण नहीं हुआ।
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