जब भाजपा न थी हिंदू तो तब भी निशाने पर था: बर्बर बांग्लादेश; दिग्विजयसिंहजी, शर्मनाक है हिंदुओं पर हमले पर आपका बयान
कांग्रेस नेता दिग्विजय बोले- बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह भारत में हो रही घटनाओं का रिएक्शन राशिद अल्वी ने भी पड़ोसी देश में जिंदा जलाए हिंदू युवा की मौत को भारत के अल्पसंख्यकों से जोड़ा शेख हसीना...
Khulasa First
संवाददाता

कांग्रेस नेता दिग्विजय बोले- बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह भारत में हो रही घटनाओं का रिएक्शन
राशिद अल्वी ने भी पड़ोसी देश में जिंदा जलाए हिंदू युवा की मौत को भारत के अल्पसंख्यकों से जोड़ा
शेख हसीना ने जिस घटना को अमानवीय कृत्य बताया, उसे देश के नेताओं ने भारत में बढ़ती ‘असहिष्णुता' से जोड़ा
कांग्रेस की शीर्ष नेता प्रियंका गांधी हिंदुओं पर हमले पर चिंता जताती हैं, पार्टी नेता फिर तुष्टिकरण में जुटे
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं पर लगातार किए जा रहे हमलों पर भी देश की राजनीति का विद्रूप चेहरा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बे हद दुःखद है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे बर्बर हमले पर भी देश की राजनीति अपनी वोट बैंक की चिंता से आगे नहीं बढ़ पा रही है। आधुनिक दुनिया में एक व्यक्ति को जिंदा जला देने की अमानवीय घटना भी नेताओं के कलेजे को थर्राती नहीं। सामान्य मानव के मानवीयता के लक्षण से भी भारत की प्रतिपक्ष की राजनीति एक बार फिर कोसों दूर खड़ी हो गई। खासकर देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल कांग्रेस। एक तरफ कांग्रेस की शीर्ष नेता प्रियंका गांधी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले पर चिंता जाहिर करती हैं।
प्रियंका गांधी बांग्लादेश में जिंदा जलाए गए दीपचंद के मामले में व्यथित हो भारत सरकार से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की बड़ी बात कहती हैं, वहीं उनके ही दल के वरिष्ठ और वयोवृद्ध नेता दिग्विजय सिंह व राशिद अल्वी ऐसे जघन्य मामले में भी वोट बैंक की राजनीति से बाज नहीं आ रहे। बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अन्य अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे जानलेवा हमलों पर दोनों नेताओं के शर्मसार करते बयान सामने आए हैं।
दिग्विजय का कहना है कि बांग्लादेश की घटनाएं भारत में अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे हमलों की प्रतिक्रिया हैं। वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने बांग्लादेश के वर्तमान राजनीतिक माहौल की तुलना भारत के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व से करते हुए कहा कि भारत में भी ऐसी फासीवादी ताकतें सत्ता में हैं, जिनके कारण ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। दिग्विजय ने कहा बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले भारत में अल्पसंख्यकों पर कार्रवाइयों का रिएक्शन हैं।
कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता के इस बयान को पार्टी के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी का भी समर्थन मिला। उन्होंने दो कदम आगे जाकर कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमानों के घरों पर आज बुलडोजर चल रहे हैं। राशिद ने दिग्विजय के विवादित बयान का समर्थन ये कहते हुए किया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की सरकार, भारत में भी कट्टरपंथियों की सरकार है।
बांग्लादेश में मंदिरों को तोड़ा जा रहा, भारत में मस्जिदों पर हमला हो रहा। भारत में भी कट्टरपंथी एक समुदाय के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन पर हमले कर रहे हैं। जबकि ये सर्वविदित है कि तमाम बुलडोजर कार्रवाई लॉ एंड ऑर्डर के तहत हुई घटनाओं का हिस्सा रही हैं। आम मुसलमान इसका हिस्सा नहीं, जबकि बांग्लादेश में आम हिंदुओं को कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं।
अल्वी ने तो शेख हसीना को भारत में शरण देने पर भी सवाल उठाया कि एक पूर्व प्रधानमंत्री को हमारे देश में क्यों शरण दे रखी है। देश के सबसे बड़े विपक्षी दल के इन दो नेताओं के बयान एक तरह से बांग्लादेश की जघन्य घटना पर वहां के कट्टरपंथियों के पक्ष में कवर फायर के रूप में देखे व समझे जा रहे हैं।
एक ऐसे समय, जब दुनिया के अन्य मुल्क बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अन्य अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे लगातार हमलों की कठोर निंदा कर रहे हैं, तब हिंदुओं के ही मुल्क हिंदुस्तान के विरोधी दल के नेताओं के बयान बांग्लादेश की जगह भारत को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह और राशिद अल्वी के बयान भारत की तुलना बांग्लादेश से कर दुनिया में भारत विरोधी लॉबी को बढ़-चढ़कर बोलने की शह दे रहे हैं।
हिंदुओं पर हमले तो तब से हो रहे हैं, जब न भाजपा थी, न मोदी और न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का कोई संगठन। इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर सनातन धर्म और उसके अनुयायी तब से ही निशाने पर हैं, जब से भारत में इस्लाम धर्म का आगमन हुआ। खैबर के दर्रे से सातवीं सदी में हुए मोहम्मद बिन कासिम के भारत पर पहले हमले से लेकर पहलगाम और चार दिन पहले बांग्लादेश में दीपचंद दास को जिंदा जलाने की घटना तक ये ही तो हो रहा है।
जिहादी सोच की कट्टरपंथी विचारधारा के निशाने पर तो सदियों से हिंदू निशाने पर रहा है। बहुसंख्यक समाज के धर्मस्थल से लेकर उनके अस्तित्व को ही आज भी चुनौती माना जा रहा है। तो फिर बांग्लादेश की घटना को भारत में मोदी सरकार के राजकाज से कैसे जोड़ा जा सकता है? वह भी ऐसे समय, जब देश को तमाम मतभेदों को भुलाकर बांग्लादेश की बर्बर घटनाओं पर एकजुट दिखना है।
ऐसे समय भी हमारे देश की वोट बैंक की राजनीति अपने विद्रूप चेहरे के साथ मुखर है। ये एक तरह से दुश्मन मुल्क की अमानवीय घटनाओं के प्रति कवर फायर ही साबित हो रहा है। दुःखद ये है कि एक बार फिर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इस विद्रूप चेहरे का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चेहरा बनकर सामने आए हैं।
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