अजर-अमर-अटल... नमन: सदैव अटल भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर राष्ट्र नतमस्तक
मां भारती के लाल-भारत रत्न अटल सुबह दिल्ली में राष्ट्रपति, पीएम, लोकसभा स्पीकर सहित कई नामचीन हस्तियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन अटलजी के साथ-साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी की...
Khulasa First
संवाददाता

मां भारती के लाल-भारत रत्न अटल
सुबह दिल्ली में राष्ट्रपति, पीएम, लोकसभा स्पीकर सहित कई नामचीन हस्तियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
अटलजी के साथ-साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाओं का भी पीएम करेंगे लोकार्पण
जन्म 25 दिसंबर 1924
अवसान 16 अगस्त 2018, 1957 में पहली बार सांसद, 1977 से 1979 तक देश के विदेश मंत्री
प्रधानमंत्री 3 बार देश के प्रधानमंत्री, पहले 13 दिन, फिर 13 महीने और फिर करीब 5 साल
पोखरण पोखरण परमाणु परीक्षण 11 व 13 मई 1998
दोपहर लखनऊ में प्रधानमंत्री मोदी करेंगे अटलजी की 65 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का लोकार्पण, रैली को भी करेंगे संबोधित
योगी सरकार ने अटलजी की कर्मस्थली पर 65 एकड़ में बनाया 2 लाख लोगों की क्षमता वाला राष्ट्र प्रेरणा स्थल, 230 करोड़ खर्च
अजातशत्रु वाजपेयी की याद में आज देशभर में मनाया जा रहा सुशासन दिवस, इंदौर में बनी अखंड भारत की रंगोली, शाम को कवि सम्मेलन
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बात है मां भारती के लाल, भारत रत्न मान्यवर अटल बिहारी वाजपेयीजी की। देश आज इस युगपुरुष की 101वीं जयंती पर उन्हें दिल-ओ-जान से याद कर रहा है। राजधानी दिल्ली में समाधि स्थल पर ‘सदैव अटल' का आयोजन अलसुबह से आहूत हुआ। इस आयोजन में देश की शीर्षस्थ हस्तियां शामिल हुईं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। भारत उदय के स्वप्नदृष्टा, राजनीतिक व सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के प्रतीक अटलजी की 101वीं जयंती आज देशभर में सुशासन दिवस के रूप में भी मनाई जा रही है।
राज्यों की राजधानियों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया जा रहा है। वर्तमान के ‘कलुषित व कर्कश' राजनीतिक वातावरण में अटलजी जैसे व्यक्तित्व की अब कल्पना भी नहीं की जा सकती। वे राजनीतिक विचारधारा पर अडिग रहते हुए भी अजातशत्रु थे, यानी जिसका कोई शत्रु नहीं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटलजी की स्मृति में एक बड़ा कार्य कर उनकी याद को चिरस्थायी कर दिया है। इसके लिए योगी ने अटलजी की राजनीतिक कर्मस्थली अदबी शहर लखनऊ का ही चयन किया, जहां से अटलजी सदैव चुनाव लड़ते रहे। लखनऊ से ही उनका आखिरी चुनाव भी रहा।
लिहाजा योगी आदित्यनाथ ने इस शहर के बसंत कुंज योजना के सेक्टर जे में भव्यतम ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल' को आकार दिया है। 65 एकड़ में विकसित इस भव्य स्थल पर अटलजी की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। अटलजी के ही बगल में जनसंघ-भाजपा के दो अन्य पितृपुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय व श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाएं भी इतनी ही ऊंचाई की बनाई गई हैं।
इस स्थान पर 6300 वर्गमीटर का कमल के आकार का संग्रहालय भी बनाया गया है और 3 हजार की क्षमता वाला एक भव्य थियेटर भी। 230 करोड़ की लागत से विकसित और करीब 2 लाख लोगों की क्षमता वाले इस राष्ट्र प्रेरणा स्थल को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को लोकार्पित करेंगे। यहां सुबह 11.30 बजे से कार्यक्रम शुरू होंगे। दोपहर 2 बजे प्रधानमंत्री मोदी प्रतिमाओं का लोकार्पण करेंगे और फिर एक जनसभा व रैली को भी संबोधित करेंगे।
इंदौर में भी आज सुबह से भाजपाई अपने नेता अटल को सुमिरन कर रहे हैं। उनकी याद में पार्टी कार्यालय पर भव्य रंगोली सजाई गई व दीपावली की तरह दीप प्रज्ज्वलित किए गए। अध्यक्ष सुमित मिश्रा की अगुआई में यहां पार्टी की महिला नेताओं ने अटलजी के अखंड भारत के स्वप्न को रंगों से साकार किया।
कविमना अटलजी की स्मृति में आज शाम विधानसभा-2 में विधायक रमेश मेंदोला की अगुआई में कवि सम्मेलन भी होगा। इस कवि सम्मेलन में अटलजी के समकालीन भाजपा व जनसंघ के नेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।
‘उस अजातशत्रु' के कृतित्व व व्यक्तित्व को शब्दों में बांधने का किसका सामर्थ्य है? वह जो ‘काल के कपाल पर लिखता-मिटाता जाता था', उस पर क्या कोई लिख पाएगा? वह, जिसकी ‘मौत से भी ठन गई' लेकिन वह उससे भी विजयी हुआ। वह ‘हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा' का जयघोष गुंजाता था और ‘अंधेरा छंटेगा-कमल खिलेगा' का स्वप्न न सिर्फ देखता, बल्कि उसे साकार होते व करते भी देखता है।
वह, जो इस आर्यावर्त को ‘भारत जमीन का एक टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है' के भाव को प्राणपण से मानता था, उसके साथ तो बस ‘कदम मिलाकर चलना होगा' का भाव ही रखा जा सकता है। वह, जो ‘गीत नया गाता हूं' का गान कर टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी, अंतर को चीर व्यथा, पलकों पर ठिठकी' के अवसाद से झट-से उबर भी जाता है।
उस स्वप्नदृष्टा के लिए जितना कहा, लिखा और पढ़ा जाए, कमतर ही रहना है। बाल सुलभ मुस्कान का धनी वह कालजयी पुरुष... भारत के जन-जन की स्मृतियों में सदैव अटल था, अटल है और अटल ही रहेगा। उसी अजर-अमर-अटल को शत-शत नमन।
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