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यूपीआई ऑनलाइन से शहर में डिजिटल लूट: इनाम, निवेश, शेयर ट्रेडिंग का झांसा देकर ठगों ने लाखों रुपए उड़ाए

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शहर में साइबर ठगी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। यूपीआई, ऑनलाइन ट्रेडिंग, फर्जी वेबसाइट और लॉटरी के नाम पर आम लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में साफ हो रही है। बीते दिनों शहर...

Khulasa First

संवाददाता

24 दिसंबर 2025, 10:40 पूर्वाह्न
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यूपीआई ऑनलाइन से शहर में डिजिटल लूट

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
शहर में साइबर ठगी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। यूपीआई, ऑनलाइन ट्रेडिंग, फर्जी वेबसाइट और लॉटरी के नाम पर आम लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में साफ हो रही है। बीते दिनों शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों में लाखों रुपए की ठगी की गई।

पहले मामले में मल्हारगंज थाने में मुरलीधर निवासी सत्यम कॉम्प्लेक्स ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके परिचित हिमांशु जोशी निवासी द्वारकापुरी और कपिल कुमार निवासी गोपुर चौराहा ने षड्यंत्रपूर्वक उनके मोबाइल फोन का दुरुपयोग करते हुए यूपीआई के जरिए 11 लाख 54 हजार रुपए निकाल लिए।

पीड़ित को जब तक ठगी का अहसास हुआ, तब तक खाते से बड़ी रकम निकल चुकी थी। दूसरे मामले में राजेंद्र नगर थाने में मुकुंद सूबेदार निवासी धन्वंतरि नगर ने पुलिस को बताया एक अज्ञात मोबाइलधारक ने भरोसे में लेकर उनकी यूपीआई आईडी का इस्तेमाल कर खाते से 1 लाख 58 हजार रुपए निकाल लिए। बाद में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। इसी प्रकार हीरा नगर थाना क्षेत्र में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की घटना हुई।

शरद कुमार मिश्रा निवासी श्याम नगर ने पुलिस को बताया Bestbeautylab.com नामक वेबसाइट के जरिये शेयर ट्रेडिंग का झांसा दिया गया। पहले छोटे निवेश पर रिटर्न दिखाकर भरोसा जीता। इसके बाद धीरे-धीरे उनसे कुल 7 लाख 13 हजार रुपए की ट्रेडिंग करवा ली गई, लेकिन एक भी रुपया वापस नहीं मिला। जब वेबसाइट संचालकों से संपर्क किया तो 6 लाख 48 हजार रुपए वापस करने का झांसा दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी द्वारा दिया गया जीएसटी नंबर और हरियाणा का पता फर्जी था।

बेटी के साथ धोखा, पिता ने की शिकायत
बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाले एक उदय राज ने अपनी बेटी के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई। फरियादी ने पुलिस को बताया उनकी बेटी को ऑनलाइन निवेश का झांसा देकर 1 लाख 10 हजार रुपए ठग लिए गए। आरोपी ने आसान मुनाफे का सपना दिखाकर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।

वहीं रावजी बाजार थाने में क्षेत्र के ही निवासी कैलाशचंद्र मालवीय ने शिकायत दर्ज कराई कि केरल ऑनलाइन सर्विस लॉटरी के नाम पर कॉल आया। इसमें बड़े इनाम का भरोसा दिलाते हुए यूपीआई के माध्यम से उनके खाते से 74 हजार रुपए निकाल लिए गए। लगातार हो रही ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामले बता रहे हैं कि साइबर ठग नित-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।

पुलिस ने सभी मामलों में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, वेबसाइट या निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करें। ऐसे किसी झांसे व लालच में आकर अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवाने का खतरा रहता है।

ई-चालान की आड़ में साइबर जाल, पुलिसकर्मी भी बने शिकार
साइबर ठगों का नया हथियार बनी एपीके फाइल अब आम लोगों तक सीमित नहीं रही। इंदौर में पुलिसकर्मी ही इस फ्रॉड का शिकार हो गए। ई-चालान के नाम पर भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल और व्हाट्सऐप हैक हो गए। गनीमत रही कि समय रहते कई पुलिसकर्मियों ने अपनी निजी जानकारी सुरक्षित कर ली, वरना नुकसान और बड़ा हो सकता था।

जानकारी के मुताबिक आजाद नगर, लसूड़िया और चंदन नगर थानों में पदस्थ 10 से अधिक पुलिसकर्मियों के मोबाइल में ई-चालान के नाम से एपीके फाइल पहुंची। फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल का कंट्रोल साइबर अपराधियों के हाथ में चला गया। इसके बाद उन्हीं नंबरों से अन्य लोगों को भी ई-चालान के मैसेज भेजे गए, जिससे कुछ और मोबाइल हैक हो गए।

साइबर ठगों ने पुलिसकमिज़्यों के व्हाट्सऐप अकाउंट अपने कब्जे में लेकर उनकी डीपी हटा दी और उसकी जगह ई-चालान (डिजिटल चालान सॉल्यूशन) नाम की डीपी लगा दी। इसके बाद सेव किए गए नंबरों पर अंग्रेजी भाषा में ट्रैफिक नियम तोड़नेे का नोटिस भेजा गया। मैसेज के साथ करीब सात एमबी की एपीके फाइल अटैच की गई।

पुलिस से आया मैसेज समझकर जैसे ही लोग फाइल खोले उनके मोबाइल भी हैक हो गए। एक मामले में तो साइबर अपराधियों ने एक सब इंस्पेक्टर के खाते से 58 हजार रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया के अनुसार इस साल एपीके फाइल के जरिए ठगी के 348 मामले सामने आ चुके हैं,

जिनमें 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हो चुकी है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें, चाहे वह ई-चालान या किसी परिचित के नंबर से ही क्यों न आई हो।

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