नववर्ष पर सिद्धपीठ माता बगलामुखी के दर्शन के लिए जुटेंगे देशभर से श्रद्धालु: शक्तिपीठ पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन कर रहा पुख्ता इंतजाम
हेमंत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर । मान्यता है कि द्वापर युग में महाभारत युद्ध में कौरवों पर जीत हासिल करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर युधिष्ठिर ने माता बगलामुखी की कठिन...
Khulasa First
संवाददाता

हेमंत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मान्यता है कि द्वापर युग में महाभारत युद्ध में कौरवों पर जीत हासिल करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर युधिष्ठिर ने माता बगलामुखी की कठिन आराधना की थी। पांडवों ने यहीं साधना और अनुष्ठान कर अजेय होने का वरदान पाया था। करीब पांच हजार वर्ष पुराने इस महाभारत कालीन मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु मां बगलामुखी के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने आते हैं और माता की स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन लाभ लेकर चमत्कृत और धन्य हो जाते हैं। कुछ पौराणिक कथाओं में यह उल्लेख भी है कि बगलामुखी मंदिर की आधारशिला खुद भगवान ब्रह्मा ने रखी थी। नव वर्ष पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति और स्थानीय प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।
सुबह 6 बजे खुलेगा मंदिर...
मां बगलामुखी का मंदिर प्रतिदिन सुबह 6 बजे खुलता है। आरती के बाद भक्तों के दर्शनों का सिलसिला आरंभ हो जाता है। दर्शनों का दौर रात 9 बजे तक अनवरत चलता है। नव वर्ष पर भी यही प्रबंध रहेंगे। मंदिर प्रशासक और तहसीलदार नलखेड़ा प्रियंक श्रीवास्तव ने खुलासा फर्स्ट को विशेष बातचीत में बताया कि करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के नव वर्ष के पहले दिन मां बगलामुखी मंदिर पहुंचने की संभावना है।
इसी को देखते हुए इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर प्रशासक के अनुसार गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश बंद रहेगा। वीआईपी भक्तों के लिए अलग से इंतजाम नहीं होंगे। भक्तों के कतारबद्ध दर्शन के लिए बैरिकेडिंग का बेहतर प्रबंध है।
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मंदिर प्रशासक प्रियंक श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य अनुभव यह रहता है कि पर्व और विशेष दिनों में पार्किंग का स्थान छोटा पड़ता है। इसे देखते हुए मंदिर के समीप ही वैकल्पिक पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। पार्किंग सुविधा नि:शुल्क ही रहेगी। मंदिर में विशेष साज-सज्जा भी की जाएगी।
मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य विनोद गवली ने खुलासा फर्स्ट से चर्चा करते हुए बताया कि अब तक का आकलन यही है कि प्रतिवर्ष 50 से 60 हजार भक्त मां बगलामुखी के दर्शनों को आते हैं। भक्तों को बेहतर सुविधा मिल सके और वे सुगम दर्शन कर सकें इसके लिए समिति की बैठक भी होनी है। उनके अनुसार वैकल्पिक पार्किंग होने से भक्तों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भीड़ बढ़ने पर बाहर से दर्शन होंगे
मंदिर के पुजारी बाबूलाल शर्मा ने खुलासा फर्स्ट को बताया कि आम दिनों में मुख्य द्वार तक भक्तों को जाने दिया जाता है। भीड़ बढ़ने पर बाहर से ही से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। नवरात्र और अन्य पर्व के दिनों में इसी तरह का प्रबंध किया जाता है। शनिवार और रविवार के दिन भी यही व्यवस्था रहती है।
पुजारीजी का कहना है कि सभी भक्त इसी मंशा से यहां आते हैं कि पहले दिन वे मां बगलामुखी के दर्शन करें और उनका पूरा साल अच्छे से बीते। पिछले वर्ष करीब पचास हजार भक्तों ने नववर्ष पर मां बगलामुखी के दर्शन किए थे। इस बार इस आंकड़े में बढ़ोतरी हो सकती है।
मां बगलामुखी मंदिर एक नजर में
मंदिर का नवीनीकरण वर्ष 1815 के आसपास किए जाने की जानकारी है। भक्तों को आकर्षित करने वाला मां बगलामुखी मंदिर का प्रवेश द्वार भी बाद में निर्मित किया गया।
मां बगलामुखी का मंदिर नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे बना हुआ है। तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले इस मंदिर के क्षेत्र को प्राचीन श्मशान भी बताया जाता है।
मां बगलामुखी मंदिर में मां के दुर्लभ और अनूठे त्रिशक्ति स्वरूप के भक्तों को दर्शन होते हैं। मंदिर के गर्भगृह में मां बगलामुखी बीच में हैं तो दाईं ओर मां लक्ष्मी और बाईं ओर मां सरस्वती विराजमान हैं।
देश में नलखेड़ा के साथ ही मध्य प्रदेश के दतिया और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में मां बगलामुखी का ऐतिहासिक मंदिर है। ये स्थान जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में जाने जाते हैं।
मां बगलामुखी को शत्रु स्तंभन अर्थात शत्रु को शक्तिहीन करने की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। दस महाविद्याओं से में उन्हें आठवीं महाविद्या माना जाता है।
कानूनी मामलों के साथ शत्रु पर विजय की कामना के साथ भक्त यहां अनुष्ठान और हवन करवाते हैं। मंदिर के पीछे बनी विशाल यज्ञशाला में जब हवन होते हैं तो यह दृश्य अवर्णनीय होता है। देशभर के राजनेता, अभिनेता, विद्वान यहां नियमित अनुष्ठान-हवन के लिए आते रहते हैं।
मां बगलामुखी को पीतांबरा भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां को पीला रंग प्रिय है। इस स्वरूप में मां का शृंगार अलौकिक नजर आता है। इसी तरह इस मंदिर में पीले फूल और पीले वस्त्र के साथ पीले रंग का प्रसाद चढ़ाने की भी मान्यता है। शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि मां बगलामुखी का प्राकट्य हल्दी के जल से हुआ था।
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